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Delhi NCR News: फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई को लेकर केंद्र, दिल्ली सरकार और यूजीसी से मांगा जवाब
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संस्थानों द्वारा छात्रों को धोखा देकर अवैध डिग्रियां बांटने के गंभीर मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट गंभीर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने फर्जी विश्वविद्यालयों और संस्थानों द्वारा छात्रों को धोखा देकर अवैध डिग्रियां बांटने के गंभीर मुद्दे पर बुधवार को केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से विस्तृत जवाब मांगा है। मुख्य न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मुद्दा बताते हुए सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे हलफनामे दाखिल कर बताएं कि फर्जी उच्च शिक्षा संस्थानों पर रोक लगाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
कोर्ट ने कहा, छात्र इन फर्जी संस्थानों की ओर आकर्षित होते हैं। यदि वे इनमें दाखिला लेकर पढ़ाई करते हैं तो उनका समय, ऊर्जा और संसाधन व्यर्थ चला जाता है तथा अंत में उन्हें ऐसी डिग्री मिलती है जो रोजगार के लिए मान्य नहीं होती। खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का ध्यान इस मुद्दे की ओर दिलाने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट ने यूजीसी, केंद्र और एआईसीटीई को अपने-अपने क्षेत्र में फर्जी संस्थानों पर की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा। वकील शशांक देव सुधी द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में सीबीआई जांच की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हजारों छात्रों ने ऐसे संस्थानों में दाखिला लेकर आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाया है। इन संस्थानों द्वारा गलत दावे करके मान्यता और संबद्धता का झांसा दिया जाता है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2026 के लिए तय की है।
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नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने फर्जी विश्वविद्यालयों और संस्थानों द्वारा छात्रों को धोखा देकर अवैध डिग्रियां बांटने के गंभीर मुद्दे पर बुधवार को केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से विस्तृत जवाब मांगा है। मुख्य न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मुद्दा बताते हुए सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे हलफनामे दाखिल कर बताएं कि फर्जी उच्च शिक्षा संस्थानों पर रोक लगाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
कोर्ट ने कहा, छात्र इन फर्जी संस्थानों की ओर आकर्षित होते हैं। यदि वे इनमें दाखिला लेकर पढ़ाई करते हैं तो उनका समय, ऊर्जा और संसाधन व्यर्थ चला जाता है तथा अंत में उन्हें ऐसी डिग्री मिलती है जो रोजगार के लिए मान्य नहीं होती। खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का ध्यान इस मुद्दे की ओर दिलाने और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। कोर्ट ने यूजीसी, केंद्र और एआईसीटीई को अपने-अपने क्षेत्र में फर्जी संस्थानों पर की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा। वकील शशांक देव सुधी द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) में सीबीआई जांच की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हजारों छात्रों ने ऐसे संस्थानों में दाखिला लेकर आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाया है। इन संस्थानों द्वारा गलत दावे करके मान्यता और संबद्धता का झांसा दिया जाता है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2026 के लिए तय की है।
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