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Delhi NCR News: डीयू में सत्र के पहले दिन एफओटी के 34 शिक्षक रहे अनुपस्थित, जवाब-तलब
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-शिक्षकों को जारी किया गया मेमोरेंडम, डूटा ने विरोध में दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी (एफओटी) में नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन 34 शिक्षकों की गैरहाजिरी पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। एफओटी के डीन कार्यालय ने सभी संबंधित शिक्षकों को मेमोरेंडम जारी कर बुधवार शाम तक लिखित विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है। अब इस मामले पर राजनीति गरमा गई है। शिक्षकों को मेमो देने के विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (डूटा) ने धरना शुरू कर मेमोरेंडम वापस लेने की मांग की है। शिक्षकों को जारी मेमोरेंडम में कहा गया है कि 28 जुलाई को सुबह नौ बजे से 10:30 बजे के बीच नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन 34 शिक्षक बिना पूर्व सूचना और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अनुपस्थित पाए गए। इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए सभी शिक्षकों से अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट करते हुए लिखित जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने या संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देने की स्थिति में विश्वविद्यालय के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं डूटा ने मेमोरेंडम को मनमाना और शिक्षकों की गरिमा के खिलाफ बताते हुए इस पर कड़ा विरोध जताया है। डूटा अध्यक्ष प्रो वीएस नेगी और सचिव बिमलेंदु तीर्थंकर ने डीन को भेजे पत्र में कहा है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए शिक्षकों को दोषी मानना उचित नहीं है। डूटा ने मेमोरेंडम तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों के सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी मांग को लेकर संगठन का धरना देर शाम तक जारी रहा। वहीं डूटा ने मेमोरेंडम को मनमाना और शिक्षकों की गरिमा के खिलाफ बताते हुए इस पर कड़ा विरोध जताया है। डूटा अध्यक्ष प्रो वीएस नेगी और सचिव बिमलेंदु तीर्थंकर ने डीन को भेजे पत्र में कहा है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए शिक्षकों को दोषी मानना उचित नहीं है। डूटा ने मेमोरेंडम तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों के सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी मांग को लेकर संगठन का धरना देर शाम तक जारी रहा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के फैकल्टी ऑफ टेक्नोलॉजी (एफओटी) में नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन 34 शिक्षकों की गैरहाजिरी पर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। एफओटी के डीन कार्यालय ने सभी संबंधित शिक्षकों को मेमोरेंडम जारी कर बुधवार शाम तक लिखित विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है। अब इस मामले पर राजनीति गरमा गई है। शिक्षकों को मेमो देने के विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (डूटा) ने धरना शुरू कर मेमोरेंडम वापस लेने की मांग की है। शिक्षकों को जारी मेमोरेंडम में कहा गया है कि 28 जुलाई को सुबह नौ बजे से 10:30 बजे के बीच नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन 34 शिक्षक बिना पूर्व सूचना और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अनुपस्थित पाए गए। इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए सभी शिक्षकों से अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट करते हुए लिखित जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने या संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देने की स्थिति में विश्वविद्यालय के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं डूटा ने मेमोरेंडम को मनमाना और शिक्षकों की गरिमा के खिलाफ बताते हुए इस पर कड़ा विरोध जताया है। डूटा अध्यक्ष प्रो वीएस नेगी और सचिव बिमलेंदु तीर्थंकर ने डीन को भेजे पत्र में कहा है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए शिक्षकों को दोषी मानना उचित नहीं है। डूटा ने मेमोरेंडम तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों के सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी मांग को लेकर संगठन का धरना देर शाम तक जारी रहा। वहीं डूटा ने मेमोरेंडम को मनमाना और शिक्षकों की गरिमा के खिलाफ बताते हुए इस पर कड़ा विरोध जताया है। डूटा अध्यक्ष प्रो वीएस नेगी और सचिव बिमलेंदु तीर्थंकर ने डीन को भेजे पत्र में कहा है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए शिक्षकों को दोषी मानना उचित नहीं है। डूटा ने मेमोरेंडम तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों के सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी मांग को लेकर संगठन का धरना देर शाम तक जारी रहा।
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