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Palam Fire: प्रशासनिक लापरवाही की फिर खुली पोल, बिजली के उलझे तारों में अटका सिस्टम; हर गली में हादसे के हालात

सचिन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 19 Mar 2026 03:09 AM IST
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सार

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जहां यह हादसा हुआ वहां बिजली के तारों का मकड़जाल फैला था। तार इतने नीचे और पास-पास थे कि कोई भी व्यक्ति आसानी से उन्हें छू सकता था।

Palam Fire: Administrative negligence exposed again, system stuck in tangled electrical wires
पालम अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला/ भूपिंदर सिंह
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विस्तार

राजधानी में बिजली के तारों का जाल एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। पालम इलाके में हुए अग्निकांड ने प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। इस दर्दनाक हादसे में करीब 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जहां यह हादसा हुआ वहां बिजली के तारों का मकड़जाल फैला था। तार इतने नीचे और पास-पास थे कि कोई भी व्यक्ति आसानी से उन्हें छू सकता था।

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पालम की यह घटना कोई पहली नहीं है। राजधानी के लक्ष्मी नगर, जमनापार, शकरपुर, खानपुर, चावड़ी बाजार, पहाड़गंज, उत्तम नगर, विवेक विहार और द्वारका समेत कई इलाके इसी तरह की खतरनाक स्थिति से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों में संकरी गलियों के ऊपर उलझे हुए बिजली के तार दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है, जब पानी और खुले तार मिलकर जानलेवा स्थिति पैदा कर देते हैं। घटना के बाद मौके पर पहुंचे दमकल विभाग को आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। संकरी गलियों और तारों के जाल के कारण राहत और बचाव कार्य में भी बाधा आई।
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बारिश के दिनों में होती है स्पार्किंग
पालम के व्यापारी विक्की ने बताया कि बारिश के दिनों में अक्सर स्पार्किंग होती है, जिससे खतरा बना रहता है। अगर यहां कोई हादसा होता है, तो संकरी गलियों के कारण एम्बुलेंस यहां नहीं पहुंच सकेगी। वहीं, स्थानीय निवासी मनोज ने बताया कि गलियों में जहां बिजली की पुरानी तार हैं, वहीं टेलीफोन के भी केबल हैं। यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन से कई बार इसके लिए गुहार लगाई, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि पालम स्थित रामफल चौक में खतरनाक तरीके से तारों का जाल लटक रहा है, सरकार को इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने कई बार प्रशासन और बिजली विभाग से शिकायत की, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

हादसों को दावत दे रहे तार
पालम के स्थानीय निवासियों के साथ ही दुकानदारों की मांग है कि यह तार न सिर्फ दुर्घटना को दावत देते हैं, बल्कि बाजारों को भी बदसूरत बनाते हैं। इसलिए इन्हें हटाया जाना आवश्यक है। पालम निवासी जतिन ने बताया कि इस हादसे ने यह भी दिखाया है कि अव्यवस्थित तार न केवल दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, बल्कि राहत और बचाव कार्य में भी बाधा डालते हैं। आग लगने के बाद दमकल विभाग को मौके तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संकरी गलियां और नीचे लटकते तार इस काम में बड़ी रुकावट बने। वहीं, स्थानीय निवासी महेश ने बताया कि इलाके में बिजली के साथ-साथ टेलीफोन और केबल के तार भी उलझे हुए हैं, जिससे खतरा और बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हर बार भरोसा मिला, पर काम नहीं हुआ : स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन और बिजली विभाग से शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। पालम हादसा एक चेतावनी है कि अब भी अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में और भी बड़ी त्रासदियां देखने को मिल सकती हैं। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन केवल जांच तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाए, ताकि दिल्ली की गलियों से इस खतरे को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।

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