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Noida News: आवंटित दुकानों को खाली करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया निरस्त
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नगर पालिका ने 25 दुकानदारों को दुकानें खाली करने का दिया था नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। दादरी के रेलवे रोड पर आवंटित दुकानें खाली कराने के नगर पालिका के नोटिस को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। अदालत ने नगर पालिका की कार्रवाई को अनुचित ठहराया। कोर्ट के इस फैसले ने प्रभावित दुकानदारों को बड़ी राहत दी है।
जानकारी के अनुसार, भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान विस्थापित होकर आए पंजाबी परिवार दादरी में बस गए थे। आजीविका के लिए वे रेलवे रोड पर खोखे लगाकर व्यापार करते थे, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उन्हें बार-बार हटाया जाता था। इसके बाद साल 1990 में नगर पालिका ने उन्हें पक्की दुकानें आवंटित कीं। तभी से करीब 25 दुकानदार इन दुकानों में फल और सब्जी बेचते थे।
हाल ही में नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी ने इन 25 दुकानदारों को नोटिस जारी किया था। इसके अनुसार, 1 सितंबर 1990 को 33 वर्षों के लिए दुकानें आवंटित की गई थीं और अब उनकी अवधि समाप्त हो चुकी है। इसलिए दुकानदारों को 15 दिनों के भीतर दुकानें खाली करने के आदेश दिए गए थे।
दुकानदारों ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें अतिक्रमण हटाने के दौरान पुनर्वास के तहत दुकानें दी गईं थीं और उस समय किसी निश्चित अवधि का उल्लेख नहीं किया गया था। उन्होंने नोटिस को गलत बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की, लेकिन नगर पालिका ने इस पर कोई सुनवाई नहीं की। तब प्रभावित दुकानदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 25 मार्च को नोटिस पर रोक लगा दी थी और मामले की आगली सुनवाई एक अप्रैल को करने को कहा था। इस सुनवाई के दौरान नगर पालिका ने अपनी गलती स्वीकार की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने नोटिस को निरस्त करने के आदेश दिए हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। दादरी के रेलवे रोड पर आवंटित दुकानें खाली कराने के नगर पालिका के नोटिस को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। अदालत ने नगर पालिका की कार्रवाई को अनुचित ठहराया। कोर्ट के इस फैसले ने प्रभावित दुकानदारों को बड़ी राहत दी है।
जानकारी के अनुसार, भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान विस्थापित होकर आए पंजाबी परिवार दादरी में बस गए थे। आजीविका के लिए वे रेलवे रोड पर खोखे लगाकर व्यापार करते थे, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उन्हें बार-बार हटाया जाता था। इसके बाद साल 1990 में नगर पालिका ने उन्हें पक्की दुकानें आवंटित कीं। तभी से करीब 25 दुकानदार इन दुकानों में फल और सब्जी बेचते थे।
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हाल ही में नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी ने इन 25 दुकानदारों को नोटिस जारी किया था। इसके अनुसार, 1 सितंबर 1990 को 33 वर्षों के लिए दुकानें आवंटित की गई थीं और अब उनकी अवधि समाप्त हो चुकी है। इसलिए दुकानदारों को 15 दिनों के भीतर दुकानें खाली करने के आदेश दिए गए थे।
दुकानदारों ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें अतिक्रमण हटाने के दौरान पुनर्वास के तहत दुकानें दी गईं थीं और उस समय किसी निश्चित अवधि का उल्लेख नहीं किया गया था। उन्होंने नोटिस को गलत बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की, लेकिन नगर पालिका ने इस पर कोई सुनवाई नहीं की। तब प्रभावित दुकानदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 25 मार्च को नोटिस पर रोक लगा दी थी और मामले की आगली सुनवाई एक अप्रैल को करने को कहा था। इस सुनवाई के दौरान नगर पालिका ने अपनी गलती स्वीकार की, जिसके बाद हाईकोर्ट ने नोटिस को निरस्त करने के आदेश दिए हैं।