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Noida News: गर्दन की गांठ को न समझें मामूली, टीबी का हो सकती है संकेत
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- जिम्स में रोजाना 4-5 मरीज पहुंच रहे, डॉक्टर बोले- लंबे समय तक गांठ रहने पर कराएं जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। गर्दन या गले पर अचानक उभरने वाली गांठ को अक्सर लोग सामान्य सूजन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, यह गांठ लिम्फ नोड टीबी का संकेत भी हो सकती है। ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में इन दिनों गर्दन पर गांठ की शिकायत लेकर रोजाना चार से पांच मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि हर गांठ टीबी नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक गांठ रहने पर इसकी जांच कराना जरूरी है।
चिकित्सकों के अनुसार, गर्दन की लिम्फ नोड में होने वाली टीबी को लिम्फ नोड टीबी या टीबी लिम्फैडेनाइटिस कहा जाता है। गर्दन, बगल या जांघ के पास लिम्फ नोड का करीब एक सेंटीमीटर से अधिक बढ़ना चिकित्सकीय जांच का कारण हो सकता है। इसके साथ बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और खांसी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। जिम्स के डॉट सेंटर के प्रभारी डॉ. गौरव सक्सेना ने बताया कि कई मरीज शुरुआती दौर में गर्दन की गांठ को गंभीरता से नहीं लेते। गांठ के आकार में बढ़ोतरी, दर्द, लालिमा या मवाद जैसी समस्या होने के बाद ही अस्पताल पहुंचते हैं। इससे बीमारी की पहचान और उपचार शुरू होने में देरी हो सकती है। डॉ. सक्सेना के मुताबिक गांठ की प्रकृति और मरीज की स्थिति के आधार पर जांच कराई जाती है। लिम्फ नोड टीबी की पुष्टि के लिए एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) समेत जरूरत के अनुसार अन्य जांच की जाती हैं। समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान कर उपचार शुरू किया जा सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। गर्दन या गले पर अचानक उभरने वाली गांठ को अक्सर लोग सामान्य सूजन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, यह गांठ लिम्फ नोड टीबी का संकेत भी हो सकती है। ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में इन दिनों गर्दन पर गांठ की शिकायत लेकर रोजाना चार से पांच मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि हर गांठ टीबी नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक गांठ रहने पर इसकी जांच कराना जरूरी है।
चिकित्सकों के अनुसार, गर्दन की लिम्फ नोड में होने वाली टीबी को लिम्फ नोड टीबी या टीबी लिम्फैडेनाइटिस कहा जाता है। गर्दन, बगल या जांघ के पास लिम्फ नोड का करीब एक सेंटीमीटर से अधिक बढ़ना चिकित्सकीय जांच का कारण हो सकता है। इसके साथ बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और खांसी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। जिम्स के डॉट सेंटर के प्रभारी डॉ. गौरव सक्सेना ने बताया कि कई मरीज शुरुआती दौर में गर्दन की गांठ को गंभीरता से नहीं लेते। गांठ के आकार में बढ़ोतरी, दर्द, लालिमा या मवाद जैसी समस्या होने के बाद ही अस्पताल पहुंचते हैं। इससे बीमारी की पहचान और उपचार शुरू होने में देरी हो सकती है। डॉ. सक्सेना के मुताबिक गांठ की प्रकृति और मरीज की स्थिति के आधार पर जांच कराई जाती है। लिम्फ नोड टीबी की पुष्टि के लिए एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) समेत जरूरत के अनुसार अन्य जांच की जाती हैं। समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान कर उपचार शुरू किया जा सकता है।
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