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यमुना में फिर झाग: मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कालिंदी कुंज का जायजा लिया, सामने आई वजह; DPCC को निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Thu, 19 Mar 2026 08:21 AM IST
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सार
दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बुधवार को कालिंदी कुंज में यमुना नदी के झाग वाली स्थिति का निरीक्षण किया, जहां आईआईटी दिल्ली विशेषज्ञों ने ओखला बैराज की ढलान और तेज जल प्रवाह को झाग का प्रमुख कारण बताया।
प्रवेश साहिब सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
यमुना में बढ़ी झाग को लेकर उठे सवालों के बीच जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बुधवार को कालिंदी कुंज इलाके में हालात का जायजा लिया। उन्होंने माना कि नदी में प्रदूषण बढ़ गया है और कहा कि झाग की समस्या की मुख्य वजह बैराज की संरचना और जल प्रवाह है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने की कार्रवाई तेज की जाएगी।
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मंत्री ने कालिंदी कुंज और आसपास के घाटों का निरीक्षण किया। इनके साथ आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञ, जिला प्रशासन, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली व उत्तर प्रदेश के संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
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विशेषज्ञों ने बताया कि झाग बनने की ये स्थिति सीमित क्षेत्र में ही है और इसका मुख्य कारण ओखला बैराज की संरचना और जल प्रवाह है। बैराज पर ढलान के कारण पानी तेजी से गिरता है, जिससे हलचल पैदा होती है और पानी में मौजूद अशुद्धियां झाग के रूप में ऊपर आ जाती हैं। मंत्री ने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए सरकार पूरी गंभीरता से काम कर रही है।
डीपीसीसी को सख्ती बढ़ाने के निर्देश
अधिकारियों ने ये बताया कि घरेलू डिटर्जेंट से आने वाले सर्फेक्टेंट्स, अवैध डाईंग यूनिट, लॉन्ड्री क्लस्टर, धोबी घाट और कुछ नालों से आने वाला आंशिक या बिना उपचार का पानी भी झाग को बढ़ाता है। यमुना में जल प्रवाह कम होने पर असर ज्यादा नजर आता है। मंत्री ने डीपीसीसी को निर्देश दिया कि प्रदूषण फैलाने वाले सभी स्रोतों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जाए।
उन्होंने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की कार्यप्रणाली को समझा। उन्होंने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1500 एमजीडी तक ले जाने पर काम चल रहा है। नालों में इन-सीटू ट्रीटमेंट के जरिए प्रदूषण को स्रोत पर ही कम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के साथ भी बैराज और जल प्रवाह प्रबंधन पर चर्चा की और बेहतर तालमेल की उम्मीद जताई।