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Noida News: परिषदीय स्कूलों की पढ़ाई पर पैनी नजर, क्षेत्रवार मूल्यांकन से सुधरेगी गुणवत्ता
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- कक्षावार आकलन पर रहेगा विशेष जोर, कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर सुधार की बनेगी योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में सुधार लाने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत गौतमबुद्ध नगर के विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों या पॉकेट में विभाजित कर वहां की शैक्षणिक स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन कराया जाएगा। नई व्यवस्था में ओवरऑल प्रदर्शन के साथ-साथ कक्षावार आकलन को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
गौतमबुद्ध नगर के परिषदीय विद्यालयों की स्थिति बीते कुछ वर्षों में बेहतर हुई है। निपुण भारत मिशन के तहत हुए मूल्यांकन में छात्रों की सीखने की क्षमता में सुधार देखने को मिला है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह के विद्यार्थियों का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया। हालांकि शिक्षा विभाग का मानना है कि अभी कई क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार होना बाकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग और एससीईआरटी ने नई कार्ययोजना लागू करने का निर्णय लिया है।
छोटे-छोटे शैक्षणिक क्षेत्रों में बांटा जाएगा : नई रणनीति के तहत विद्यालयों को छोटे-छोटे शैक्षणिक क्षेत्रों में बांटा जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र की पढ़ाई, छात्रों की सीखने की क्षमता, शिक्षण पद्धति और विद्यालयी व्यवस्थाओं का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा। इससे विभाग को यह समझने में आसानी होगी कि किन क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर बेहतर है और किन स्थानों पर अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है।
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शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था में कक्षावार मूल्यांकन को विशेष महत्व दिया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का अलग-अलग आकलन होगा। सभी कक्षाओं की शैक्षणिक आवश्यकताएं अलग होती हैं, इसलिए एक समान मूल्यांकन से वास्तविक परिणाम सामने नहीं आते। कक्षावार समीक्षा होने से यह पता चल सकेगा कि किस स्तर पर बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता की जरूरत है।
प्रदेश सरकार की प्राथमिकता सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में यह नई पहल शुरू की जा रही है। क्षेत्रवार और कक्षावार मूल्यांकन से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और उसी के अनुरूप योजनाएं बनाई जाएंगी।
- राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी।
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में सुधार लाने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत गौतमबुद्ध नगर के विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों या पॉकेट में विभाजित कर वहां की शैक्षणिक स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन कराया जाएगा। नई व्यवस्था में ओवरऑल प्रदर्शन के साथ-साथ कक्षावार आकलन को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
गौतमबुद्ध नगर के परिषदीय विद्यालयों की स्थिति बीते कुछ वर्षों में बेहतर हुई है। निपुण भारत मिशन के तहत हुए मूल्यांकन में छात्रों की सीखने की क्षमता में सुधार देखने को मिला है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह के विद्यार्थियों का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया। हालांकि शिक्षा विभाग का मानना है कि अभी कई क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार होना बाकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग और एससीईआरटी ने नई कार्ययोजना लागू करने का निर्णय लिया है।
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छोटे-छोटे शैक्षणिक क्षेत्रों में बांटा जाएगा : नई रणनीति के तहत विद्यालयों को छोटे-छोटे शैक्षणिक क्षेत्रों में बांटा जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र की पढ़ाई, छात्रों की सीखने की क्षमता, शिक्षण पद्धति और विद्यालयी व्यवस्थाओं का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा। इससे विभाग को यह समझने में आसानी होगी कि किन क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर बेहतर है और किन स्थानों पर अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है।
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शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था में कक्षावार मूल्यांकन को विशेष महत्व दिया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का अलग-अलग आकलन होगा। सभी कक्षाओं की शैक्षणिक आवश्यकताएं अलग होती हैं, इसलिए एक समान मूल्यांकन से वास्तविक परिणाम सामने नहीं आते। कक्षावार समीक्षा होने से यह पता चल सकेगा कि किस स्तर पर बच्चों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता की जरूरत है।
प्रदेश सरकार की प्राथमिकता सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में यह नई पहल शुरू की जा रही है। क्षेत्रवार और कक्षावार मूल्यांकन से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी और उसी के अनुरूप योजनाएं बनाई जाएंगी।
- राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी।