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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेलों में वकीलों के लिए सुविधाओं की जांच के निर्देश दिए
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-अदालत में जेल महानिदेशक को जेल परिसर में कैदियों से कानूनी मुलाकात के लिए आने वाले अधिवक्ताओं को उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की जांच के लिए निर्देशित किया है
- मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्यक्ष और न्यायमूर्ति तेजस करियर की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए उचित निर्णय लेने के लिए कहा है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे दिल्ली की जेल परिसरों में कैदियों से कानूनी मुलाकात के लिए आने वाले अधिवक्ताओं के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी शिकायतों की जांच करें। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने डीजी जेल से स्थिति का जायजा लेने और कानून के अनुसार उचित निर्णय लेने को कहा।
अदालत अधिवक्ता ऋषव कुमार द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में जेलों में कैदियों से कानूनी साक्षात्कार के लिए आने वाले वकीलों के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग की गई है। याचिका अधिवक्ता मोहम्मद सुजा फैसल और मोहम्मद कासिफ के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में अन्य बातों के साथ-साथ उचित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय, नामित कानूनी साक्षात्कार कक्ष, पार्किंग सुविधा और बड़े जेल परिसरों के अंदर आंतरिक परिवहन व्यवस्था की मांग की गई है।
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याचिका में कहा गया है कि अधिवक्ता अक्सर कैदियों से मुलाकात, वकालतनामा, शपथपत्र और अन्य कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने तथा जमानत आवेदनों, अपीलों और रिट याचिकाओं में सहायता के लिए जेल जाते हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि अपर्याप्त सुविधाओं और कभी-कभी बार-बार जाने की मजबूरी के कारण कानूनी सहायता देने में असुविधा और देरी होती है। याचिकाकर्ता ने वकालतनामा निष्पादित होने के बाद उसी दिन कानूनी साक्षात्कार की सुविधा देने का तंत्र भी मांगा है, बशर्ते सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं पूरी हों। बड़े जेल परिसरों में अधिवक्ताओं की आवाजाही के लिए बैटरी से चलने वाले वाहन या शटल सेवा की भी मांग की गई है।
याचिका दिल्ली जेल नियम, 2018 तथा संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि न्याय तक सार्थक पहुंच के लिए कैदियों और उनके अधिवक्ताओं के बीच समय पर और प्रभावी संवाद जरूरी है। याचिकाकर्ता ने जेल सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखते हुए जेल अधिकारियों द्वारा अधिवक्ताओं के साथ शिष्ट और पेशेवर व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की भी मांग की है।
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- मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्यक्ष और न्यायमूर्ति तेजस करियर की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए उचित निर्णय लेने के लिए कहा है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे दिल्ली की जेल परिसरों में कैदियों से कानूनी मुलाकात के लिए आने वाले अधिवक्ताओं के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी शिकायतों की जांच करें। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने डीजी जेल से स्थिति का जायजा लेने और कानून के अनुसार उचित निर्णय लेने को कहा।
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अदालत अधिवक्ता ऋषव कुमार द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में जेलों में कैदियों से कानूनी साक्षात्कार के लिए आने वाले वकीलों के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग की गई है। याचिका अधिवक्ता मोहम्मद सुजा फैसल और मोहम्मद कासिफ के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में अन्य बातों के साथ-साथ उचित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय, नामित कानूनी साक्षात्कार कक्ष, पार्किंग सुविधा और बड़े जेल परिसरों के अंदर आंतरिक परिवहन व्यवस्था की मांग की गई है।
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याचिका में कहा गया है कि अधिवक्ता अक्सर कैदियों से मुलाकात, वकालतनामा, शपथपत्र और अन्य कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने तथा जमानत आवेदनों, अपीलों और रिट याचिकाओं में सहायता के लिए जेल जाते हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि अपर्याप्त सुविधाओं और कभी-कभी बार-बार जाने की मजबूरी के कारण कानूनी सहायता देने में असुविधा और देरी होती है। याचिकाकर्ता ने वकालतनामा निष्पादित होने के बाद उसी दिन कानूनी साक्षात्कार की सुविधा देने का तंत्र भी मांगा है, बशर्ते सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएं पूरी हों। बड़े जेल परिसरों में अधिवक्ताओं की आवाजाही के लिए बैटरी से चलने वाले वाहन या शटल सेवा की भी मांग की गई है।
याचिका दिल्ली जेल नियम, 2018 तथा संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 पर आधारित है। इसमें कहा गया है कि न्याय तक सार्थक पहुंच के लिए कैदियों और उनके अधिवक्ताओं के बीच समय पर और प्रभावी संवाद जरूरी है। याचिकाकर्ता ने जेल सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखते हुए जेल अधिकारियों द्वारा अधिवक्ताओं के साथ शिष्ट और पेशेवर व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की भी मांग की है।