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पूर्वोत्तर राज्य भारत की सांस्कृतिक विविधता की है आत्मा : कपिल मिश्रा
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- दिल्ली सचिवालय में मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा राज्य स्थापना दिवस का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली सरकार ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा राज्य स्थापना दिवस का भव्य आयोजन किया। कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्य भारत की सांस्कृतिक विविधता की आत्मा हैं।
मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों की लोक परंपराएं, नृत्य और संगीत देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करते हैं। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के साथ-साथ देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने व विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ। समारोह में साहित्य कला परिषद् द्वारा मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा के पारंपरिक लोक नृत्य एवं लोक संगीत पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, भावपूर्ण नृत्य और लोक संगीत के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया।
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नई दिल्ली।
दिल्ली सरकार ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा राज्य स्थापना दिवस का भव्य आयोजन किया। कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्य भारत की सांस्कृतिक विविधता की आत्मा हैं।
मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों की लोक परंपराएं, नृत्य और संगीत देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करते हैं। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के साथ-साथ देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने व विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ। समारोह में साहित्य कला परिषद् द्वारा मणिपुर, मेघालय एवं त्रिपुरा के पारंपरिक लोक नृत्य एवं लोक संगीत पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, भावपूर्ण नृत्य और लोक संगीत के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया।
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