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आत्मरक्षा के गुर किताबें नहीं अभ्यास सिखाता है : कमल सारकी
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता में 200 छात्राओं ने लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। अगर कभी कोई रास्ता रोक ले या हाथ पकड़ ले तो खुद को कैसे छुड़ाएं ऐसे सवालों के जवाब किताबों में ही नहीं, बल्कि आत्मरक्षा के अभ्यास में मिलते हैं। ये बातें सेक्टर-73 स्थित श्याम सिंह स्मारक स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में कराटे प्रशिक्षक कमल सारकी ने कहीं। कार्यक्रम में करीब 200 छात्राओं ने आत्मरक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। कराटे प्रशिक्षक कमल सारकी ने छात्राओं को आत्मरक्षा की तकनीकें सिखाईं। कमल सारकी ने बताया कि आत्मरक्षा के अभ्यास से विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय आत्मविश्वास से काम लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सही तकनीक और आत्मविश्वास सबसे बड़ा हथियार होता है।
प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को स्ट्रीट फाइट, पंच-ब्लॉक कॉम्बिनेशन और सेल्फ डिफेंस की तकनीकें सिखाई गईं। कोच ने स्पष्ट किया कि आत्मरक्षा का अर्थ केवल हमला करना नहीं, बल्कि खुद को सुरक्षित रखते हुए खतरे से बाहर निकलना है। स्ट्रीट फाइट में हमलावर की कमजोर जगहों पर वार कर सुरक्षित दूरी बनाने पर जोर दिया गया। यह भी बताया गया कि घबराने के बजाय तेज आवाज में मदद मांगना और लोगों का ध्यान आकर्षित करना महत्वपूर्ण है।
पंच-ब्लॉक कॉम्बिनेशन में मुक्के के वार को रोकने और तुरंत जवाबी पंच देने का अभ्यास कराया गया। यह तकनीक शरीर का संतुलन, तेजी और सही समय पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ाती है। सेल्फ डिफेंस में हाथ पकड़ने या कलाई जकड़ने जैसी स्थितियों से निकलने के तरीके सिखाए गए। छात्राओं ने सीखा कि कम शारीरिक शक्ति के बावजूद सही तकनीक से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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कराटे कोच कमल सारकी ने आत्मरक्षा प्रशिक्षण को हर छात्रा के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल शारीरिक क्षमता बढ़ती है। बल्कि मानसिक मजबूती भी विकसित होती है। साथ ही, निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार आता है। विद्यालय की प्रधानाचार्य गीता शर्मा ने आत्मरक्षा ज्ञान को शिक्षा के साथ जरूरी बताया। उन्होंने आज के समय में इसकी महत्ता पर जोर दिया। कार्यक्रम में मोनिका गुप्ता, दीप्ती सक्सेना और स्वाति सिंह भी उपस्थित थीं। इनके साथ विद्यालय के अन्य शिक्षक भी मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। अगर कभी कोई रास्ता रोक ले या हाथ पकड़ ले तो खुद को कैसे छुड़ाएं ऐसे सवालों के जवाब किताबों में ही नहीं, बल्कि आत्मरक्षा के अभ्यास में मिलते हैं। ये बातें सेक्टर-73 स्थित श्याम सिंह स्मारक स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में कराटे प्रशिक्षक कमल सारकी ने कहीं। कार्यक्रम में करीब 200 छात्राओं ने आत्मरक्षा का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। कराटे प्रशिक्षक कमल सारकी ने छात्राओं को आत्मरक्षा की तकनीकें सिखाईं। कमल सारकी ने बताया कि आत्मरक्षा के अभ्यास से विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय आत्मविश्वास से काम लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सही तकनीक और आत्मविश्वास सबसे बड़ा हथियार होता है।
प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को स्ट्रीट फाइट, पंच-ब्लॉक कॉम्बिनेशन और सेल्फ डिफेंस की तकनीकें सिखाई गईं। कोच ने स्पष्ट किया कि आत्मरक्षा का अर्थ केवल हमला करना नहीं, बल्कि खुद को सुरक्षित रखते हुए खतरे से बाहर निकलना है। स्ट्रीट फाइट में हमलावर की कमजोर जगहों पर वार कर सुरक्षित दूरी बनाने पर जोर दिया गया। यह भी बताया गया कि घबराने के बजाय तेज आवाज में मदद मांगना और लोगों का ध्यान आकर्षित करना महत्वपूर्ण है।
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पंच-ब्लॉक कॉम्बिनेशन में मुक्के के वार को रोकने और तुरंत जवाबी पंच देने का अभ्यास कराया गया। यह तकनीक शरीर का संतुलन, तेजी और सही समय पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ाती है। सेल्फ डिफेंस में हाथ पकड़ने या कलाई जकड़ने जैसी स्थितियों से निकलने के तरीके सिखाए गए। छात्राओं ने सीखा कि कम शारीरिक शक्ति के बावजूद सही तकनीक से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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कराटे कोच कमल सारकी ने आत्मरक्षा प्रशिक्षण को हर छात्रा के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल शारीरिक क्षमता बढ़ती है। बल्कि मानसिक मजबूती भी विकसित होती है। साथ ही, निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार आता है। विद्यालय की प्रधानाचार्य गीता शर्मा ने आत्मरक्षा ज्ञान को शिक्षा के साथ जरूरी बताया। उन्होंने आज के समय में इसकी महत्ता पर जोर दिया। कार्यक्रम में मोनिका गुप्ता, दीप्ती सक्सेना और स्वाति सिंह भी उपस्थित थीं। इनके साथ विद्यालय के अन्य शिक्षक भी मौजूद रहे।