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Delhi NCR News: गैस की किल्लत से जूझ रहे छोटे कारोबारी, इंडक्शन बनी संजीवनी
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-ढाबों पर ताले की नौबत, महंगा हुआ आम लोगों का खाना
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
राजधानी में एलपीजी गैस की कमी का असर छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में छोटे ढाबे, होटल और रेहड़ी-पटरी पर खाने के स्टॉल या तो बंद हैं या बंद होने की कगार पर हैं। लक्ष्मी नगर, संगम विहार, द्वारका मोड़, आजादपुर, करोल बाग और दिलशाद गार्डन समेत कई इलाकों में पहले जहां रौनक रहती थी, वहां अब कई जगह चूल्हे ठंडे नजर आ रहे हैं। आरके पुरम सेक्टर 1 में पिछले कई साल से खाने-पीने का स्टॉल चला रहे किशन ने बताया कि पहले उनके यहां रोजाना 2 से 3 कामर्शियल गैस सिलिंडर खर्च होते थे, लेकिन अब समय पर सप्लाई नहीं मिल रही है, जिस कारण उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी है।
इंडक्शन पर काम चलाने की मजबूरी : संगम विहार में चाय और नाश्ते की दुकान चलाने वाले भरत ने बताया कि गैस नहीं मिलने के कारण उन्हें इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे काम तो चल रहा है, लेकिन दिक्कतें भी कम नहीं हैं। इंडक्शन पर खाना बनाने में ज्यादा समय लगता है और बड़े बर्तनों में खाना बनाना आसान नहीं होता। ऐसे में ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है और काम प्रभावित होता है। वहीं, मुनिरका स्थित ढाबा संचालक राकेश ने बताया कि गैस चूल्हे पर एक साथ कई बर्नर जलाकर जल्दी खाना बनाया जा सकता है, जबकि इंडक्शन में यह संभव नहीं है। भीड़ के समय यह समस्या और बढ़ जाती है।
बढ़ता बिजली बिल बना नई परेशानी : गैस की कमी के कारण इंडक्शन का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे बिजली का खर्च भी बढ़ गया है। छोटे कारोबारियों के अनुसार, पहले ही कम मुनाफे में काम चलता है, ऐसे में बढ़ता बिल नई मुश्किल खड़ी कर रहा है। कारोबारी भरत ने बताया कि गैस के मुकाबले इंडक्शन पर खाना बनाना महंगा पड़ रहा है। छोटे ढाबों और होटलों की कमाई सीमित होती है। अगर खर्च बढ़ेगा तो कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। गैस की नियमित सप्लाई जरूरी है, वरना आने वाले समय में कई छोटे कारोबार बंद हो सकते हैं।
ग्राहकों की जेब पर भी असर : गैस संकट का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। मयूर विहार में नौकरी करने वाले अजय ने बताया कि वह बाहर खाना खाते हैं। अगर ढाबे बंद हुए तो उन्हें महंगे रेस्टोरेंट का सहारा लेना पड़ेगा या खुद खाना बनाना होगा। वहीं, टैक्सी चालक राजू का कहना है कि आसपास के ढाबों में खाने के दाम पहले से बढ़ गए हैं। जहां पहले 70-80 रुपये में खाना मिल जाता था, अब 100-120 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। गैस की कमी अगर जल्द दूर नहीं हुई तो छोटे कारोबारियों के साथ-साथ आम लोगों की परेशानी भी और बढ़ सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
राजधानी में एलपीजी गैस की कमी का असर छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। कई इलाकों में छोटे ढाबे, होटल और रेहड़ी-पटरी पर खाने के स्टॉल या तो बंद हैं या बंद होने की कगार पर हैं। लक्ष्मी नगर, संगम विहार, द्वारका मोड़, आजादपुर, करोल बाग और दिलशाद गार्डन समेत कई इलाकों में पहले जहां रौनक रहती थी, वहां अब कई जगह चूल्हे ठंडे नजर आ रहे हैं। आरके पुरम सेक्टर 1 में पिछले कई साल से खाने-पीने का स्टॉल चला रहे किशन ने बताया कि पहले उनके यहां रोजाना 2 से 3 कामर्शियल गैस सिलिंडर खर्च होते थे, लेकिन अब समय पर सप्लाई नहीं मिल रही है, जिस कारण उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी है।
इंडक्शन पर काम चलाने की मजबूरी : संगम विहार में चाय और नाश्ते की दुकान चलाने वाले भरत ने बताया कि गैस नहीं मिलने के कारण उन्हें इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे काम तो चल रहा है, लेकिन दिक्कतें भी कम नहीं हैं। इंडक्शन पर खाना बनाने में ज्यादा समय लगता है और बड़े बर्तनों में खाना बनाना आसान नहीं होता। ऐसे में ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है और काम प्रभावित होता है। वहीं, मुनिरका स्थित ढाबा संचालक राकेश ने बताया कि गैस चूल्हे पर एक साथ कई बर्नर जलाकर जल्दी खाना बनाया जा सकता है, जबकि इंडक्शन में यह संभव नहीं है। भीड़ के समय यह समस्या और बढ़ जाती है।
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बढ़ता बिजली बिल बना नई परेशानी : गैस की कमी के कारण इंडक्शन का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे बिजली का खर्च भी बढ़ गया है। छोटे कारोबारियों के अनुसार, पहले ही कम मुनाफे में काम चलता है, ऐसे में बढ़ता बिल नई मुश्किल खड़ी कर रहा है। कारोबारी भरत ने बताया कि गैस के मुकाबले इंडक्शन पर खाना बनाना महंगा पड़ रहा है। छोटे ढाबों और होटलों की कमाई सीमित होती है। अगर खर्च बढ़ेगा तो कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। गैस की नियमित सप्लाई जरूरी है, वरना आने वाले समय में कई छोटे कारोबार बंद हो सकते हैं।
ग्राहकों की जेब पर भी असर : गैस संकट का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। मयूर विहार में नौकरी करने वाले अजय ने बताया कि वह बाहर खाना खाते हैं। अगर ढाबे बंद हुए तो उन्हें महंगे रेस्टोरेंट का सहारा लेना पड़ेगा या खुद खाना बनाना होगा। वहीं, टैक्सी चालक राजू का कहना है कि आसपास के ढाबों में खाने के दाम पहले से बढ़ गए हैं। जहां पहले 70-80 रुपये में खाना मिल जाता था, अब 100-120 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। गैस की कमी अगर जल्द दूर नहीं हुई तो छोटे कारोबारियों के साथ-साथ आम लोगों की परेशानी भी और बढ़ सकती है।