विश्व पृथ्वी दिवस: सूरज की रोशनी से हर रोज 12.50 मेगावाट बिजली से जगमगा रहा नोएडा, इस साल लगेंगे 8 लाख नए पौधे
यूपीनेडा के प्रभारी परियोजना अधिकारी लवेश कुमार सिसोदिया ने बताया कि जिलेभर में अब तक 2610 सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 12.48 मेगावाट है। इनसे हर दिन करीब 56,160 यूनिट बिजली पैदा हो रही है।
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नोएडा शहर ने सालभर में 18,720 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम किया है। यह सोलर ऊर्जा की बढ़ती उपयोगिता से संभव हो सका। जिलेभर में 2610 स्थानों पर सोलर स्थापित करके रोजाना 12.48 मेगावाट बिजली उत्पन्न करके अन्य माध्यमों से आने वाली विद्युत का उपयोग कम कर दिया है। वहीं दूसरी ओर जिलेभर में जहां पिछली साल 13 लाख पौधे लगाए गए, वहीं इस साल आठ लाख पौधे लगाए जाएंगे, जो जल संचय से लेकर ऑक्सीजन और ठंडक को बढ़ाएंगे।
यूपीनेडा के प्रभारी परियोजना अधिकारी लवेश कुमार सिसोदिया ने बताया कि जिलेभर में अब तक 2610 सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 12.48 मेगावाट है। इनसे हर दिन करीब 56,160 यूनिट बिजली पैदा हो रही है। अगर इसकी आर्थिक कीमत देखें तो यह करीब 3.65 लाख रुपये प्रतिदिन बैठती है। सोलर ऊर्जा के चलते नोएडा ने सालभर में 18,720 एमटीओई (मिलियन टन ऑफ एक्वेलेवेंट) के बराबर कार्बन उत्सर्जन में कमी की है, जिससे प्रदूषण में कमी लाई गई है।
इसी तरह प्रदूषण को कम करने और हरियाली बढ़ाने के लिए जिलेभर में पिछले साल 13 लाख पौधे लगाए गए। वहीं इस साल विभिन्न विभागों संग मिलकर आठ लाख पौधे रोपित किए जाएंगे। इसके लिए वन विभाग जगह की तलाश कर रहा है। नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग के निदेशक आनंद मोहन ने बताया कि अकेले नोएडा में इस साल पांच लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसका काम शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पेड़ पौधों की खास बात है कि यह जीवन दायनी ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं, साथ ही पेड़ों की जड़ें जमीन की गहराई तक पहुंचती है। इसके चलते बारिश के दौरान का पानी उन जड़ों के जरिए सीधा भूूमि के अंदर पहुंचता है। इससे जल संचय करने में भी सहायता मिलती है।
जंग खा रही जिले की जल संचयन प्रणाली
जिलेभर में जल संचयन प्रणाली इन दिनों जंग खा रही है। नोएडा प्राधिकरण की ओर से पूरे सेक्टरों के पार्कों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम वर्षों पहले लगाए गए थे। सेक्टरवासियों का कहना है कि यह सिस्टम फिलहाल पूरी तरह से खराब पड़े हैं। यही कारण है कि वर्तमान में नोएडा का जलस्तर 300 फुट से ज्यादा स्तर तक गिर चुका है। जहां तालाब होने चाहिए थे, वहां पर लोगों ने या तो कब्जा कर लिया या फिर वह सूखे पड़े हैं। इसके अलावा सेक्टरों में बने भूमिगत जलाशयों की भी स्थिति खराब पड़ी है। जहां पर वर्षों से साफ सफाई नहीं हुई है। उसी जलाशय का पानी सेक्टर के घरों तक पहुंचता है। ऐसे में यह सेक्टरवासियों के लिए बीमारी की एक प्रमुख वजह बन सकता है।
