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Noida News: शीतलहर तो कभी प्रदूषण और अब गर्मी की छुट्टी से बर्बाद हो रही पढ़ाई
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फोटो:-- -- -- -- -- -- -- --
शीतलहर तो कभी प्रदूषण और अब गर्मी की छुट्टी से बर्बाद हो रही पढ़ाई
-गर्मी के कारण स्कूलों के समय में बदलाव के खिलाफ उतरे अभिभावक, डीएम से की मुलाकात
-अभिभावकों ने प्रशासन से छुट्टियों को बंद करने और अचानक आदेश जारी नहीं करने की मांग की
-कहा कि 220 से 250 दिन की जगह स्कूलों में केवल 170 से 175 दिन पढ़ पा रहे है बच्चे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अभिभावकों ने गर्मी के कारण स्कूलों के समय में बदलाव का विरोध किया है। इस संबंध में मंगलवार को अभिभावकों ने कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी से मुलाकात की और इस तरह के आदेश जारी नहीं करने की मांग की। अभिभावकों ने कहा है कि शीतलहर तो कभी प्रदूषण व गर्मी के नाम पर छुट्टी कर दी जाती है। इससे बच्चों की पढ़ाई बर्बाद हो रही है। साथ ही अचानक जारी होने वाले आदेश से नौकरीपेशा लोगों को तालमेल बैठाने में परेशानी होती है। वहीं डीएम ने मंडल स्तर से आदेश जारी होने की जानकारी दी और जल्द ही मंडलायुक्त से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जो स्कूल 2 से 2:30 बजे तक चलते थे। उनको अब 12 बजे बंद कर दिया जाता है। अलग-अलग मौसम के नाम पर स्कूलों को बंद कर दिया जाता है। पहले शीतलहर की छुट्टी, फिर प्रदूषण, बरसात और अब गर्मी के कारण स्कूलों को बंद कर दिया जाता है या उनके समय में बदलाव हो जाता है। वहीं पूरे साल में अनेकों त्यौहार, शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद स्कूलों में पढाई के दिन बहुत सीमित रह जाते हैं। समय से कोर्स पूरा नहीं हो पाता है। वहीं अचानक से छुट्टियों का आदेश आने से अभिभावकों को काफी परेशानी होती है। यहां रहने वाले ज्यादातर अभिभावक नौकरीपेशा है। स्कूल बंद होने या समय में बदलाव से मुश्किल होती है। किसी एक को ऑफिस से छुट्टी लेकर घर रहना पड़ता है। अभिभावकों ने इस तरह के आदेश जारी नहीं करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि डीएम ने जानकारी दी है कि यह आदेश मंडल स्तर से आया था। यहां उसका पालन कराया जाताा है। जल्द ही मंडलायुक्त से उनकी बैठक कराने का आश्वासन दिया है।
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साल में केवल 170 से 175 दिन हो रही पढ़ाई
अभिभावकों ने बताया कि छोटे बच्चों की साल में कम से कम 220 दिन और बड़े बच्चों की साल में 250 दिन पढ़ाई होनी चाहिए, लेकिन छुट्टियों के कारण यहां ऐसा नहीं हो पा रहा है। बच्चों की पढ़ाई 170 से 175 दिन तक सिमट कर रह गई है। इस कारण कोर्स भी पूरा नहीं हो पाता है तो इसका दबाव अभिभावक व बच्चों पर डाला जाता है। वहीं वो लोग स्कूलों को 5 से 6 लाख रुपये की ट्यूशन फीस चुका रहे हैं। मोटी फीस देने के बाद भी बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पा रहे हैं।
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स्कूलों में है पर्याप्त संसाधन
अभिभावकों ने कहा कि वो स्कूलों में मोटी फीस जमा करते है। उन सभी स्कूलों का पूरा परिसर सेंट्रलाइज्ड एसी है। स्कूल के सभी ट्रांसपोर्ट बस भी एसी है। इन निजी स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी अच्छा है। ऐसे में सभी स्कूलों पर इस तरह के आदेश लागू नहीं किये जाए। घर से ज्यादा अच्छा वातावरण स्कूलों का होता है। अगर किसी स्कूल का नहीं है तो वहां होना चाहिए।
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5 अभिभावक का ग्रुप 1000 तक पहुंचा
अभिभावकों ने नोएडा पेरेंट्स फोरम के नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ है। उन्होंने बताया कि जनवरी माह में 5 अभिभावकों ने मिलकर ग्रुप बनाया था, लेकिन अब करीब 1000 तक संख्या पहुंच चुकी है। सभी अपनी मर्जी से जुड़े है। जहां बच्चों व अभिभावकों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा होती है।
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किसी के घर पर घरेलू सहायिका नहीं है तो कोई नौकरीपेशा होता है। अचानक छुट्टी या समय परिवर्तन से पूरी योजना बदल जाती है। छुट्टी नहीं होनी चाहिए। स्कूलों में सभी संसाधन है। वहां वातावरण अच्छा होता है। पढ़ाई भी बर्बाद नहीं होगी।
फरिहा हसीब, अभिभावक
