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Delhi NCR News: मदरसे स्थित जहरीले गैस के गड्ढे में गिरने से शिक्षक एवं 16 वर्षीय छात्र की मौत
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संवाद न्यूज एजेसी
हथीन। अंधरोला गांव के सरकारी स्कूल के समीप बने इस्लाम मदरसे मिफ्ताहुल उलूम अशरफिया में बने पानी के गहरे गड्ढे में जहरीली गैस बनने से गढ्ढे को साफ करने की प्रक्रिया में लगे मदरसे के शिक्षक एवं 16 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। मदरसा प्रबंधन एवं अभिभावकों ने इसकी शिकायत न करके दोनों मृतकों की लाशों को दफना दिया। जानकारी के अनुसार संबंधित इस्लामी मदरसा में स्नानघर के पानी को एकत्रित करने के लिए गड़्ढा बनाया हुआ है। यह गड़्ढा पानी से भर गया था। गहरे गड्ढे से पानी निकालने के लिए मदरसे के छात्र लगे हुए थे। इस बीच हुचपुरी निवासी छात्र हाफिज मोहम्मद सारिफ पानी निकालने की प्रक्रिया के दौरान गढ्ढे में गिर गया। गड्ढे में जहरीली गैस बनी हुई थी। छात्र गड्ढे से बाहर नही निकल पाया । इसके बाद मदरसे के शिक्षक मौलाना आबिद ने छात्र को निकालने का प्रयास किया। वे स्वयं भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। यह सूचना ग्रामीणों तक पहुंची तो भारी संख्या में एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने दोनों को निकाला। दोनों को उपमंडल के एक अस्पताल में लाया गया। जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद आसपास रहने वाले लोगों एवं संबंधित मदरसा संचालक एवं अन्य मदरसा संचालकों की बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि दोनों की लाशों को दफना दिया जाए। इसके बाद शिक्षक मौलाना आबिद की लाश को उनके पैतृक गांव मालपुरी में दफना दिया गया। इसी प्रकार मदरसा के छात्र हाफिज मोहम्मद सारिफ को भी उसके पैतृक गांव हुचपुरी के कब्रिस्तान में दफना दिया गया। मदरसा प्रबंधन और गांव वालों ने इसकी सूचना पुलिस एवं प्रशासनिक अमले को नहीं दी है। संबंधित मदरसा के संचालक एवं गांव वाले भी इस बारे में बोलने को तैयार नहीं है। संबंधित मदरसे का संचालन उटावड निवासी एक मौलाना पिछले आठ वर्षों से कर रहे हैं। मदरसा संबंधित विभाग से रजिस्टर्ड है अथवा नहीं। इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। ग्रामीणों में दोनों मौतों को लेकर दुख है। परंतु वे कोई कार्यवाही नहीं चाहते हैं। अंधरोला गांव के पूर्व सरपंच कासम का कहना है कि इस बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। मदरसा संचालन कमेटी ही इस बारे में जानकारी दे सकती है।हथीन थाना प्रभारी नरेश कुमार का कहना है कि उनके पास इस संबंध में कोई सूचना अथवा शिकायत नहीं आई है। हथीन के एसडीएम हरिराम से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था इस बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में वे राजस्व विभाग के माध्यम से जानकारी लेंगें। वहीं कृषि खंड तकनीकी अधिकारी रामदेव ने बताया कि कि जो कुएं बंद पड़े होते हैं तो उनमें मिथेन गैस बन जाती है, जो जहरीली होती है। सबसे पहले हरे पेड़ की टहनी को कुएं में डालें, यदि टहनी की पत्तियां मुरझा जाएं तो समझें कि उसमें जहरीली गैस होगी। इसके साथ ही लालटेन या कोई चीज जलाकर अंदर रस्सी से डालें, यदि वह बुझ जाए तो भी समझ जाएं कि गैस जहरीली है।
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हथीन। अंधरोला गांव के सरकारी स्कूल के समीप बने इस्लाम मदरसे मिफ्ताहुल उलूम अशरफिया में बने पानी के गहरे गड्ढे में जहरीली गैस बनने से गढ्ढे को साफ करने की प्रक्रिया में लगे मदरसे के शिक्षक एवं 16 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। मदरसा प्रबंधन एवं अभिभावकों ने इसकी शिकायत न करके दोनों मृतकों की लाशों को दफना दिया। जानकारी के अनुसार संबंधित इस्लामी मदरसा में स्नानघर के पानी को एकत्रित करने के लिए गड़्ढा बनाया हुआ है। यह गड़्ढा पानी से भर गया था। गहरे गड्ढे से पानी निकालने के लिए मदरसे के छात्र लगे हुए थे। इस बीच हुचपुरी निवासी छात्र हाफिज मोहम्मद सारिफ पानी निकालने की प्रक्रिया के दौरान गढ्ढे में गिर गया। गड्ढे में जहरीली गैस बनी हुई थी। छात्र गड्ढे से बाहर नही निकल पाया । इसके बाद मदरसे के शिक्षक मौलाना आबिद ने छात्र को निकालने का प्रयास किया। वे स्वयं भी जहरीली गैस की चपेट में आ गए। यह सूचना ग्रामीणों तक पहुंची तो भारी संख्या में एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने दोनों को निकाला। दोनों को उपमंडल के एक अस्पताल में लाया गया। जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद आसपास रहने वाले लोगों एवं संबंधित मदरसा संचालक एवं अन्य मदरसा संचालकों की बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि दोनों की लाशों को दफना दिया जाए। इसके बाद शिक्षक मौलाना आबिद की लाश को उनके पैतृक गांव मालपुरी में दफना दिया गया। इसी प्रकार मदरसा के छात्र हाफिज मोहम्मद सारिफ को भी उसके पैतृक गांव हुचपुरी के कब्रिस्तान में दफना दिया गया। मदरसा प्रबंधन और गांव वालों ने इसकी सूचना पुलिस एवं प्रशासनिक अमले को नहीं दी है। संबंधित मदरसा के संचालक एवं गांव वाले भी इस बारे में बोलने को तैयार नहीं है। संबंधित मदरसे का संचालन उटावड निवासी एक मौलाना पिछले आठ वर्षों से कर रहे हैं। मदरसा संबंधित विभाग से रजिस्टर्ड है अथवा नहीं। इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। ग्रामीणों में दोनों मौतों को लेकर दुख है। परंतु वे कोई कार्यवाही नहीं चाहते हैं। अंधरोला गांव के पूर्व सरपंच कासम का कहना है कि इस बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। मदरसा संचालन कमेटी ही इस बारे में जानकारी दे सकती है।हथीन थाना प्रभारी नरेश कुमार का कहना है कि उनके पास इस संबंध में कोई सूचना अथवा शिकायत नहीं आई है। हथीन के एसडीएम हरिराम से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था इस बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में वे राजस्व विभाग के माध्यम से जानकारी लेंगें। वहीं कृषि खंड तकनीकी अधिकारी रामदेव ने बताया कि कि जो कुएं बंद पड़े होते हैं तो उनमें मिथेन गैस बन जाती है, जो जहरीली होती है। सबसे पहले हरे पेड़ की टहनी को कुएं में डालें, यदि टहनी की पत्तियां मुरझा जाएं तो समझें कि उसमें जहरीली गैस होगी। इसके साथ ही लालटेन या कोई चीज जलाकर अंदर रस्सी से डालें, यदि वह बुझ जाए तो भी समझ जाएं कि गैस जहरीली है।