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Delhi NCR News: समय पर जांच, टीकाकरण और स्वस्थ जीवनशैली से बचाया जा सकता है लिवर
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-मंगलवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर हुआ कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर मंगलवार को एम्स, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच, टीकाकरण और स्वस्थ जीवनशैली से लिवर को बचाया जा सकता है।
इस वर्ष की थीम 'हेपेटाइटिस: आइए इसे खत्म करें' है। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, लिवर 500 से अधिक जरूरी कार्य करता है। हेपेटाइटिस लिवर में होने वाली सूजन को कहा जाता है। यह बीमारी वायरस, शराब का अधिक सेवन, कुछ दवाओं और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण हो सकती है।
पांच प्रमुख वायरस ए, बी, सी, डी और ई लिवर को प्रभावित करते हैं। ए और ई दूषित पानी-भोजन से फैलते हैं, जबकि बी और सी लंबे समय तक शरीर में रहकर लिवर सिरोसिस व कैंसर का कारण बन सकते हैं। शुरुआती लक्षणों में पीलिया, भूख कम लगना, मतली, उल्टी व कमजोरी शामिल हैं, लेकिन कई मामलों में लक्षण न दिखने से पता देर से चलता है।
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प्रो. शालिमार ने बताया कि भारत में करीब चार करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और 60 लाख से 1.2 करोड़ हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। सरकार के राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में जांच व इलाज उपलब्ध है। नवजात को जन्म पर लगने वाला हेपेटाइटिस-बी का टीका बचाव का प्रभावी तरीका है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर मंगलवार को एम्स, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि समय पर जांच, टीकाकरण और स्वस्थ जीवनशैली से लिवर को बचाया जा सकता है।
इस वर्ष की थीम 'हेपेटाइटिस: आइए इसे खत्म करें' है। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, लिवर 500 से अधिक जरूरी कार्य करता है। हेपेटाइटिस लिवर में होने वाली सूजन को कहा जाता है। यह बीमारी वायरस, शराब का अधिक सेवन, कुछ दवाओं और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण हो सकती है।
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पांच प्रमुख वायरस ए, बी, सी, डी और ई लिवर को प्रभावित करते हैं। ए और ई दूषित पानी-भोजन से फैलते हैं, जबकि बी और सी लंबे समय तक शरीर में रहकर लिवर सिरोसिस व कैंसर का कारण बन सकते हैं। शुरुआती लक्षणों में पीलिया, भूख कम लगना, मतली, उल्टी व कमजोरी शामिल हैं, लेकिन कई मामलों में लक्षण न दिखने से पता देर से चलता है।
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प्रो. शालिमार ने बताया कि भारत में करीब चार करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और 60 लाख से 1.2 करोड़ हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। सरकार के राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में जांच व इलाज उपलब्ध है। नवजात को जन्म पर लगने वाला हेपेटाइटिस-बी का टीका बचाव का प्रभावी तरीका है।