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Noida News: श्रमिक हिंसा मामले में मुख्य आरोपी सत्यम वर्मा और मनीषा चौहान को मिली जमानत
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(अदालत से)
-कोर्ट ने माना- दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं
-पहले से अन्य मामले दर्ज होने के कारण दोनों आरोपी अभी जेल में ही रहेंगे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में अप्रैल में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान बलवा, तोड़फोड़ और आगजनी के मामलों में आरोपी 61 वर्षीय सत्यम वर्मा और महिला आरोपी मनीषा चौहान को अदालत ने राहत देते हुए दोनों को जमानत दी हैं। हालांकि आरोपियों के खिलाफ पहले से अन्य कोतवाली में मामले दर्ज होने के कारण दोनों आरोपी अभी जेल में रहेंगे।
पहले मामले में फेज-2 थाना क्षेत्र स्थित रिचा ग्लोबल कंपनी में कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान बलवा, तोड़फोड़ और आगजनी की साजिश के आरोप में मुख्य आरोपियों में शामिल सत्यम वर्मा जेल में बंद था। मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक 10 अप्रैल को सैकड़ों कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कंपनी के गेट पर प्रदर्शन किया था। आरोप है कि कर्मचारियों ने कंपनी में मौजूद लोगों को बंधक बनाने, तोड़फोड़ और आग लगाने की धमकी दी। 11 और 13 अप्रैल को भी भीड़ जुटने, कंपनी में प्रवेश रोकने और भंगेल फ्लाईओवर के पास जाम लगाने के आरोप लगाए गए थे। पुलिस के मुताबिक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये कर्मचारियों को उकसाने की बात भी सामने आई थी। जमानत अर्जी पर बचाव पक्ष ने कहा कि एफआईआर करीब 10 दिन की देरी से दर्ज हुई और आरोपी का नाम भी उसमें नहीं था। अदालत ने माना कि बैंक खातों में धन प्राप्त होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसका इस्तेमाल आंदोलन में किया गया।
वहीं फेज-3 कोतवाली में दर्ज एक मामले में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 13 अप्रैल को हुए उग्र श्रमिक आंदोलन के दौरान कई कंपनियों में तोड़फोड़ और नुकसान पहुंचाने के आरोप में मनीषा चौहान को जमानत मिली है। अभियोजन के अनुसार 100 से 200 उपद्रवी श्रमिक लाठी-डंडे, घातक हथियार और ईंट-पत्थर लेकर सड़कों पर उतर आए थे। सेक्टर-64, 65, 67, 68 और 69 में यातायात बाधित हुआ तथा कई कंपनियों में घुसकर तोड़फोड़ की गई। बचाव पक्ष ने बताया कि घटना के समय मनीषा जेल में बंद थी। उसे 11 अप्रैल को गिरफ्तार कर 12 अप्रैल को जेल भेजा गया था। अदालत ने इस तथ्य और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए जमानत मंजूर कर ली।
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(अदालत से)
-कोर्ट ने माना- दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं
-पहले से अन्य मामले दर्ज होने के कारण दोनों आरोपी अभी जेल में ही रहेंगे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में अप्रैल में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान बलवा, तोड़फोड़ और आगजनी के मामलों में आरोपी 61 वर्षीय सत्यम वर्मा और महिला आरोपी मनीषा चौहान को अदालत ने राहत देते हुए दोनों को जमानत दी हैं। हालांकि आरोपियों के खिलाफ पहले से अन्य कोतवाली में मामले दर्ज होने के कारण दोनों आरोपी अभी जेल में रहेंगे।
पहले मामले में फेज-2 थाना क्षेत्र स्थित रिचा ग्लोबल कंपनी में कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान बलवा, तोड़फोड़ और आगजनी की साजिश के आरोप में मुख्य आरोपियों में शामिल सत्यम वर्मा जेल में बंद था। मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक 10 अप्रैल को सैकड़ों कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर कंपनी के गेट पर प्रदर्शन किया था। आरोप है कि कर्मचारियों ने कंपनी में मौजूद लोगों को बंधक बनाने, तोड़फोड़ और आग लगाने की धमकी दी। 11 और 13 अप्रैल को भी भीड़ जुटने, कंपनी में प्रवेश रोकने और भंगेल फ्लाईओवर के पास जाम लगाने के आरोप लगाए गए थे। पुलिस के मुताबिक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये कर्मचारियों को उकसाने की बात भी सामने आई थी। जमानत अर्जी पर बचाव पक्ष ने कहा कि एफआईआर करीब 10 दिन की देरी से दर्ज हुई और आरोपी का नाम भी उसमें नहीं था। अदालत ने माना कि बैंक खातों में धन प्राप्त होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसका इस्तेमाल आंदोलन में किया गया।
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वहीं फेज-3 कोतवाली में दर्ज एक मामले में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 13 अप्रैल को हुए उग्र श्रमिक आंदोलन के दौरान कई कंपनियों में तोड़फोड़ और नुकसान पहुंचाने के आरोप में मनीषा चौहान को जमानत मिली है। अभियोजन के अनुसार 100 से 200 उपद्रवी श्रमिक लाठी-डंडे, घातक हथियार और ईंट-पत्थर लेकर सड़कों पर उतर आए थे। सेक्टर-64, 65, 67, 68 और 69 में यातायात बाधित हुआ तथा कई कंपनियों में घुसकर तोड़फोड़ की गई। बचाव पक्ष ने बताया कि घटना के समय मनीषा जेल में बंद थी। उसे 11 अप्रैल को गिरफ्तार कर 12 अप्रैल को जेल भेजा गया था। अदालत ने इस तथ्य और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए जमानत मंजूर कर ली।
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