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सैदुल्लाजाब की आरक्षित वन भूमि से अतिक्रमण हटाइए : एनजीटी
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अधिकरण ने दिल्ली सरकार को दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को साकेत के सैदुल्लाजाब स्थित खसरा संख्या 209 की आरक्षित वन भूमि से सभी अतिक्रमण चार माह के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई कानून के अनुरूप की जाए और सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए। आदेश के साथ ही एनजीटी ने मामले का निस्तारण कर दिया।
यह मामला करप्शन रिमूवल सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि भूमि माफिया और अन्य लोगों ने आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। दावा किया गया कि करीब 50 प्रतिशत वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया गया और वहां अवैध निर्माण कर लिए गए हैं।
जांच में 19 बीघा जमीन 6.12 बीघा ही मिली थी
मामले की जांच के लिए गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी रिकॉर्ड में खसरा संख्या 209 का क्षेत्रफल 19 बीघा दर्ज है, जबकि मौके पर केवल करीब 6.12 बीघा भूमि ही उपलब्ध मिली। समिति ने वन क्षेत्र में पेड़ों की संख्या कम होने, कई स्थानों पर अवैध निर्माण, एक मंदिर, स्थायी चबूतरे तथा बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य कचरा मिलने की पुष्टि की। रिपोर्ट में कहा गया कि इन अतिक्रमणों से वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी और वन्यजीवों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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चार माह में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए जारी नोटिसों को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। अदालत के निर्देश पर संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। इसके बाद वन निपटान अधिकारी ने 7 मई को सभी दावों को खारिज कर दिया, जिससे अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया। इन तथ्यों के आधार पर एनजीटी ने दिल्ली सरकार को चार माह के भीतर पूरी कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को साकेत के सैदुल्लाजाब स्थित खसरा संख्या 209 की आरक्षित वन भूमि से सभी अतिक्रमण चार माह के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई कानून के अनुरूप की जाए और सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए। आदेश के साथ ही एनजीटी ने मामले का निस्तारण कर दिया।
यह मामला करप्शन रिमूवल सोसाइटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि भूमि माफिया और अन्य लोगों ने आरक्षित वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। दावा किया गया कि करीब 50 प्रतिशत वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया गया और वहां अवैध निर्माण कर लिए गए हैं।
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जांच में 19 बीघा जमीन 6.12 बीघा ही मिली थी
मामले की जांच के लिए गठित संयुक्त समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी रिकॉर्ड में खसरा संख्या 209 का क्षेत्रफल 19 बीघा दर्ज है, जबकि मौके पर केवल करीब 6.12 बीघा भूमि ही उपलब्ध मिली। समिति ने वन क्षेत्र में पेड़ों की संख्या कम होने, कई स्थानों पर अवैध निर्माण, एक मंदिर, स्थायी चबूतरे तथा बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य कचरा मिलने की पुष्टि की। रिपोर्ट में कहा गया कि इन अतिक्रमणों से वन क्षेत्र की पारिस्थितिकी और वन्यजीवों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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चार माह में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए जारी नोटिसों को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। अदालत के निर्देश पर संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। इसके बाद वन निपटान अधिकारी ने 7 मई को सभी दावों को खारिज कर दिया, जिससे अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया। इन तथ्यों के आधार पर एनजीटी ने दिल्ली सरकार को चार माह के भीतर पूरी कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया।