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Delhi NCR News: नयन नवेली गैलरी में रिदम्स ऑफ ब्लैक एंड व्हाइट का रंगहीन संसार
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। रंगों से परे भी कला की अपनी एक दुनिया होती है। जहां रोशनी और छाया, रेखाएं और बनावट, मौन और भावनाएं मिलकर कहानी कहती हैं। इसी अनुभव को समेटे नयन नवेली गैलरी में इन दिनों ग्रुप आर्ट एग्जिबिशन रिदम्स ऑफ ब्लैक एंड व्हाइट दर्शकों का ध्यान खींच रही है। अमृता कोचर द्वारा क्यूरेट की गई इस प्रदर्शनी में 13 कलाकारों ने सीमित रंग-संरचना के जरिए भावनाओं, स्मृतियों, गहराई और गति को अभिव्यक्त किया है।
10 जुलाई को उद्घाटन हुआ, जिसमें मैते डेल्टेल, अंजोली इला मेनन व जतिन दास समेत कला-प्रेमियों ने भाग लिया। उद्घाटन में दो मिनट की लाइव इलस्ट्रेशन एक्टिविटी भी हुई, जिसमें दर्शकों को पहले एक मिनट आंखें बंद कर शांत रहने और फिर अगले मिनट मन में आई कल्पना को कागज पर उतारने के लिए प्रेरित किया गया। इस इंटरैक्टिव प्रयोग को खूब सराहा गया।
प्रदर्शनी में अंबरीश मिश्रा, छाया दुबे, इंदिरा इट्टी मेनन, जितेन साहू, कुमारी निधि, राखी कुमारी, रूपाली धवन, संगीता जिंदल, संजय टिक्कल, सारिका पूर्णानंद, स्नेहा, सोनम सिंह व केशरी नंदन की कृतियां शामिल हैं। यह प्रदर्शनी दिखाती है कि कला के लिए हमेशा रंगों की जरूरत नहीं, कभी सफेद की खामोशी और काले की गहराई भी भावनाओं के कई रंग बिखेरती है।
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नई दिल्ली। रंगों से परे भी कला की अपनी एक दुनिया होती है। जहां रोशनी और छाया, रेखाएं और बनावट, मौन और भावनाएं मिलकर कहानी कहती हैं। इसी अनुभव को समेटे नयन नवेली गैलरी में इन दिनों ग्रुप आर्ट एग्जिबिशन रिदम्स ऑफ ब्लैक एंड व्हाइट दर्शकों का ध्यान खींच रही है। अमृता कोचर द्वारा क्यूरेट की गई इस प्रदर्शनी में 13 कलाकारों ने सीमित रंग-संरचना के जरिए भावनाओं, स्मृतियों, गहराई और गति को अभिव्यक्त किया है।
10 जुलाई को उद्घाटन हुआ, जिसमें मैते डेल्टेल, अंजोली इला मेनन व जतिन दास समेत कला-प्रेमियों ने भाग लिया। उद्घाटन में दो मिनट की लाइव इलस्ट्रेशन एक्टिविटी भी हुई, जिसमें दर्शकों को पहले एक मिनट आंखें बंद कर शांत रहने और फिर अगले मिनट मन में आई कल्पना को कागज पर उतारने के लिए प्रेरित किया गया। इस इंटरैक्टिव प्रयोग को खूब सराहा गया।
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प्रदर्शनी में अंबरीश मिश्रा, छाया दुबे, इंदिरा इट्टी मेनन, जितेन साहू, कुमारी निधि, राखी कुमारी, रूपाली धवन, संगीता जिंदल, संजय टिक्कल, सारिका पूर्णानंद, स्नेहा, सोनम सिंह व केशरी नंदन की कृतियां शामिल हैं। यह प्रदर्शनी दिखाती है कि कला के लिए हमेशा रंगों की जरूरत नहीं, कभी सफेद की खामोशी और काले की गहराई भी भावनाओं के कई रंग बिखेरती है।
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