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स्कूल बंद होने या समय परिवर्तन से पढ़ाई बर्बाद हो रही है। ऑनलाइन क्लॉस भी अच्छा नहीं है। उससे बच्चों की पढ़ाई नहीं होती है। सरकार को नियमित स्कूल चलने देने चाहिए।
शिखा अरोड़ा, अभिभावक
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नवीन कुमार
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शीतलहर तो कभी प्रदूषण और अब गर्मी की छुट्टी से बर्बाद हो रही पढ़ाई
-गर्मी के कारण स्कूलों के समय में बदलाव के खिलाफ उतरे अभिभावक, डीएम से की मुलाकात
-अभिभावकों ने प्रशासन से छुट्टियों को बंद करने और अचानक आदेश जारी नहीं करने की मांग की
-कहा कि 220 से 250 दिन की जगह स्कूलों में केवल 170 से 175 दिन पढ़ पा रहे है बच्चे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अभिभावकों ने गर्मी के कारण स्कूलों के समय में बदलाव का विरोध किया है। इस संबंध में मंगलवार को अभिभावकों ने कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी से मुलाकात की और इस तरह के आदेश जारी नहीं करने की मांग की। अभिभावकों ने कहा है कि शीतलहर तो कभी प्रदूषण व गर्मी के नाम पर छुट्टी कर दी जाती है। इससे बच्चों की पढ़ाई बर्बाद हो रही है। साथ ही अचानक जारी होने वाले आदेश से नौकरीपेशा लोगों को तालमेल बैठाने में परेशानी होती है। वहीं डीएम ने मंडल स्तर से आदेश जारी होने की जानकारी दी और जल्द ही मंडलायुक्त से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जो स्कूल 2 से 2:30 बजे तक चलते थे। उनको अब 12 बजे बंद कर दिया जाता है। अलग-अलग मौसम के नाम पर स्कूलों को बंद कर दिया जाता है। पहले शीतलहर की छुट्टी, फिर प्रदूषण, बरसात और अब गर्मी के कारण स्कूलों को बंद कर दिया जाता है या उनके समय में बदलाव हो जाता है। वहीं पूरे साल में अनेकों त्यौहार, शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद स्कूलों में पढाई के दिन बहुत सीमित रह जाते हैं। समय से कोर्स पूरा नहीं हो पाता है। वहीं अचानक से छुट्टियों का आदेश आने से अभिभावकों को काफी परेशानी होती है। यहां रहने वाले ज्यादातर अभिभावक नौकरीपेशा है। स्कूल बंद होने या समय में बदलाव से मुश्किल होती है। किसी एक को ऑफिस से छुट्टी लेकर घर रहना पड़ता है। अभिभावकों ने इस तरह के आदेश जारी नहीं करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि डीएम ने जानकारी दी है कि यह आदेश मंडल स्तर से आया था। यहां उसका पालन कराया जाताा है। जल्द ही मंडलायुक्त से उनकी बैठक कराने का आश्वासन दिया है।
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साल में केवल 170 से 175 दिन हो रही पढ़ाई
अभिभावकों ने बताया कि छोटे बच्चों की साल में कम से कम 220 दिन और बड़े बच्चों की साल में 250 दिन पढ़ाई होनी चाहिए, लेकिन छुट्टियों के कारण यहां ऐसा नहीं हो पा रहा है। बच्चों की पढ़ाई 170 से 175 दिन तक सिमट कर रह गई है। इस कारण कोर्स भी पूरा नहीं हो पाता है तो इसका दबाव अभिभावक व बच्चों पर डाला जाता है। वहीं वो लोग स्कूलों को 5 से 6 लाख रुपये की ट्यूशन फीस चुका रहे हैं। मोटी फीस देने के बाद भी बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पा रहे हैं।
स्कूलों में है पर्याप्त संसाधन
अभिभावकों ने कहा कि वो स्कूलों में मोटी फीस जमा करते है। उन सभी स्कूलों का पूरा परिसर सेंट्रलाइज्ड एसी है। स्कूल के सभी ट्रांसपोर्ट बस भी एसी है। इन निजी स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी अच्छा है। ऐसे में सभी स्कूलों पर इस तरह के आदेश लागू नहीं किये जाए। घर से ज्यादा अच्छा वातावरण स्कूलों का होता है। अगर किसी स्कूल का नहीं है तो वहां होना चाहिए।
5 अभिभावक का ग्रुप 1000 तक पहुंचा
अभिभावकों ने नोएडा पेरेंट्स फोरम के नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ है। उन्होंने बताया कि जनवरी माह में 5 अभिभावकों ने मिलकर ग्रुप बनाया था, लेकिन अब करीब 1000 तक संख्या पहुंच चुकी है। सभी अपनी मर्जी से जुड़े है। जहां बच्चों व अभिभावकों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा होती है।
किसी के घर पर घरेलू सहायिका नहीं है तो कोई नौकरीपेशा होता है। अचानक छुट्टी या समय परिवर्तन से पूरी योजना बदल जाती है। छुट्टी नहीं होनी चाहिए। स्कूलों में सभी संसाधन है। वहां वातावरण अच्छा होता है। पढ़ाई भी बर्बाद नहीं होगी।
फरिहा हसीब, अभिभावक
स्कूल बंद होने या समय परिवर्तन से पढ़ाई बर्बाद हो रही है। ऑनलाइन क्लॉस भी अच्छा नहीं है। उससे बच्चों की पढ़ाई नहीं होती है। सरकार को नियमित स्कूल चलने देने चाहिए।
शिखा अरोड़ा, अभिभावक
नवीन कुमार
