दिल्ली में नया ट्रैफिक नियम: चालान नहीं भरा तो गाड़ी भी रुकेगी, काम भी; लाइसेंस पर सबसे बड़ा खतरा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि अब चालान से बचना मुश्किल होगा और तय समय में उसका भुगतान या चुनौती देना जरूरी होगा। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी। अब चालान निपटाने की प्रक्रिया तय समय में पूरी करनी होगी, वरना लोगों को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
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राजधानी में ट्रैफिक नियम तोड़ना अब महंगा ही नहीं, जोखिम भरा साबित होगा। सरकार की नई सख्त व्यवस्था के तहत चालान का निपटारा 45 दिन में करना अनिवार्य होगा, वरना न सिर्फ अतिरिक्त कार्रवाई झेलनी पड़ेगी, बल्कि वाहन और लाइसेंस से जुड़े काम भी रुक सकते हैं। बार-बार नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस सस्पेंड करने की नई व्यवस्था की गई है, जबकि कोर्ट जाने से पहले चालान का आधा पैसा जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।
पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि अब चालान से बचना मुश्किल होगा और तय समय में उसका भुगतान या चुनौती देना जरूरी होगा। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी। अब चालान निपटाने की प्रक्रिया तय समय में पूरी करनी होगी, वरना लोगों को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। सरकार का मकसद सड़कों पर अनुशासन लाना और दुर्घटनाओं को कम करना है।
अब ट्रैफिक चालान से बचना आसान नहीं
चालान जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति के पास 45 दिन का समय होगा। इस दौरान वह या तो चालान भर सकता है या फिर ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सबूतों के साथ उसे चुनौती दे सकता है। अगर कोई व्यक्ति इस समय सीमा में कुछ नहीं करता, तो चालान अपने आप स्वीकार माना जाएगा। इसके बाद अगले 30 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। सरकार ने नियमों को और सख्त बनाते हुए यह भी तय किया है कि अगर किसी की शिकायत खारिज हो जाती है, तो उसके पास दो ही विकल्प होंगे, या तो 30 दिन में चालान भर दे या फिर चालान राशि का 50 फीसदी जमा कर कोर्ट जाए। अगर वह ये भी नहीं करता, तो चालान मान्य मान लिया जाएगा और 15 दिन के भीतर भुगतान करना होगा।
बार-बार नियम तोड़ने वालों पर खास नजर
मुख्यमंत्री ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति एक साल में पांच या उससे ज्यादा बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस को सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। चालान जारी करने की प्रक्रिया को भी पूरी तरह आधुनिक बनाया जा रहा है। अब पुलिस अधिकारी चालान को फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक दोनों तरीके से जारी कर सकेंगे। इसके अलावा कैमरों और डिजिटल सिस्टम के जरिए अपने आप चालान जनरेट होंगे। जिन लोगों का मोबाइल नंबर दर्ज होगा, उन्हें तीन दिन के भीतर ऑनलाइन चालान की सूचना मिल जाएगी, जबकि फिजिकल नोटिस 15 दिन में पहुंच जाएगा।
मोबाइल नंबर और पता अपडेट रखें
सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी में मोबाइल नंबर और पता अपडेट रखें, ताकि उन्हें समय पर जानकारी मिल सके। सभी चालानों का रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगा, जिससे कोई गड़बड़ी नहीं होगी। नई व्यवस्था में शिकायत निवारण अधिकारी की भूमिका भी अहम होगी। अगर कोई व्यक्ति चालान को चुनौती देता है, तो अधिकारी को 30 दिन के भीतर पोर्टल पर फैसला अपलोड करना होगा।
समयसीमा के लिए सख्त प्रावधान
अगर चालान का भुगतान नहीं किया जाता, तो वाहन से जुड़े कई काम रोक दिए जाएंगे। इसमें टैक्स जमा करना, लाइसेंस या वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़े काम शामिल हैं। साथ ही वाहन को पोर्टल पर नॉट टू बी ट्रांजैक्टेड के रूप में चिन्हित कर दिया जाएगा, यानी जब तक चालान नहीं भरा जाएगा, उससे जुड़ा कोई काम नहीं हो सकेगा। जरूरत पड़ने पर पुलिस या अधिकृत अधिकारी कोर्ट के आदेश के तहत वाहन जब्त भी कर सकते हैं। अब सभी चालान वाहन के रजिस्टर्ड मालिक के नाम पर ही जारी होंगे और इसकी जानकारी एसएमएस, ईमेल या अन्य माध्यमों से दी जाएगी।
