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Delhi NCR News: जिला अदालत पर एआई टूल से फैसला लिखने का दावा, हाईकोर्ट करेगा जांच
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अजब-गजब:
- दिल्ली हाईकोर्ट ने जिला अदालत के फैसले में एआई के इस्तेमाल के दावे पर जताई चिंता
- अकासा एयर के मामले में फैसला पर लगाई रोक, 20 लाख जमा करने का निर्देश
गौरव बाजपेई
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने अकासा एयर के उस गंभीर दावे पर संज्ञान लिया है, जिसमें कहा गया कि जिला अदालत का फैसला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई टूल का उपयोग करके तैयार किया गया है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने 30 अप्रैल को अंतरिम आदेश जारी करते हुए जिला अदालत के 24 फरवरी 2026 के फैसले पर रोक लगाई है। अदालत ने कहा कि फैसले की ड्राफ्टिंग शैली और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में गैर-मौजूद कानूनी प्रस्तावों का हवाला दिए जाने से प्रथम दृष्टया एआई सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का संकेत मिलता है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि कुछ एआई सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है। हालांकि, इस चरण में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आगे जांच के बाद ही पता चलेगा कि जिला न्यायाधीश द्वारा एआई का इस्तेमाल हुआ या नहीं और यदि हुआ तो क्या फैसले की समुचित समीक्षा की गई या नहीं।
यह है मामला : एबीएस टूर एंड ट्रैवल्स ने अकासा एयर के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। यात्री ने दिसंबर 2023-जनवरी 2024 के त्योहारी सीजन में दिल्ली-गोवा रूट पर 640 सीटें बुक की थीं। बाद में अकासा एयर ने बुकिंग रद्द कर दी। जिला अदालत (कॉमर्शियल) ने ट्रैवल एजेंट के पक्ष में फैसला देते हुए अकासा एयर को एक करोड़ आठ लाख अस्सी हजार रुपये चुकाने का आदेश दिया था। अकासा एयर ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर कहा कि पूरा फैसला एआई से तैयार किया गया प्रतीत होता है। इसके अलावा, टिकटों की पूरी राशि को लॉस ऑफ प्रॉफिट के रूप में देने का जिला अदालत का फैसला भी कानूनी रूप से गलत है। हाईकोर्ट ने अपील पर नोटिस जारी किया और फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने अकासा एयर को 30 मई 2026 तक 20 लाख जमा करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी।
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गौरव बाजपेई
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने अकासा एयर के उस गंभीर दावे पर संज्ञान लिया है, जिसमें कहा गया कि जिला अदालत का फैसला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई टूल का उपयोग करके तैयार किया गया है। न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने 30 अप्रैल को अंतरिम आदेश जारी करते हुए जिला अदालत के 24 फरवरी 2026 के फैसले पर रोक लगाई है। अदालत ने कहा कि फैसले की ड्राफ्टिंग शैली और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में गैर-मौजूद कानूनी प्रस्तावों का हवाला दिए जाने से प्रथम दृष्टया एआई सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का संकेत मिलता है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि कुछ एआई सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है। हालांकि, इस चरण में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। आगे जांच के बाद ही पता चलेगा कि जिला न्यायाधीश द्वारा एआई का इस्तेमाल हुआ या नहीं और यदि हुआ तो क्या फैसले की समुचित समीक्षा की गई या नहीं।
यह है मामला : एबीएस टूर एंड ट्रैवल्स ने अकासा एयर के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। यात्री ने दिसंबर 2023-जनवरी 2024 के त्योहारी सीजन में दिल्ली-गोवा रूट पर 640 सीटें बुक की थीं। बाद में अकासा एयर ने बुकिंग रद्द कर दी। जिला अदालत (कॉमर्शियल) ने ट्रैवल एजेंट के पक्ष में फैसला देते हुए अकासा एयर को एक करोड़ आठ लाख अस्सी हजार रुपये चुकाने का आदेश दिया था। अकासा एयर ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर कहा कि पूरा फैसला एआई से तैयार किया गया प्रतीत होता है। इसके अलावा, टिकटों की पूरी राशि को लॉस ऑफ प्रॉफिट के रूप में देने का जिला अदालत का फैसला भी कानूनी रूप से गलत है। हाईकोर्ट ने अपील पर नोटिस जारी किया और फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने अकासा एयर को 30 मई 2026 तक 20 लाख जमा करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी।
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