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Noida News: सिरिंज साैदे में कमीशनखोरी का आरोप, जांच के दायरे में कई अधिकारी
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-जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया, अब जिलाधिकारी के निर्देश में होगी जांच
-सिरिंज सप्लाई करने वाली संबंधित एजेंसी से टेंडर होने के मामले में कमीशनखोरी का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिला अस्पताल में 1 लाख 20 हजार जानवरों की सिरिंज मंगाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सिरिंज सप्लाई करने वाली संबंधित एजेंसी से टेंडर होने के मामले में सीधे तौर पर कमीशनखोरी का आरोप सामने आ रहा है और इसमें कई बड़े अधिकारियों के नाम शामिल हो सकते हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एक तरफ शासन तो दूसरी तरफ जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित कमेटी मामले की जांच करेगी।
जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के नाम पर जानवरों की सिरिंज मंगाई गईं। आरोप है कि अफसरों ने कमीशन के खेल में नियमों को ताक पर रख दिया। इस मामले का खुलासा होने के बाद से जिला अस्पताल में हलचल है। अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से सहमा हुआ है और शासन, प्रशासन स्तर तक भी चर्चाएं तेज हैं। सिरिंज मंगाने की प्रक्रिया को तकनीकी गलती बताकर लगातार मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। बता दें कि जिला अस्पताल की ओर से 2 दिसंबर को दिए गए ऑर्डर के मुताबिक 60 हजार 30 एमएल और 60 हजार 5 एमएल की यानी कुल 1 लाख 20 हजार सिरिंज का ऑर्डर दिया गया था। 17 दिसंबर को सिरिंज अस्पताल पहुंच गई थीं। जबकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि सिरिंज उपयोग किए बिना ही अस्पताल से वापस कर दी गईं और संबंधित एजेंसी को भुगतान भी नहीं किया गया है। हालांकि अनुबंध के मुताबिक ऑनलाइन भुगतान किया गया है और इसके लिए वित्तीय अप्रूवल सीएमएस ने ही दिया था।
क्या होती हैं जानवरों वाली सिरिंज: जिला केमिस्ट एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष अनूप खन्ना ने बताया कि जानवरों वाली सिरिंज का इस्तेमाल गाय, भैंस, कुत्ते आदि को दवा या टीका देने में होता है। इनकी बनावट और क्षमता (एमएल) इंसानों की तुलना में अलग होती है। अक्सर अधिक डोज (20एमएल, 30एमएल) देने के लिए इस्तेमाल होती हैं। इनकी सुई मोटी हो सकती है, ताकि जानवरों की मोटी त्वचा में आसानी से दवा दी जा सके।
इंसानों में क्यों नहीं होती इस्तेमाल : अनूप ने बताया कि इंसानों के लिए अलग स्टैंडर्ड और साइज की सिरिंज तय होती हैं। गलत साइज या मोटी सुई से दर्द, सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ता है। डोज की सटीक मात्रा देना मुश्किल हो सकता है। यह मेडिकल प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।
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-सिरिंज सप्लाई करने वाली संबंधित एजेंसी से टेंडर होने के मामले में कमीशनखोरी का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिला अस्पताल में 1 लाख 20 हजार जानवरों की सिरिंज मंगाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सिरिंज सप्लाई करने वाली संबंधित एजेंसी से टेंडर होने के मामले में सीधे तौर पर कमीशनखोरी का आरोप सामने आ रहा है और इसमें कई बड़े अधिकारियों के नाम शामिल हो सकते हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एक तरफ शासन तो दूसरी तरफ जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित कमेटी मामले की जांच करेगी।
जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के नाम पर जानवरों की सिरिंज मंगाई गईं। आरोप है कि अफसरों ने कमीशन के खेल में नियमों को ताक पर रख दिया। इस मामले का खुलासा होने के बाद से जिला अस्पताल में हलचल है। अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से सहमा हुआ है और शासन, प्रशासन स्तर तक भी चर्चाएं तेज हैं। सिरिंज मंगाने की प्रक्रिया को तकनीकी गलती बताकर लगातार मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। बता दें कि जिला अस्पताल की ओर से 2 दिसंबर को दिए गए ऑर्डर के मुताबिक 60 हजार 30 एमएल और 60 हजार 5 एमएल की यानी कुल 1 लाख 20 हजार सिरिंज का ऑर्डर दिया गया था। 17 दिसंबर को सिरिंज अस्पताल पहुंच गई थीं। जबकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि सिरिंज उपयोग किए बिना ही अस्पताल से वापस कर दी गईं और संबंधित एजेंसी को भुगतान भी नहीं किया गया है। हालांकि अनुबंध के मुताबिक ऑनलाइन भुगतान किया गया है और इसके लिए वित्तीय अप्रूवल सीएमएस ने ही दिया था।
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क्या होती हैं जानवरों वाली सिरिंज: जिला केमिस्ट एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष अनूप खन्ना ने बताया कि जानवरों वाली सिरिंज का इस्तेमाल गाय, भैंस, कुत्ते आदि को दवा या टीका देने में होता है। इनकी बनावट और क्षमता (एमएल) इंसानों की तुलना में अलग होती है। अक्सर अधिक डोज (20एमएल, 30एमएल) देने के लिए इस्तेमाल होती हैं। इनकी सुई मोटी हो सकती है, ताकि जानवरों की मोटी त्वचा में आसानी से दवा दी जा सके।
इंसानों में क्यों नहीं होती इस्तेमाल : अनूप ने बताया कि इंसानों के लिए अलग स्टैंडर्ड और साइज की सिरिंज तय होती हैं। गलत साइज या मोटी सुई से दर्द, सूजन और संक्रमण का खतरा बढ़ता है। डोज की सटीक मात्रा देना मुश्किल हो सकता है। यह मेडिकल प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है।