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Nuh News: सड़क पर सजा... तीन माह से बंद निर्माण के कारण ग्रामीणों में आक्रोश
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1.18 करोड़ की लागत से बन रही मरोड़ा-बलई सड़क अधूरी, कई गांवों के लोग प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। कस्बे के कई गांवों को जोड़ने वाली मरोड़ा से बलई तक निर्माणाधीन सड़क इन दिनों विकास की बजाय ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। 1.18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी यह सड़क पिछले तीन माह से अधूरी हालत में पड़ी है। निर्माण कार्य अचानक बंद होने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है और सड़क पर कई जगह गढ्डे और मिट्टी से रोजमर्रा की आवाजाही मुश्किल हो गई है।
यह सड़क बदरपुर, बनारसी, सैल, इमामनगर, उमरा, उमरी, बुखारका, मरोड़ा और बलई सहित दर्जनों गांवों को जोड़ती है। हजारों ग्रामीण रोजाना इसी मार्ग से स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए आवाजाही करते हैं। सड़क खराब होने के कारण पिछले करीब पांच वर्षों से यहां गड्ढे ही गड्ढे थे, जिससे आए दिन सड़क हादसे होते रहे। जब लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण शुरू किया तो ग्रामीणों को लगा कि अब जर्जर सड़क से मुक्ति मिलेगी, लेकिन कुछ ही दिनों में काम रुक जाने से स्थिति और बिगड़ गई।
अधूरी सड़क, अधूरी उम्मीदें
निर्माण कार्य रुकने के बाद सड़क पर मिट्टी और गिट्टी बिखरी हुई है। बरसात या हल्की नमी में रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हादसों का बढ़ता खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि अधूरी सड़क पर रात के समय चलना बेहद जोखिम भरा हो गया है। कई जगह खुदी हुई सड़क और गड्ढों के कारण वाहन फिसल जाते हैं। समय रहते काम शुरू न हुआ तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
निर्माण कार्य में कैसी लगेगी सामग्री
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सड़क को पूरी तरह से तोड़ा जाएगा। उसके बाद नए सिरे से अच्छी गुणवत्ता का मैटेरियल निर्माण कार्य में लगाया जाएगा। करीब डेढ़ किलोमीटर मीटर लंबी बनने वाली सड़क को चारकोल से तैयार किया जायेगा। अभी जर्जर सड़क को तोड़ा गया है। एन जीटी लगी होने के कारण काम बंद है। लोगों को ज्यादा समस्या ना हो इसीलिए पुराने मलबे को रास्ते में डाला गया है। जैसे ही काम शुरू होगा नए सिरे से अच्छी क्वालिटी का मैटेरियल निर्माण कार्य में लगाया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और यह योजना सजा नहीं, सुविधा बन पाए।
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मरोड़ा से बलई गांव को जोड़ने वाली सड़क को अप्रैल तक पूरा किया जाना है। फिलहाल एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की रोक के कारण काम बंद है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा। -प्रदीप सिंधु, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग नूह।
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सड़क बनने की खुशी थोड़े दिन ही रही। अब हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों को बहुत परेशानी हो रही है। -अजरुद्दीन, ग्रामीण।
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रात में बाइक चलाना मुश्किल हो गया है। गड्ढों की वजह से कई लोग गिर चुके हैं। अगर इसी तरह रहा तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। - अली, पूर्व सरपंच बलई।
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गांव से बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रास्तों पर डली हुई कंकरियां वाहनों की रफ्तार को धीमा रखती है। वाहनों के टायर पंचर होने का ड़र बना रहता है। -आमिर खान, ग्रामीण।
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एक तो यह सड़क पहले से ही गड्ढों में तब्दील थी। निर्माण के नाम पर इसे ओर खोड़ डाला, जिससे कहीं भी आने जाने में बहुत परेशानी हो रही है। हमारी मांग है कि सड़क की जल्द मरम्मत कराई जाए।
-मुबारिक, ग्रामीण।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। कस्बे के कई गांवों को जोड़ने वाली मरोड़ा से बलई तक निर्माणाधीन सड़क इन दिनों विकास की बजाय ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। 1.18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी यह सड़क पिछले तीन माह से अधूरी हालत में पड़ी है। निर्माण कार्य अचानक बंद होने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है और सड़क पर कई जगह गढ्डे और मिट्टी से रोजमर्रा की आवाजाही मुश्किल हो गई है।
यह सड़क बदरपुर, बनारसी, सैल, इमामनगर, उमरा, उमरी, बुखारका, मरोड़ा और बलई सहित दर्जनों गांवों को जोड़ती है। हजारों ग्रामीण रोजाना इसी मार्ग से स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी कामों के लिए आवाजाही करते हैं। सड़क खराब होने के कारण पिछले करीब पांच वर्षों से यहां गड्ढे ही गड्ढे थे, जिससे आए दिन सड़क हादसे होते रहे। जब लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण शुरू किया तो ग्रामीणों को लगा कि अब जर्जर सड़क से मुक्ति मिलेगी, लेकिन कुछ ही दिनों में काम रुक जाने से स्थिति और बिगड़ गई।
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अधूरी सड़क, अधूरी उम्मीदें
निर्माण कार्य रुकने के बाद सड़क पर मिट्टी और गिट्टी बिखरी हुई है। बरसात या हल्की नमी में रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हादसों का बढ़ता खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि अधूरी सड़क पर रात के समय चलना बेहद जोखिम भरा हो गया है। कई जगह खुदी हुई सड़क और गड्ढों के कारण वाहन फिसल जाते हैं। समय रहते काम शुरू न हुआ तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
निर्माण कार्य में कैसी लगेगी सामग्री
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सड़क को पूरी तरह से तोड़ा जाएगा। उसके बाद नए सिरे से अच्छी गुणवत्ता का मैटेरियल निर्माण कार्य में लगाया जाएगा। करीब डेढ़ किलोमीटर मीटर लंबी बनने वाली सड़क को चारकोल से तैयार किया जायेगा। अभी जर्जर सड़क को तोड़ा गया है। एन जीटी लगी होने के कारण काम बंद है। लोगों को ज्यादा समस्या ना हो इसीलिए पुराने मलबे को रास्ते में डाला गया है। जैसे ही काम शुरू होगा नए सिरे से अच्छी क्वालिटी का मैटेरियल निर्माण कार्य में लगाया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और यह योजना सजा नहीं, सुविधा बन पाए।
मरोड़ा से बलई गांव को जोड़ने वाली सड़क को अप्रैल तक पूरा किया जाना है। फिलहाल एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की रोक के कारण काम बंद है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा। -प्रदीप सिंधु, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग नूह।
सड़क बनने की खुशी थोड़े दिन ही रही। अब हालात पहले से भी बदतर हो गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों को बहुत परेशानी हो रही है। -अजरुद्दीन, ग्रामीण।
रात में बाइक चलाना मुश्किल हो गया है। गड्ढों की वजह से कई लोग गिर चुके हैं। अगर इसी तरह रहा तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। - अली, पूर्व सरपंच बलई।
गांव से बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रास्तों पर डली हुई कंकरियां वाहनों की रफ्तार को धीमा रखती है। वाहनों के टायर पंचर होने का ड़र बना रहता है। -आमिर खान, ग्रामीण।
एक तो यह सड़क पहले से ही गड्ढों में तब्दील थी। निर्माण के नाम पर इसे ओर खोड़ डाला, जिससे कहीं भी आने जाने में बहुत परेशानी हो रही है। हमारी मांग है कि सड़क की जल्द मरम्मत कराई जाए।
-मुबारिक, ग्रामीण।