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Delhi NCR News: अभिभावकों को चुभने लगी फीस की फांस
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-अभिभावकों का आरोप बीते सत्र के मुकाबले में हजार से पंद्रह सौ तक हुई है बढ़ोतरी
- फीस निर्धारण कमेटी संबंधी मामला कोर्ट में लंबित होने के बावजूद कई स्कूलों ने बढ़ाई फीस
रश्मि शर्मा
नई दिल्ली। स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। लेकिन, इससे पहले ही अभिभावकों को फीस की फांस चुभने लगी है। अभिभावकों बीते साल के मुकाबले हजार से पंद्रह सौ रुपये फीस बढ़ने की शिकायत कर रहे हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल किसी न किसी शुल्क में बढ़ोतरी कर दे रहे हैं, जबकि फीस निर्धारण कमेटी संबंधी मामला अभी कोर्ट में है। कुछ अभिभावकों ने बताया कि कई स्कूल बीते साल वाली ही फीस ले रहे हैं, लेकिन साथ ही कह रहे हैं कि बढ़ोतरी की अनुमति मिलने पर एरियर के साथ फीस की वसूली की जाएगी।
वहीं, स्कूल प्रबंधनों का कहना है कि यदि कुछ स्कूल नियमों के विरुद्ध फीस बढ़ा रहे हैं, तो यह नियमों का उल्लंघन है।
कई प्रकार के शुल्क को फीस ढांचे में शामिल करते हैं स्कूल
निजी स्कूल ई-लर्निंग, मैनेजमेंट फंड, विकास शुल्क, रख-रखाव, एजुकेशनल टेक्नॉलॉजी, गतिविधि, मिड-डे मील, निर्धारित शुल्क, मेडिकल शुल्क, असाइनमेंट शुल्क, अभिभावक का आईकार्ड, इंश्योरेंस, फाउंडेशन डे कैलेंडर, क्लास फोटो, एकीकृत शुल्क आदि को फीस ढांचे में शामिल करते हैं। यह प्रति माह से लेकर वार्षिक तक होते हैं।
कमेटी बनने तक फीस बढ़ाना गलत : स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने कहा कि स्कूलों को कोर्ट ने कहा है कि अभी उन्हें सत्र 2025-26 वाली ही फीस लेनी है। जब तक स्कूल फीस रेगुलेटरी कमेटी नहीं बनती तब तक स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। यदि कोई स्कूल फीस बढ़ाकर ले रहा है तो यह नियमों का उल्लंघन है। अभिभावकों को स्कूल से पूछना चाहिए कि वह फीस क्यों बढ़ाई गई है।
स्कूलों पर लगाम लगाने की जरूरत
हर साल स्कूल किसी न किसी रूप में फीस में बढ़ोतरी कर देते हैं। स्कूलों पर लगाम लगाने की जरूरत है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए मोटी फीस का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है। -सीनू( अभिभावक)
अभी मेरे पास संदेश नहीं आया, लेकिन अन्य अभिभावकों से पता चला है कि इस बार फीस में हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होगी। दो बच्चों की फीस से पूरा बजट गडबड़ा जाता है। - पारूल (अभिभावक)
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- फीस निर्धारण कमेटी संबंधी मामला कोर्ट में लंबित होने के बावजूद कई स्कूलों ने बढ़ाई फीस
रश्मि शर्मा
नई दिल्ली। स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। लेकिन, इससे पहले ही अभिभावकों को फीस की फांस चुभने लगी है। अभिभावकों बीते साल के मुकाबले हजार से पंद्रह सौ रुपये फीस बढ़ने की शिकायत कर रहे हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल किसी न किसी शुल्क में बढ़ोतरी कर दे रहे हैं, जबकि फीस निर्धारण कमेटी संबंधी मामला अभी कोर्ट में है। कुछ अभिभावकों ने बताया कि कई स्कूल बीते साल वाली ही फीस ले रहे हैं, लेकिन साथ ही कह रहे हैं कि बढ़ोतरी की अनुमति मिलने पर एरियर के साथ फीस की वसूली की जाएगी।
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वहीं, स्कूल प्रबंधनों का कहना है कि यदि कुछ स्कूल नियमों के विरुद्ध फीस बढ़ा रहे हैं, तो यह नियमों का उल्लंघन है।
कई प्रकार के शुल्क को फीस ढांचे में शामिल करते हैं स्कूल
निजी स्कूल ई-लर्निंग, मैनेजमेंट फंड, विकास शुल्क, रख-रखाव, एजुकेशनल टेक्नॉलॉजी, गतिविधि, मिड-डे मील, निर्धारित शुल्क, मेडिकल शुल्क, असाइनमेंट शुल्क, अभिभावक का आईकार्ड, इंश्योरेंस, फाउंडेशन डे कैलेंडर, क्लास फोटो, एकीकृत शुल्क आदि को फीस ढांचे में शामिल करते हैं। यह प्रति माह से लेकर वार्षिक तक होते हैं।
कमेटी बनने तक फीस बढ़ाना गलत : स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने कहा कि स्कूलों को कोर्ट ने कहा है कि अभी उन्हें सत्र 2025-26 वाली ही फीस लेनी है। जब तक स्कूल फीस रेगुलेटरी कमेटी नहीं बनती तब तक स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। यदि कोई स्कूल फीस बढ़ाकर ले रहा है तो यह नियमों का उल्लंघन है। अभिभावकों को स्कूल से पूछना चाहिए कि वह फीस क्यों बढ़ाई गई है।
स्कूलों पर लगाम लगाने की जरूरत
हर साल स्कूल किसी न किसी रूप में फीस में बढ़ोतरी कर देते हैं। स्कूलों पर लगाम लगाने की जरूरत है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए मोटी फीस का भुगतान करना मुश्किल हो जाता है। -सीनू( अभिभावक)
अभी मेरे पास संदेश नहीं आया, लेकिन अन्य अभिभावकों से पता चला है कि इस बार फीस में हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होगी। दो बच्चों की फीस से पूरा बजट गडबड़ा जाता है। - पारूल (अभिभावक)