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Noida News: जीबीयू में 24 से 26 जुलाई तक सजेगा भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक मंच
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-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद् करेंगे ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं पर मंथन
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में 24 से 26 जुलाई तक भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित द्वितीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन-2026 का आयोजन किया जाएगा। आईकेएस हेरिटेज एसोसिएशन (इक्शा) और जीबीयू के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन की थीम आईकेएस: री वीविंग द थ्रेड्स ऑफ नॉलेज रखी गई है। सम्मेलन से पहले 23 जुलाई को युवा शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश के कुलपति, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श करेंगे। आयोजन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, शासन, नीति निर्माण और सतत विकास से जोड़ना है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, प्रो. शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित, प्रो. नीरजा गुप्ता और जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह समेत कई प्रमुख शिक्षाविद् शामिल होंगे। सम्मेलन में तिब्बती बौद्ध परंपरा की नालंदा विरासत, भारतीय दर्शन, पारंपरिक ज्ञान का डिजिटलीकरण, भाषाविज्ञान, व्याकरण, गणित, आयुर्वेद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), लोक नीति और चाणक्य के आर्थिक विचारों जैसे विषयों पर व्याख्यान और शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। 25 जुलाई को सांस्कृतिक संध्या और 26 जुलाई को समापन समारोह आयोजित होगा।
कोट-
भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य के ज्ञान-विज्ञान, नवाचार और सतत विकास का आधार है। यह सम्मेलन भारतीय बौद्धिक विरासत को वैश्विक अकादमिक समुदाय से जोड़ने और युवा शोधकर्ताओं को नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। -प्रो. राणा प्रताप सिंह, जीबीयू के कुलपति
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में 24 से 26 जुलाई तक भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित द्वितीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सम्मेलन-2026 का आयोजन किया जाएगा। आईकेएस हेरिटेज एसोसिएशन (इक्शा) और जीबीयू के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन की थीम आईकेएस: री वीविंग द थ्रेड्स ऑफ नॉलेज रखी गई है। सम्मेलन से पहले 23 जुलाई को युवा शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए रिसर्च मेथोडोलॉजी कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश के कुलपति, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श करेंगे। आयोजन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, शासन, नीति निर्माण और सतत विकास से जोड़ना है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, प्रो. शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित, प्रो. नीरजा गुप्ता और जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह समेत कई प्रमुख शिक्षाविद् शामिल होंगे। सम्मेलन में तिब्बती बौद्ध परंपरा की नालंदा विरासत, भारतीय दर्शन, पारंपरिक ज्ञान का डिजिटलीकरण, भाषाविज्ञान, व्याकरण, गणित, आयुर्वेद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), लोक नीति और चाणक्य के आर्थिक विचारों जैसे विषयों पर व्याख्यान और शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। 25 जुलाई को सांस्कृतिक संध्या और 26 जुलाई को समापन समारोह आयोजित होगा।
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कोट-
भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य के ज्ञान-विज्ञान, नवाचार और सतत विकास का आधार है। यह सम्मेलन भारतीय बौद्धिक विरासत को वैश्विक अकादमिक समुदाय से जोड़ने और युवा शोधकर्ताओं को नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। -प्रो. राणा प्रताप सिंह, जीबीयू के कुलपति
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