हमने सेक्टर का औचक निरीक्षण किया था, उस दौरान भूमिगत जलाशय का चेंबर खुला पाया गया, जबकि वह अंदर से काफी गहरा है। इसके अलावा उसकी साफ सफाई न होने के कारण अंदर काफी गंदगी है, वहीं पानी सेक्टरवासियों के घर तक पहुंचता है जो लोगों को बीमार कर सकता है -सतनारायण गोयल, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, ,सेक्टर 55
हमारे सेक्टर में करीब 9 पार्क हैं जहां पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम वर्षों पहले बनाया गया था, पिछले कई वर्षों से इन्हें दुरूस्त नहीं किया गया, कई जगह से यह क्षतिग्रस्त है, पार्कों का ढलान उनकी तरफ न होने से बारिश का पानी उस सिस्टम तक पहुंच ही नहीं पाता है, ऐसे में जल संचय कैसे होगा -अनुज यादव, आरडब्ल्यूए उपाध्यक्ष, सेक्टर 122
अब बात उनकी जो कर कचरे का कर रहे प्रबंधन
हमारे यहां कचरा निस्तारण करके रोजाना 100 किलो बायो गैस बनाई जाती है, जो कि दो अस्पतालों में भेजी जाती है, इन अस्पतालों में मरीजों का बनने वाला खाना पकाया जाता है। इसके अलावा ऊर्जा के अन्य कार्यों में भी इसका उपयोग किया जाता है -धर्मेंद्र शर्मा, आरडब्ल्यूए महासचिव सेक्टर 34
टॉयलेट शीट से लेकर घर से निकली क्षतिग्रस्त फर्श और टाइल्स को बाहर फेंकने के बजाय उनसे सेक्टर की दीवारें सजाई जाती हैं और पौधे के लिए गमले बनाए जाते हैं, सेक्टरवासियों के घरों से निकलने वाले पुराने कपड़ों से थैलियां बनाई जाती हैं जो पॉलीथिन की जगह पर उपयोग में लाई जाती हैं -पवन यादव, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, सेक्टर 100
हमने पिछले एक महीने में करीब 15 ट्रक मलबा और कचरे को अरूण विहार की ग्रीन बेल्ट से हटाया। इसके बाद करीब चार सौ पौधे सभी के सहयोग से लगाए गए, ताकि सेक्टर की हरियाली बढ़े और ग्रीनबेल्ट को संरक्षित किया जा सके -प्रशांत गुप्ता, चेयरमैन, अरूण विहार आरडब्ल्यूए
260 एमएलडी एसटीपी के पानी से ग्रीनबेल्ट की होती है सिंचाई
नोएडा प्रधिकरण जलापूर्ति की व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। नोएडा के एसटीपी प्लांट से हर दिन करीब 260 एमएलडी गंदा पानी साफ किया जाता है। इस साफ पानी का सदुपयोग शहर की ग्रीन बेल्ट की सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसके अलावा सड़कों व अन्य साफ सफाई की प्रक्रिया में भी इसका उपयोग किया जाता है। प्राधिकरण अब जल्द ही करीब पांच नए एसटीपी बनाने की योजना बना रहा है, जिसकी प्रक्रिया जारी है।
प्लास्टिक है पृथ्वी की सबसे बड़ी दुश्मन
सेक्टर 39 स्थित राजकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय की वनस्पति विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ संघमित्रा ने बताया कि प्लास्टिक पृथ्वी की सबसे बड़ी दुश्मन है। आमतौर पर फल फूल समेत अन्य खाद्य पदार्थ या जीवों के अपशिष्ट भूमि में कुछ महीने से लेकर 4-5 वर्षों में खाद बन जाते हैं, लेकिन एक मात्र पॉलीथिन ही ऐसी है जो भूमि के 20-25 वर्षों तक दबी रहने के बाद भी खाद में परिवर्तित नहीं होती है। उसे जलाने पर निकलने वाला धुंआ भी हानिकारक होता है जो कार्बन उत्सर्जित करता है और जमीन पर रहकर वह उसकी उर्वरक क्षमता को घटाता है।
अब समझें जरूरी आकड़ें
- जिले में इस साल लगाए जाने वाले पौधे-8 लाख
- नोएडा में रोजाना शोधित हो रहा पानी -260 एमएलडी
- हर रोज सोलर से उत्पन्न ऊर्जा- 12.48 मेगावाट
- इससे सालभर में कम हो रहा कार्बन उत्सर्जन - 18,720 एमटीओई

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