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अब दुनिया पढ़ेगी दिल्ली का असली इतिहास: खुलेंगे राजधानी के अनछुए पन्ने, सरकार ने शुरू की दो नई रिसर्च फेलोशिप

Sat, 11 Jul 2026 02:33 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Akash Dubey Updated Sat, 11 Jul 2026 02:33 PM IST
सार

दिल्ली सरकार ने राजधानी के इतिहास पर शोध के लिए दो नई फेलोशिप को मंजूरी दी है। हर साल 27 शोधकर्ताओं को एक वर्ष तक 25 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह फेलोशिप मिलेगी।

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Now world will read Delhi s true history
सरकार ने शुरू की दो नई रिसर्च फेलोशिप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के हजारों साल पुराने इतिहास की अनकही कहानियां अब शोध के जरिए सामने आएंगी। पुराने अभिलेखों, पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और कम चर्चित स्मारकों की वैज्ञानिक पड़ताल होगी, ताकि राजधानी का प्रमाणिक इतिहास नई पीढ़ी और दुनिया तक पहुंच सके। इसके लिए दिल्ली सरकार ने अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप और पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप को मंजूरी दी है। इन योजनाओं के तहत हर साल 27 शोधकर्ताओं को एक वर्ष तक 25 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह फेलोशिप देकर शोध कराया जाएगा।

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सरकार का मानना है कि दिल्ली हजारों वर्षों के इतिहास और अनेक सभ्यताओं की साक्षी रही है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐतिहासिक दस्तावेज, अभिलेख और पुरातात्विक जानकारियां अब भी बिखरी हुई हैं। नई फेलोशिप के जरिए इनका वैज्ञानिक अध्ययन, दस्तावेज को प्रमाणिक रूप से दर्ज और डिजिटलीकरण किया जाएगा, ताकि शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम लोगों को दिल्ली के प्रमाणिक इतिहास तक आसान पहुंच मिल सके।
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हर साल 27 शोधकर्ताओं को मिलेगा अवसर
सरकार अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप के तहत हर साल 15 और पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप के तहत 12 शोधकर्ताओं का चयन करेगी। दोनों फेलोशिप की अवधि एक साल होगी। चयनित शोधकर्ताओं को उनके शोध कार्य के मुताबिक 25 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह फेलोशिप दी जाएगी। पात्रता, आवेदन और चयन प्रक्रिया के दिशा-निर्देश संबंधित विभाग अलग से जारी करेंगे।
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अभिलेखों, उर्दू-फारसी दस्तावेजों के होंगे अध्ययन
अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप के तहत रिकॉर्ड प्रबंधन, पुराने अभिलेखों का संरक्षण, डिजिटलीकरण, माइक्रोफिल्मिंग, रिप्रोग्राफी, शोध और प्रकाशन जैसे विषयों पर काम होगा। इसके अलावा उर्दू और फारसी जैसी पुरानी भाषाओं में उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन और संरक्षण होगा। इससे लंबे समय से लंबे अनदेखी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।


कम चर्चित स्मारकों पर भी होगा शोध
पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप का मुख्य फोकस दिल्ली के कम चर्चित ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों, उनकी वास्तुकला, इतिहास और संरक्षण पर रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे विरासत संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ पर्यटन के नए केंद्र भी विकसित किए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि दोनों फेलोशिप योजनाओं का उद्देश्य केवल शोध कराना नहीं, बल्कि अभिलेख, पुरातत्व और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों का मजबूत समूह तैयार करना भी है। इससे अकादमिक शोध को नई दिशा मिलेगी और दिल्ली की दस्तावेजी और पुरातात्विक विरासत के संरक्षण का काम अधिक व्यवस्थित और संस्थागत तरीके से आगे बढ़ सकेगा।

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