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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Sleeping on the footpath is a compulsion, not negligence: High Court

फुटपाथ पर सोना मजबूरी, लापरवाही नहीं: हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 06:35 PM IST
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मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का 50 प्रतिशत मुआवजा कटौती का आदेश रद्द, कहा- बेघर लोगों की विवशता को दोष नहीं ठहराया जा सकता
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि फुटपाथ पर सोना किसी व्यक्ति की ‘सहयोगी लापरवाही’ नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि देश में बड़ी संख्या में लोग बेघर हैं या ऐसी परिस्थितियों में जीवन यापन करते हैं, जहां उनके पास रात बिताने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं होता। ऐसे में यदि कोई वाहन फुटपाथ पर चढ़कर उन्हें कुचल देता है, तो इसके लिए पीड़ितों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने 8 जुलाई को दिए फैसले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दो मृतकों के परिजनों और दो घायलों के मुआवजे में 50 प्रतिशत की कटौती ‘सहयोगी लापरवाही’ के आधार पर की गई थी। हाईकोर्ट ने इस कटौती को अनुचित और कानूनी रूप से अस्थिर बताते हुए पूरी मुआवजा राशि बहाल कर दी। साथ ही बीमा कंपनी को छह सप्ताह के भीतर संबंधित लाभार्थियों को भुगतान करने का निर्देश दिया।
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मामला अक्तूबर 2015 का है। तड़के करीब 4:30 बजे मादीपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे फुटपाथ पर सो रहे चार लोगों को तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया था। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। अदालत ने कहा कि फुटपाथ का उपयोग भले ही सोने के लिए निर्धारित न हो, लेकिन यह पैदल यात्रियों का सुरक्षित क्षेत्र है और वहां वाहन चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि कोई व्यक्ति यह अनुमान लगाए कि कोई वाहन फुटपाथ पर चढ़ आएगा। अदालत ने यह भी कहा कि वाहन चालकों की जिम्मेदारी है कि वे पैदल क्षेत्रों के पास अतिरिक्त सतर्कता बरतें। हाईकोर्ट ने दो मृतकों के परिजन को लगभग 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। वहीं, दो घायलों को क्रमशः 1,20,005 रुपये और 18,10,569 रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए
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हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
यह देश की वास्तविकता है कि कई लोग बेघर हैं, रात भर काम करते हैं या निर्माण स्थलों पर मजदूरी करते हैं और उनके पास सोने की जगह नहीं होती। ऐसे लोगों के लिए फुटपाथ अपेक्षाकृत सुरक्षित विश्राम स्थल बन जाता है, क्योंकि वे यह उम्मीद नहीं करते कि वाहन फुटपाथ पर चढ़कर उन्हें कुचल देगा। भले ही उन्होंने फुटपाथ पर सोने का जोखिम उठाया हो, इसे सहयोगी लापरवाही नहीं माना जा सकता।
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