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Noida News: जिला अस्पताल में टीकाकरण के लिए नहीं पहुंची एक भी किशोरी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू की गई एचपीवी वैक्सीनेशन मुहिम के तहत जिला अस्पताल में दूसरे दिन एक भी किशोरी वैक्सीन लगवाने नहीं पहुंची। पहले दिन सिर्फ एक किशोरी ने टीका लगवाया था, लेकिन दूसरे दिन पूरी तरह सन्नाटा रहा। चिकित्सकों के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि अभियान का उद्देश्य ही अधिक से अधिक किशोरियों को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण करना है।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय राणा ने बताया कि वैक्सीन न लगवाने के पीछे लोगों में कई तरह की भ्रांतियों का होना व्याप्त है। डॉक्टरों के अनुसार, कई लोगों को लगता है कि इस वैक्सीन से भविष्य में गर्भधारण पर असर पड़ेगा, जबकि कई किशोरियां झिझक और डर के कारण टीकाकरण नहीं करा रहीं। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि ये सभी बातें मात्र भ्रांतियां हैं और कुछ नहीं।
सीएमएस के अनुसार, 9 से 14 वर्ष की सभी किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। यह न केवल सर्वाइकल कैंसर का खतरा कम करती है, बल्कि भविष्य में होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से भी बचाती है। इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों के लिए है जो महंगी वैक्सीन नहीं खरीद सकते। चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल में गार्डासिल नाम की चार वैरिएंट वाली वैक्सीन लगाई जा रही है। यह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से होने वाले संक्रमण से बचाती हैहै, जो सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। यह वायरस ओरल, एनल और सर्वाइकल संपर्क से फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार 9 से 14 वर्ष की उम्र में यह वैक्सीन सबसे ज्यादा प्रभावी होती है।
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नोएडा। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू की गई एचपीवी वैक्सीनेशन मुहिम के तहत जिला अस्पताल में दूसरे दिन एक भी किशोरी वैक्सीन लगवाने नहीं पहुंची। पहले दिन सिर्फ एक किशोरी ने टीका लगवाया था, लेकिन दूसरे दिन पूरी तरह सन्नाटा रहा। चिकित्सकों के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि अभियान का उद्देश्य ही अधिक से अधिक किशोरियों को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण करना है।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय राणा ने बताया कि वैक्सीन न लगवाने के पीछे लोगों में कई तरह की भ्रांतियों का होना व्याप्त है। डॉक्टरों के अनुसार, कई लोगों को लगता है कि इस वैक्सीन से भविष्य में गर्भधारण पर असर पड़ेगा, जबकि कई किशोरियां झिझक और डर के कारण टीकाकरण नहीं करा रहीं। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि ये सभी बातें मात्र भ्रांतियां हैं और कुछ नहीं।
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सीएमएस के अनुसार, 9 से 14 वर्ष की सभी किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए। यह न केवल सर्वाइकल कैंसर का खतरा कम करती है, बल्कि भविष्य में होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से भी बचाती है। इस पहल का उद्देश्य उन परिवारों के लिए है जो महंगी वैक्सीन नहीं खरीद सकते। चिकित्सकों के अनुसार, अस्पताल में गार्डासिल नाम की चार वैरिएंट वाली वैक्सीन लगाई जा रही है। यह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से होने वाले संक्रमण से बचाती हैहै, जो सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। यह वायरस ओरल, एनल और सर्वाइकल संपर्क से फैल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार 9 से 14 वर्ष की उम्र में यह वैक्सीन सबसे ज्यादा प्रभावी होती है।