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Noida News: कागजों में दौड़ रहे अधिकारी, 80% स्कूलों तक नहीं पहुंची निरीक्षण टीम
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- मिशन कायाकल्प की जमीनी जांच में सुस्ती, डीएम की रिपोर्ट अटकी, एक सप्ताह में सिर्फ 20% विद्यालयों का हुआ निरीक्षण
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। परिषदीय विद्यालयों में मिशन कायाकल्प के तहत हुए विकास कार्यों की जमीनी हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी मेधा रूपम ने 30 से अधिक अधिकारियों को पांच-पांच विद्यालयों के निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि एक सप्ताह बीतने के बाद भी अधिकांश अधिकारी स्कूलों तक नहीं पहुंच सके हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार अब तक केवल करीब 20 प्रतिशत विद्यालयों का ही निरीक्षण हो पाया है, जबकि लगभग 80 प्रतिशत स्कूलों में जांच शुरू तक नहीं हुई। इससे जिलाधिकारी को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट भी अटक गई है। विकास भवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभागों के अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में निरीक्षण कर रिपोर्ट देनी थी, लेकिन अब तक केवल चार-पांच अधिकारियों ने ही विद्यालयों का दौरा किया है। अधिकांश अधिकारी कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। इसके चलते करोड़ों रुपये से कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति का आकलन समय पर नहीं हो पा रहा है।
इन पैरामीटरों पर होनी है जांच-
निरीक्षण के दौरान सुरक्षित पेयजल, नल-जल व्यवस्था, बालक-बालिका शौचालय, दिव्यांग अनुकूल शौचालय, हैंडवॉश यूनिट, आधुनिक रसोईघर, कक्षाओं में टाइल्स, रंगाई-पुताई, श्यामपट, विद्युत व्यवस्था, रैंप, डेस्क-बेंच और विद्यालय की चहारदीवारी समेत 19 बिंदुओं की जांच होनी है। अधिकारियों की सुस्ती के कारण यदि कहीं निर्माण कार्यों में अनियमितता या गुणवत्ता संबंधी कमी है तो उसका समय रहते पता लगाना मुश्किल हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि निरीक्षण में देरी से आगे की कार्ययोजना भी प्रभावित होगी। अब नजर जिला प्रशासन पर है कि समयसीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाता है या नहीं।
वर्जन-
कई अधिकारी विद्यालयों का निरीक्षण पूरा कर चुके हैं। कुछ अधिकारियों की रिपोर्ट आनी बाकी है। बुधवार तक सभी रिपोर्ट लेकर जिलाधिकारी को सौंप दी जाएंगी। -राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। परिषदीय विद्यालयों में मिशन कायाकल्प के तहत हुए विकास कार्यों की जमीनी हकीकत परखने के लिए जिलाधिकारी मेधा रूपम ने 30 से अधिक अधिकारियों को पांच-पांच विद्यालयों के निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि एक सप्ताह बीतने के बाद भी अधिकांश अधिकारी स्कूलों तक नहीं पहुंच सके हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार अब तक केवल करीब 20 प्रतिशत विद्यालयों का ही निरीक्षण हो पाया है, जबकि लगभग 80 प्रतिशत स्कूलों में जांच शुरू तक नहीं हुई। इससे जिलाधिकारी को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट भी अटक गई है। विकास भवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभागों के अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में निरीक्षण कर रिपोर्ट देनी थी, लेकिन अब तक केवल चार-पांच अधिकारियों ने ही विद्यालयों का दौरा किया है। अधिकांश अधिकारी कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। इसके चलते करोड़ों रुपये से कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति का आकलन समय पर नहीं हो पा रहा है।
इन पैरामीटरों पर होनी है जांच-
निरीक्षण के दौरान सुरक्षित पेयजल, नल-जल व्यवस्था, बालक-बालिका शौचालय, दिव्यांग अनुकूल शौचालय, हैंडवॉश यूनिट, आधुनिक रसोईघर, कक्षाओं में टाइल्स, रंगाई-पुताई, श्यामपट, विद्युत व्यवस्था, रैंप, डेस्क-बेंच और विद्यालय की चहारदीवारी समेत 19 बिंदुओं की जांच होनी है। अधिकारियों की सुस्ती के कारण यदि कहीं निर्माण कार्यों में अनियमितता या गुणवत्ता संबंधी कमी है तो उसका समय रहते पता लगाना मुश्किल हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि निरीक्षण में देरी से आगे की कार्ययोजना भी प्रभावित होगी। अब नजर जिला प्रशासन पर है कि समयसीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाता है या नहीं।
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वर्जन-
कई अधिकारी विद्यालयों का निरीक्षण पूरा कर चुके हैं। कुछ अधिकारियों की रिपोर्ट आनी बाकी है। बुधवार तक सभी रिपोर्ट लेकर जिलाधिकारी को सौंप दी जाएंगी। -राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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