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Noida News: जलभराव में टूटा स्लैब बना जानलेवा, प्राधिकरण की लापरवाही से इंजीनियर की गई जान
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- बृहस्पतिवार सुबह बारिश के बीच सेक्टर-58 स्थित कंपनी जाते वक्त टूटे स्लैब से फिसलकर से नाले में गिरे, पुलिस कर रही जांच
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही एक बार फिर जानलेवा बन गई। बृहस्पतिवार सुबह करीब 9 बजे सेक्टर-58 में बारिश और जलभराव के बीच ऑफिस जा रहे इंजीनियर की नाले में गिरने से मौत हो गई। मूलरूप से फार्रुखाबाद निवासी आर्यन (27) सड़क पर जलभराव की बीच नाले के स्लैब पर चलते हुए ऑफिस जा रहे थे। स्लैब भी पानी में डूबे थे। रास्ते पर टूटे स्लैब के कारण वह नाले में गिर गए। कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के सही कारणों का पता नहीं चला है। पुलिस ने विसरा सुरक्षित रख लिया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चौड़ा गांव निवासी आर्यन सेक्टर-58 स्थित लोहे का उत्पाद बनाने वाली कंपनी में टेक्निकल सुपरवाइजर थे। हाल ही में उन्होंने बीटेक पास किया था। बृहस्पतिवार सुबह मूसलाधार बारिश के बीच सेक्टर-58 की कई सड़कें पानी में डूब गई थीं। सड़क पर घुटनों तक पानी भरा होने के कारण आर्यन नाले के ऊपर बने स्लैब के सहारे आगे जा रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आर्यन जब सेक्टर-58 स्थित ए-3 कंपनी के सामने पहुंचे वहां लगे ट्रांसफार्मर में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। तेज आवाज और चिंगारी निकलने से वह घबरा गए। इसी बीच उनका पैर टूटे स्लैब पर पड़ा। वह नाले में जा गिरे। जिस स्थान पर वह गिरे वहां पानी भरा होने के कारण टूटा स्लैब दिखाई नहीं दिया। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें नाले से बाहर निकालकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। कोतवाली प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि नाले में गिरने से युवक की मौत हुई है। इस मामले में अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है।
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काफी समय से टूटा हुआ है स्लैब
सेक्टर-58 में काम करने वाले कामगार नीरज ने बताया कि वहां लंबे समय से नाले का स्लैब टूटा हुआ था। इसकी जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों को दी गई थी। इसके बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई। बारिश के दौरान जलभराव होने से टूटा हिस्सा दिखाई नहीं देने से हादसे की आशंका बनी रहती है।
लोग बोले, हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही
स्थानीय निवासियों ने बताया कि समय रहते मरम्मत कर दी जाती तो हादसा टाला जा सकता था। लोगों ने इसे हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है। अहम है कि बारिश के दौरान नोएडा के कई सेक्टरों में जलभराव की स्थिति बनी रही। कई स्थानों पर सड़क और नाले का अंतर ही दिखाई नहीं देता। ऐसे में पैदल चलने वालों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
हर बार बरती जाती है लापरवाही
नोएडा प्राधिकरण हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई, टूटे स्लैब बदलने और जलभराव वाले स्थानों को दुरुस्त करने के दावे करता है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में खुले नाले, टूटे स्लैब और जलनिकासी की खराब व्यवस्था बनी हुई है। सेक्टर-58 की घटना ने इन दावों की पोल खोल दी।
युवराज प्रकरण से भी नहीं लिया सबक
जनवरी में सेक्टर-150 में कार समेत पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरकर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी। तब सिस्टम पर सवाल खड़े हुए थे। मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी। युवराज की मौत के मामले के बाद भी नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे थे। उस घटना के बाद खुले नालों और जलभराव वाले स्थानों को सुरक्षित बनाने, टूटे स्लैब बदलने और नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों ने व्यापक अभियान चलाने का दावा भी किया था, लेकिन सेक्टर-58 की घटना बताती है कि जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ।
करंट लगने की भी जताई जा रही आशंका
सेक्टर-58 में जहां पर आर्यन नाले में गिरे वहीं पर ट्रांसफार्मर लगा था। मुंह के बल नाले में गिरे आर्यन को करंट लगने की भी आशंका जताई जा रही है। लोगों ने बताया कि हादसे के वक्त ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट भी हुआ था। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला है कि जिस जगह हादसा हुआ वहां नाले की गहराई भी बहुत अधिक नहीं था।
परिजनों ने प्राधिकरण व बिजली विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप
बृहस्पतिवार कीे घटना के बाद मृतक आर्यन के परिजन नोएडा पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजन फर्रुखाबाद ले गए। चाचा अनमोल ने प्राधिकरण व बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस से देने की बात कही है।
परिवार के इकलौते चिराग के बुझने से पसरा मातम
