{"_id":"69c299ad2ca8906bc40177d1","slug":"protests-begin-against-pre-demonstration-permission-orders-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-129237-2026-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीयू : प्रदर्शनों से पूर्व अनुमति आदेश का विरोध शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीयू : प्रदर्शनों से पूर्व अनुमति आदेश का विरोध शुरू
विज्ञापन
विज्ञापन
केवाईएस व आइसा ने आदेश को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । कैंपस में सार्वजनिक सभा, प्रदर्शन या मार्च के लिए पूर्व-अनुमति लेने के दिल्ली विश्वविद्यालय के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। क्रांतिकारी युवा संगठन व आइसा ने आदेश को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है। उन्होंने इसकी वापसी की मांग की है।
मालूम हो कि डीयू प्रशासन ने 23 मार्च को नोटिस जारी कर प्रदर्शन, सभा व रैली के लिए प्रशासन और पुलिस से कम से कम 72 घंटे पहले लिखित अनुमति लेने की शर्त रखी है। मामले में केवाईएस ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और छात्र आंदोलनों को रोकने का आरोप लगाया है। प्रॉक्टर को हटाने की भी मांग की है।
आइसा ने कहा कि यह आदेश छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। संगठन के अनुसार, यह कदम छात्र आंदोलनों और सामाजिक न्याय की मांगों को दबाने के लिए उठाया गया है। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन एक तरफ कुछ संगठनों को खुली छूट देता है, जबकि छात्र आंदोलनों पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है।
Trending Videos
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । कैंपस में सार्वजनिक सभा, प्रदर्शन या मार्च के लिए पूर्व-अनुमति लेने के दिल्ली विश्वविद्यालय के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। क्रांतिकारी युवा संगठन व आइसा ने आदेश को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है। उन्होंने इसकी वापसी की मांग की है।
मालूम हो कि डीयू प्रशासन ने 23 मार्च को नोटिस जारी कर प्रदर्शन, सभा व रैली के लिए प्रशासन और पुलिस से कम से कम 72 घंटे पहले लिखित अनुमति लेने की शर्त रखी है। मामले में केवाईएस ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और छात्र आंदोलनों को रोकने का आरोप लगाया है। प्रॉक्टर को हटाने की भी मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
आइसा ने कहा कि यह आदेश छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। संगठन के अनुसार, यह कदम छात्र आंदोलनों और सामाजिक न्याय की मांगों को दबाने के लिए उठाया गया है। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन एक तरफ कुछ संगठनों को खुली छूट देता है, जबकि छात्र आंदोलनों पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है।