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Delhi NCR News: कांवड़ियों से पटी सड़कें, बम-बम बोल रही राजधानी...
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गोमुख-हरिद्वार से पैदल पहुंचे शिवभक्तों का सैलाब उमड़ा, जगह-जगह लगे शिविर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
शिवरात्रि पर मंगलवार को जलाभिषेक करने के लिए गोमुख और हरिद्वार से पैदल कांवड़ में गंगाजल लेकर दिल्ली पहुंचने वाले शिवभक्तों का सैलाब राजधानी की सड़कों पर दिखाई देने लगा है। कांवड़ियों की लगातार बढ़ती संख्या के साथ प्रमुख कांवड़ मार्ग भगवा रंग में रंग गए हैं। सड़क के एक हिस्से में कांवड़ियों की लंबी कतार दिखाई दे रही है तो दूसरी ओर उनके स्वागत और सेवा के लिए लगाए गए शिविरों में लोगों की भीड़ जुटी है।
राजधानी में दूसरे राज्यों से आने वाले कांवड़ियों के साथ अब स्थानीय कांवड़िया भी बड़ी संख्या में आने शुरू हो गए हैं। लगातार कई दिनों की पैदल यात्रा के कारण थके कांवड़ियों के लिए सड़क किनारे लगे शिविर इस समय सबसे बड़ा सहारा बने हैं। दिल्ली में प्रवेश करते ही कई जगह कांवड़ियों की सेवा के लिए शिविर दिखाई देने लगते हैं। लोनी और गाजियाबाद की ओर से आने वाले कांवड़ियों के लिए शाहदरा और जीटी रोड के आसपास कई स्थानों पर भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। वहीं गाजीपुर व नरेला की ओर से आने वाले कांवड़ियों की आवाजाही पूर्वी दिल्ली और बाहरी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से होती हुई आगे बढ़ रही है।
शिविरों के बाहर सेवा में जुटे लोग सड़क की ओर नजरें लगाए रहते हैं। कांवड़ियों का समूह दिखाई देते ही उन्हें शिविर में रुकने, भोजन करने और आराम करने का आग्रह किया जाता है। जगह-जगह बैनर लगाकर भोजन, पानी, चिकित्सा और विश्राम की सुविधाओं की जानकारी भी दी गई है। शाहदरा, कृष्णा नगर, लक्ष्मी नगर और यमुना बाजार की ओर बढ़ने पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ती दिखाई देती है। सड़क किनारे लगे शिविरों में दिनभर भंडारे चलते हैं। कहीं पूड़ी-सब्जी तैयार हो रही है तो कहीं फल, दूध और पानी बांटा जा रहा है।
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शिविरों में कांवड़ियों के आराम के लिए गद्दे और बिस्तर लगाए गए हैं। स्नान के लिए पानी और अस्थायी स्नानघर की व्यवस्था भी की गई है। लंबी दूरी से आने वाले कांवड़िया भोजन करने और कुछ देर आराम करने के बाद फिर अपनी मंजिल की ओर निकल जाते हैं। पुरानी दिल्ली की ओर बढ़ने वाले कांवड़ियों के जत्थे कश्मीरी गेट और यमुना बाजार क्षेत्र से गुजरते हैं। यहां सामान्य दिनों की तुलना में सड़क का माहौल अलग दिखाई देता है। भगवा झंडों और कांवड़ियों की कतारों के बीच स्वयंसेवक लगातार सेवा में जुटे हैं।
उधर, वजीराबाद और बुराड़ी की ओर जाने वाले मार्गों पर भी कांवड़ियों की आवाजाही दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पानी और भोजन वितरण की व्यवस्था की है। बाहरी में नरेला, बवाना, कंझावला, नांगलोई, मुंडका, नजफगढ़ जैसे इलाकों में भी कांवड़ियों के लिए सेवा की व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां लगे शिविरों में भोजन और पानी के साथ विश्राम की सुविधा दी जा रही है। इन इलाकों से गुजरने वाले कांवड़ियों के लिए स्वयंसेवक सड़क किनारे खड़े होकर उन्हें शिविर में आने का आग्रह करते नजर आते हैं। कुछ लोग कारों में भोजन और पानी लेकर कांवड़ मार्ग पर घूमते हुए सेवा करते दिखाई देते हैं।
पैरों में छाले, थकान और चोट का इलाज : कई दिनों तक पैदल चलने के कारण कांवड़ियों को पैरों में छाले, दर्द और थकान जैसी परेशानियां हो रही हैं। इसे देखते हुए कई शिविरों में चिकित्सा व्यवस्था की गई है। कुछ स्थानों पर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद हैं, जबकि शिवभक्तों ने चलती-फिरती डिस्पेंसरियां भी शुरू की हैं। मोबाइल चिकित्सा केंद्रों के जरिये कांवड़ मार्ग पर ही प्राथमिक जांच और उपचार किया जा रहा है।
रात होते ही भजनों से गूंजते शिविर : दिनभर भोजन और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले शिविर शाम होते ही भक्ति के केंद्र में बदल जाते हैं। लाउडस्पीकर पर भगवान शिव के भजन शुरू हो जाते हैं। कई शिविरों में रात को भजन मंडलियों और स्थानीय गायकों की प्रस्तुतियां होती हैं। दिनभर पैदल चलने वाले कांवड़िये कुछ समय शिविर में बैठकर भजन सुनते हैं, फिर आराम करते हैं और सुबह दोबारा यात्रा शुरू कर देते हैं।
चौराहों पर पुलिस, यातायात पर नजर : कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के बीच शाहदरा, जीटी रोड, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और अन्य प्रमुख चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है। कांवड़ियों के समूह के सड़क पार करने के दौरान पुलिस कुछ समय के लिए दोनों ओर का यातायात रोकती है और उन्हें सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराती है। कांवड़ियों और वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग रखने और दुर्घटना रोकने के लिए पुलिसकर्मी लगातार निगरानी करते दिखाई दे रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
शिवरात्रि पर मंगलवार को जलाभिषेक करने के लिए गोमुख और हरिद्वार से पैदल कांवड़ में गंगाजल लेकर दिल्ली पहुंचने वाले शिवभक्तों का सैलाब राजधानी की सड़कों पर दिखाई देने लगा है। कांवड़ियों की लगातार बढ़ती संख्या के साथ प्रमुख कांवड़ मार्ग भगवा रंग में रंग गए हैं। सड़क के एक हिस्से में कांवड़ियों की लंबी कतार दिखाई दे रही है तो दूसरी ओर उनके स्वागत और सेवा के लिए लगाए गए शिविरों में लोगों की भीड़ जुटी है।
राजधानी में दूसरे राज्यों से आने वाले कांवड़ियों के साथ अब स्थानीय कांवड़िया भी बड़ी संख्या में आने शुरू हो गए हैं। लगातार कई दिनों की पैदल यात्रा के कारण थके कांवड़ियों के लिए सड़क किनारे लगे शिविर इस समय सबसे बड़ा सहारा बने हैं। दिल्ली में प्रवेश करते ही कई जगह कांवड़ियों की सेवा के लिए शिविर दिखाई देने लगते हैं। लोनी और गाजियाबाद की ओर से आने वाले कांवड़ियों के लिए शाहदरा और जीटी रोड के आसपास कई स्थानों पर भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। वहीं गाजीपुर व नरेला की ओर से आने वाले कांवड़ियों की आवाजाही पूर्वी दिल्ली और बाहरी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से होती हुई आगे बढ़ रही है।
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शिविरों के बाहर सेवा में जुटे लोग सड़क की ओर नजरें लगाए रहते हैं। कांवड़ियों का समूह दिखाई देते ही उन्हें शिविर में रुकने, भोजन करने और आराम करने का आग्रह किया जाता है। जगह-जगह बैनर लगाकर भोजन, पानी, चिकित्सा और विश्राम की सुविधाओं की जानकारी भी दी गई है। शाहदरा, कृष्णा नगर, लक्ष्मी नगर और यमुना बाजार की ओर बढ़ने पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ती दिखाई देती है। सड़क किनारे लगे शिविरों में दिनभर भंडारे चलते हैं। कहीं पूड़ी-सब्जी तैयार हो रही है तो कहीं फल, दूध और पानी बांटा जा रहा है।
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शिविरों में कांवड़ियों के आराम के लिए गद्दे और बिस्तर लगाए गए हैं। स्नान के लिए पानी और अस्थायी स्नानघर की व्यवस्था भी की गई है। लंबी दूरी से आने वाले कांवड़िया भोजन करने और कुछ देर आराम करने के बाद फिर अपनी मंजिल की ओर निकल जाते हैं। पुरानी दिल्ली की ओर बढ़ने वाले कांवड़ियों के जत्थे कश्मीरी गेट और यमुना बाजार क्षेत्र से गुजरते हैं। यहां सामान्य दिनों की तुलना में सड़क का माहौल अलग दिखाई देता है। भगवा झंडों और कांवड़ियों की कतारों के बीच स्वयंसेवक लगातार सेवा में जुटे हैं।
उधर, वजीराबाद और बुराड़ी की ओर जाने वाले मार्गों पर भी कांवड़ियों की आवाजाही दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पानी और भोजन वितरण की व्यवस्था की है। बाहरी में नरेला, बवाना, कंझावला, नांगलोई, मुंडका, नजफगढ़ जैसे इलाकों में भी कांवड़ियों के लिए सेवा की व्यवस्थाएं की गई हैं। यहां लगे शिविरों में भोजन और पानी के साथ विश्राम की सुविधा दी जा रही है। इन इलाकों से गुजरने वाले कांवड़ियों के लिए स्वयंसेवक सड़क किनारे खड़े होकर उन्हें शिविर में आने का आग्रह करते नजर आते हैं। कुछ लोग कारों में भोजन और पानी लेकर कांवड़ मार्ग पर घूमते हुए सेवा करते दिखाई देते हैं।
पैरों में छाले, थकान और चोट का इलाज : कई दिनों तक पैदल चलने के कारण कांवड़ियों को पैरों में छाले, दर्द और थकान जैसी परेशानियां हो रही हैं। इसे देखते हुए कई शिविरों में चिकित्सा व्यवस्था की गई है। कुछ स्थानों पर डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद हैं, जबकि शिवभक्तों ने चलती-फिरती डिस्पेंसरियां भी शुरू की हैं। मोबाइल चिकित्सा केंद्रों के जरिये कांवड़ मार्ग पर ही प्राथमिक जांच और उपचार किया जा रहा है।
रात होते ही भजनों से गूंजते शिविर : दिनभर भोजन और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले शिविर शाम होते ही भक्ति के केंद्र में बदल जाते हैं। लाउडस्पीकर पर भगवान शिव के भजन शुरू हो जाते हैं। कई शिविरों में रात को भजन मंडलियों और स्थानीय गायकों की प्रस्तुतियां होती हैं। दिनभर पैदल चलने वाले कांवड़िये कुछ समय शिविर में बैठकर भजन सुनते हैं, फिर आराम करते हैं और सुबह दोबारा यात्रा शुरू कर देते हैं।
चौराहों पर पुलिस, यातायात पर नजर : कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के बीच शाहदरा, जीटी रोड, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और अन्य प्रमुख चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है। कांवड़ियों के समूह के सड़क पार करने के दौरान पुलिस कुछ समय के लिए दोनों ओर का यातायात रोकती है और उन्हें सुरक्षित तरीके से सड़क पार कराती है। कांवड़ियों और वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग रखने और दुर्घटना रोकने के लिए पुलिसकर्मी लगातार निगरानी करते दिखाई दे रहे हैं।