आर्यन के पिता की मौत पहले ही हो चुकी है। वह अपनी मां के साथ चौड़ा गांव में रहते थे। वह निजी कंपनी में नौकरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। परिवार के इकलौते आर्यन की मौत के बाद उनकी मां समेत परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं परिजनों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही एक बार फिर जानलेवा बन गई। बृहस्पतिवार सुबह करीब 9 बजे सेक्टर-58 में बारिश और जलभराव के बीच ऑफिस जा रहे इंजीनियर की नाले में गिरने से मौत हो गई। मूलरूप से फार्रुखाबाद निवासी आर्यन (27) सड़क पर जलभराव की बीच नाले के स्लैब पर चलते हुए ऑफिस जा रहे थे। स्लैब भी पानी में डूबे थे। रास्ते पर टूटे स्लैब के कारण वह नाले में गिर गए। कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के सही कारणों का पता नहीं चला है। पुलिस ने विसरा सुरक्षित रख लिया है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक चौड़ा गांव निवासी आर्यन सेक्टर-58 स्थित लोहे का उत्पाद बनाने वाली कंपनी में टेक्निकल सुपरवाइजर थे। हाल ही में उन्होंने बीटेक पास किया था। बृहस्पतिवार सुबह मूसलाधार बारिश के बीच सेक्टर-58 की कई सड़कें पानी में डूब गई थीं। सड़क पर घुटनों तक पानी भरा होने के कारण आर्यन नाले के ऊपर बने स्लैब के सहारे आगे जा रहे थे।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आर्यन जब सेक्टर-58 स्थित ए-3 कंपनी के सामने पहुंचे वहां लगे ट्रांसफार्मर में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। तेज आवाज और चिंगारी निकलने से वह घबरा गए। इसी बीच उनका पैर टूटे स्लैब पर पड़ा। वह नाले में जा गिरे। जिस स्थान पर वह गिरे वहां पानी भरा होने के कारण टूटा स्लैब दिखाई नहीं दिया। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें नाले से बाहर निकालकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। कोतवाली प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि नाले में गिरने से युवक की मौत हुई है। इस मामले में अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है।
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काफी समय से टूटा हुआ है स्लैब
सेक्टर-58 में काम करने वाले कामगार नीरज ने बताया कि वहां लंबे समय से नाले का स्लैब टूटा हुआ था। इसकी जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों को दी गई थी। इसके बावजूद मरम्मत नहीं कराई गई। बारिश के दौरान जलभराव होने से टूटा हिस्सा दिखाई नहीं देने से हादसे की आशंका बनी रहती है।
लोग बोले, हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही
स्थानीय निवासियों ने बताया कि समय रहते मरम्मत कर दी जाती तो हादसा टाला जा सकता था। लोगों ने इसे हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है। अहम है कि बारिश के दौरान नोएडा के कई सेक्टरों में जलभराव की स्थिति बनी रही। कई स्थानों पर सड़क और नाले का अंतर ही दिखाई नहीं देता। ऐसे में पैदल चलने वालों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
हर बार बरती जाती है लापरवाही
नोएडा प्राधिकरण हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई, टूटे स्लैब बदलने और जलभराव वाले स्थानों को दुरुस्त करने के दावे करता है। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में खुले नाले, टूटे स्लैब और जलनिकासी की खराब व्यवस्था बनी हुई है। सेक्टर-58 की घटना ने इन दावों की पोल खोल दी।
युवराज प्रकरण से भी नहीं लिया सबक
जनवरी में सेक्टर-150 में कार समेत पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरकर इंजीनियर युवराज की मौत हो गई थी। तब सिस्टम पर सवाल खड़े हुए थे। मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी। युवराज की मौत के मामले के बाद भी नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे थे। उस घटना के बाद खुले नालों और जलभराव वाले स्थानों को सुरक्षित बनाने, टूटे स्लैब बदलने और नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों ने व्यापक अभियान चलाने का दावा भी किया था, लेकिन सेक्टर-58 की घटना बताती है कि जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ।
करंट लगने की भी जताई जा रही आशंका
सेक्टर-58 में जहां पर आर्यन नाले में गिरे वहीं पर ट्रांसफार्मर लगा था। मुंह के बल नाले में गिरे आर्यन को करंट लगने की भी आशंका जताई जा रही है। लोगों ने बताया कि हादसे के वक्त ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट भी हुआ था। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला है कि जिस जगह हादसा हुआ वहां नाले की गहराई भी बहुत अधिक नहीं था।
परिजनों ने प्राधिकरण व बिजली विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप
बृहस्पतिवार कीे घटना के बाद मृतक आर्यन के परिजन नोएडा पहुंच गए। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजन फर्रुखाबाद ले गए। चाचा अनमोल ने प्राधिकरण व बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस से देने की बात कही है।
परिवार के इकलौते चिराग के बुझने से पसरा मातम
आर्यन के पिता की मौत पहले ही हो चुकी है। वह अपनी मां के साथ चौड़ा गांव में रहते थे। वह निजी कंपनी में नौकरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। परिवार के इकलौते आर्यन की मौत के बाद उनकी मां समेत परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं परिजनों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।