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Delhi NCR News: स्थायी समिति की बैठक आज फिर, 72 घंटे के नोटिस पर विवाद गहराया, टकराव के आसार
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
एमसीडी की स्थायी समिति की बैठक मंगलवार को फिर होने जा रही है, लेकिन बैठक से पहले ही प्रक्रिया और नियमों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एमसीडी अधिकारियों ने समिति के नौ सदस्यों के अब तक सेवानिवृत्त न होने को संभावित संवैधानिक संकट बताते हुए बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा की स्वीकृति के बाद बैठक का नोटिस जारी किया है। बैठक का मुख्य एजेंडा नौ सदस्यों को सेवानिवृत्त करने के लिए ड्रा (लॉटरी) निकालना है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया को एजेंडे में औपचारिक प्रस्ताव के रूप में शामिल किया गया है। दरअसल 31 मार्च तक इन सदस्यों को सेवानिवृत करना जरूरी है। हालांकि, मंगलवार को बैठक बुलाने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आप पार्षद प्रवीन कुमार के अनुसार, एमसीडी नियमों के तहत किसी भी बैठक के लिए कम से कम 72 घंटे पहले नोटिस जारी करना अनिवार्य है। लेकिन इस बार यह शर्त पूरी नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और पार्षदों के निर्देश पर अधिकारियों ने इस तकनीकी बाधा से बचने के लिए सोमवार की बैठक को मंगलवार तक स्थगित घोषित कर दिया। जबकि समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने सोमवार को बैठक की कार्यवाही अगली बैठक तक स्थगित की थी, न कि अगले ही दिन के लिए। ऐसे में नियमों के तहत नई बैठक बुलाने के लिए फिर से 72 घंटे पहले नोटिस देना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में फेरबदल कर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।
प्रवीन कुमार व उसके साथी पार्षद इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। सोमवार की बैठक में भी उन्होंने जमकर हंगामा किया था और बैठक की पिछली कार्यवाही (मिनट्स) उपलब्ध कराने की मांग पर अड़े रहे थे। अब मंगलवार की बैठक में भी वह इसी मुद्दे को उठाने और 72 घंटे के नोटिस नियम के उल्लंघन का कड़ा विरोध करने की तैयारी में जुटे हैं।
प्रवीन कुमार ने कहा कि जब सोमवार की बैठक को विधिवत स्थगित किया गया था, तो उसके निर्णय में बदलाव कर अगले ही दिन बैठक बुलाना किस नियम के तहत संभव है। इसके साथ ही वे इस पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक मानकों के खिलाफ बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग करेंगे। कुल मिलाकर, स्थायी समिति की यह बैठक केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह अब सियासी शक्ति परीक्षण का मंच बनती जा रही है।
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नई दिल्ली।
एमसीडी की स्थायी समिति की बैठक मंगलवार को फिर होने जा रही है, लेकिन बैठक से पहले ही प्रक्रिया और नियमों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। एमसीडी अधिकारियों ने समिति के नौ सदस्यों के अब तक सेवानिवृत्त न होने को संभावित संवैधानिक संकट बताते हुए बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा की स्वीकृति के बाद बैठक का नोटिस जारी किया है। बैठक का मुख्य एजेंडा नौ सदस्यों को सेवानिवृत्त करने के लिए ड्रा (लॉटरी) निकालना है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया को एजेंडे में औपचारिक प्रस्ताव के रूप में शामिल किया गया है। दरअसल 31 मार्च तक इन सदस्यों को सेवानिवृत करना जरूरी है। हालांकि, मंगलवार को बैठक बुलाने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आप पार्षद प्रवीन कुमार के अनुसार, एमसीडी नियमों के तहत किसी भी बैठक के लिए कम से कम 72 घंटे पहले नोटिस जारी करना अनिवार्य है। लेकिन इस बार यह शर्त पूरी नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और पार्षदों के निर्देश पर अधिकारियों ने इस तकनीकी बाधा से बचने के लिए सोमवार की बैठक को मंगलवार तक स्थगित घोषित कर दिया। जबकि समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने सोमवार को बैठक की कार्यवाही अगली बैठक तक स्थगित की थी, न कि अगले ही दिन के लिए। ऐसे में नियमों के तहत नई बैठक बुलाने के लिए फिर से 72 घंटे पहले नोटिस देना जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में फेरबदल कर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।
प्रवीन कुमार व उसके साथी पार्षद इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। सोमवार की बैठक में भी उन्होंने जमकर हंगामा किया था और बैठक की पिछली कार्यवाही (मिनट्स) उपलब्ध कराने की मांग पर अड़े रहे थे। अब मंगलवार की बैठक में भी वह इसी मुद्दे को उठाने और 72 घंटे के नोटिस नियम के उल्लंघन का कड़ा विरोध करने की तैयारी में जुटे हैं।
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प्रवीन कुमार ने कहा कि जब सोमवार की बैठक को विधिवत स्थगित किया गया था, तो उसके निर्णय में बदलाव कर अगले ही दिन बैठक बुलाना किस नियम के तहत संभव है। इसके साथ ही वे इस पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक मानकों के खिलाफ बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग करेंगे। कुल मिलाकर, स्थायी समिति की यह बैठक केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह अब सियासी शक्ति परीक्षण का मंच बनती जा रही है।