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Delhi NCR News: एडीसीपी संदीप लांबा को जांच की निगरानी से हटाने की याचिका खारिज
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हाईकोर्ट ने कहा- केवल आरोपों के आधार पर किसी अधिकारी की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते, जांच पूरी होने से राहत की मांग हुई निष्प्रभावी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अतिरिक्त उपायुक्त पुलिस (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा को अदालत के निर्देश पर चल रही पुलिस जांच की निगरानी से हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने कहा कि किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ केवल आरोप लगने से यह नहीं माना जा सकता कि वह हर मामले में पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करेगा।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कठपालिया ने मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, आपको निष्पक्ष होना होगा। संस्था को बदनाम करना बंद करें। किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप होने का यह अर्थ नहीं है कि उससे हर जिम्मेदारी छीन ली जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई अधिकारी किसी अन्य मामले में दोषी भी पाया जाता है, तब भी यह नहीं माना जा सकता कि वह प्रत्येक मामले में अनुचित आचरण करेगा।
दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि संबंधित जांच पूरी हो चुकी है, याचिकाकर्ता का बयान दर्ज कर लिया गया है और जांच रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। इस पर अदालत ने माना कि याचिका में मांगी गई राहत अब निष्प्रभावी हो चुकी है और इसे खारिज कर दिया। याचिका में पुलिस आयुक्त को निर्देश देने की मांग की गई थी कि जांच को संदीप लांबा के प्रशासनिक नियंत्रण से हटाकर उत्तर-पूर्व जिले के बाहर तैनात किसी उपायुक्त पुलिस को सौंपा जाए।
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यह है मामला
मामला उस पूर्व याचिका से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि 24-25 मार्च 2025 की रात जाफराबाद थाने में उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। हाईकोर्ट ने इन आरोपों की पुलिस जांच के आदेश दिए थे। बाद में याचिकाकर्ता ने दावा किया कि प्रारंभिक जांच बिना उनका बयान दर्ज किए और शिकायत के महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल किए पूरी कर ली गई थी, जिसके बाद उन्होंने जांच की निगरानी पर आपत्ति जताते हुए नई याचिका दायर की थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अतिरिक्त उपायुक्त पुलिस (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा को अदालत के निर्देश पर चल रही पुलिस जांच की निगरानी से हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने कहा कि किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ केवल आरोप लगने से यह नहीं माना जा सकता कि वह हर मामले में पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करेगा।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कठपालिया ने मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, आपको निष्पक्ष होना होगा। संस्था को बदनाम करना बंद करें। किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप होने का यह अर्थ नहीं है कि उससे हर जिम्मेदारी छीन ली जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई अधिकारी किसी अन्य मामले में दोषी भी पाया जाता है, तब भी यह नहीं माना जा सकता कि वह प्रत्येक मामले में अनुचित आचरण करेगा।
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दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि संबंधित जांच पूरी हो चुकी है, याचिकाकर्ता का बयान दर्ज कर लिया गया है और जांच रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। इस पर अदालत ने माना कि याचिका में मांगी गई राहत अब निष्प्रभावी हो चुकी है और इसे खारिज कर दिया। याचिका में पुलिस आयुक्त को निर्देश देने की मांग की गई थी कि जांच को संदीप लांबा के प्रशासनिक नियंत्रण से हटाकर उत्तर-पूर्व जिले के बाहर तैनात किसी उपायुक्त पुलिस को सौंपा जाए।
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यह है मामला
मामला उस पूर्व याचिका से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि 24-25 मार्च 2025 की रात जाफराबाद थाने में उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। हाईकोर्ट ने इन आरोपों की पुलिस जांच के आदेश दिए थे। बाद में याचिकाकर्ता ने दावा किया कि प्रारंभिक जांच बिना उनका बयान दर्ज किए और शिकायत के महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल किए पूरी कर ली गई थी, जिसके बाद उन्होंने जांच की निगरानी पर आपत्ति जताते हुए नई याचिका दायर की थी।