फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Nuh News ›   Villagers' struggle to get the slaughterhouse shut down intensifies.

Nuh News: बूचड़खाना बंद कराने के लिए ग्रामीणों का संघर्ष तेज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 12:19 AM IST
विज्ञापन
सरकारी जमीन पर कब्जे का भी आरोप, निष्पक्ष तथा उचित कार्रवाई की मांग
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। गांव टपकन में कथित रूप से संचालित बूचड़खाने को बंद कराने और सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों का संघर्ष लगातार जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बूचड़खाने के कारण टपकन सहित आसपास के गांवों के लोगों को लंबे समय से दुर्गंध, गंदगी और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के क्षेत्र के लोगों पर भी इसका असर पड़ रहा है।

मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता सरफराज अंजुम, हाईकोर्ट अधिवक्ता हैदर अली, अधिवक्ता इरशाद अली, ग्राम पंचायत टपकन के सरपंच, पंचायत सदस्य अलीम खान, पंचायत सदस्य इरशाद खान, पीड़ित माजिद अली, जाकिर हुसैन सहित कई ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं और संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच तथा उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन


सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप

ग्रामीणों की ओर से बूचड़खाने के लिए सरकारी जमीन के कथित इस्तेमाल और कब्जे का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी जमीन पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा हुआ है तो प्रशासन को इसकी जांच कराकर जमीन को कब्जामुक्त कराना चाहिए। साथ ही बूचड़खाने के संचालन से संबंधित सभी दस्तावेज, अनुमति और नियमों की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का आह्वान

कमांडो हिदायत खान ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन सभी ग्रामीणों का है जो बूचड़खाने से होने वाली परेशानियों से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आने में समय लग सकता है, लेकिन लोगों को अपना हौसला नहीं खोना चाहिए।


प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के दौरान बूचड़खाने के संचालन की अनुमति, जमीन के रिकॉर्ड, पर्यावरण एवं अन्य संबंधित नियमों की स्थिति की जांच की जानी चाहिए। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed