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श्रद्धा वाल्कर हत्याकांड: मुकदमे की समय सीमा तय करने की मांग खारिज
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल कोर्ट रोजाना सुनवाई कर रहा, अतिरिक्त निर्देशों की आवश्यकता नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने श्रद्धा वाल्कर हत्याकांड में आरोपी आफताब पूनावाला के खिलाफ चल रहे मुकदमे के लिए समय-सीमा तय करने की मांग वाली याचिका बुधवार को खारिज कर दी। श्रद्धा के भाई ने याचिका दायर कर अदालत से अनुरोध किया था कि मामले की सुनवाई तय अवधि में पूरी कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट पहले से ही मामले की रोजाना सुनवाई कर रहा है और मुकदमा शीघ्र पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि कुल 222 गवाहों में से 157 के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अब केवल छह गवाहों की परीक्षा शेष है, जिनमें गूगल और बम्बल से जुड़े चार विदेशी डाटा गवाह भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई दैनिक आधार पर जारी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि परिवार श्रद्धा का अंतिम संस्कार पूर्ण नहीं कर पा रहा है, क्योंकि उसके अवशेष अभी जांच एजेंसी और ट्रायल कोर्ट के कब्जे में हैं। उनका कहना था कि मौजूदा गति से मुकदमा पूरा होने में कई वर्ष लग सकते हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को संतोषजनक मानते हुए याचिका खारिज कर दी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने श्रद्धा वाल्कर हत्याकांड में आरोपी आफताब पूनावाला के खिलाफ चल रहे मुकदमे के लिए समय-सीमा तय करने की मांग वाली याचिका बुधवार को खारिज कर दी। श्रद्धा के भाई ने याचिका दायर कर अदालत से अनुरोध किया था कि मामले की सुनवाई तय अवधि में पूरी कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट पहले से ही मामले की रोजाना सुनवाई कर रहा है और मुकदमा शीघ्र पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि कुल 222 गवाहों में से 157 के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अब केवल छह गवाहों की परीक्षा शेष है, जिनमें गूगल और बम्बल से जुड़े चार विदेशी डाटा गवाह भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई दैनिक आधार पर जारी है।
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याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि परिवार श्रद्धा का अंतिम संस्कार पूर्ण नहीं कर पा रहा है, क्योंकि उसके अवशेष अभी जांच एजेंसी और ट्रायल कोर्ट के कब्जे में हैं। उनका कहना था कि मौजूदा गति से मुकदमा पूरा होने में कई वर्ष लग सकते हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को संतोषजनक मानते हुए याचिका खारिज कर दी।
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