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Noida News: टीबी स्क्रीनिंग से मिले जनस्वास्थ्य सुधार के अहम संकेत
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ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सकों ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान किए गए तपेदिक (टीबी) जैसी संक्रामक बीमारी पर शोध में बड़ी कामयाबी हासिल की। शोध में सामने आया है कि दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समागम में तपेदिक (टीबी) जैसी संक्रामक बीमारी की स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान जनस्वास्थ्य को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। जिम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर (एनेस्थिसियोलॉजी) डॉ. विनय कुमार के अध्ययन में पाया गया है कि बड़े आयोजनों में बीमारी की समय रहते पहचान और लोगों को जागरूक करने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
शोध के अनुसार, महाकुंभ-2025 में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच टीबी स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यक्रमों का आकलन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में हवा से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन यही आयोजन लाखों लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने और ऐसे मरीजों की पहचान करने का अवसर भी देते हैं जिनमें बीमारी का पहले पता नहीं चल पाया था।
हालांकि, अध्ययन में यह भी सामने आया कि सक्रिय टीबी स्क्रीनिंग संभव होने के बावजूद स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाए गए कई लोग आगे की जांच पूरी नहीं करा सके। इसका मुख्य कारण यह रहा कि उन्नत जांच सुविधाएं केवल एक स्थान पर उपलब्ध थीं जिससे बड़ी संख्या में लोगों का फॉलो-अप प्रभावित हुआ।
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डॉ. विनय कुमार ने कि टीबी की बीमारी को रोकने के लिए भविष्य में महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में विकेंद्रीकृत जांच केंद्र स्थापित किए जाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती हो, व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं और मरीजों के लिए प्रभावी फॉलो-अप प्रणाली विकसित की जाए। इससे टीबी के मामलों की शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि भारत टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में महाकुंभ जैसे विशाल आयोजनों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यक्रम शामिल करने से बीमारी की जल्द पहचान संभव होगी।
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शोध के अनुसार, महाकुंभ-2025 में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच टीबी स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यक्रमों का आकलन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में हवा से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन यही आयोजन लाखों लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने और ऐसे मरीजों की पहचान करने का अवसर भी देते हैं जिनमें बीमारी का पहले पता नहीं चल पाया था।
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हालांकि, अध्ययन में यह भी सामने आया कि सक्रिय टीबी स्क्रीनिंग संभव होने के बावजूद स्क्रीनिंग में संदिग्ध पाए गए कई लोग आगे की जांच पूरी नहीं करा सके। इसका मुख्य कारण यह रहा कि उन्नत जांच सुविधाएं केवल एक स्थान पर उपलब्ध थीं जिससे बड़ी संख्या में लोगों का फॉलो-अप प्रभावित हुआ।
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डॉ. विनय कुमार ने कि टीबी की बीमारी को रोकने के लिए भविष्य में महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में विकेंद्रीकृत जांच केंद्र स्थापित किए जाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती हो, व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं और मरीजों के लिए प्रभावी फॉलो-अप प्रणाली विकसित की जाए। इससे टीबी के मामलों की शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि भारत टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में महाकुंभ जैसे विशाल आयोजनों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यक्रम शामिल करने से बीमारी की जल्द पहचान संभव होगी।