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Delhi NCR News: कनॉट प्लेस स्थित शिव मंदिर को प्राचीन आस्था और इतिहास के कारण खास महत्व
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कनॉट प्लेस के शनि मंदिर परिसर में स्थित शिव मंदिर अपनी प्राचीन आस्था और इतिहास के कारण खास महत्व रखता है। राजीव चौक और बाबा खड़क सिंह मार्ग के पास स्थित यह मंदिर परिसर भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त आराधना का प्रमुख केंद्र है। मंदिर-संबंधी विवरणों के अनुसार, शिव-शनि मंदिर की स्थापना 1877 में महाराजा सवाई राम सिंह से जोड़ी जाती है।
मंदिर परिसर में शिवलिंग के साथ गणेश, हनुमान और शनिदेव की भी पूजा होती है। सावन में यहां विशेष रूप से भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि शिव आराधना से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और शनिदेव की उपासना से कर्मों के अनुरूप न्याय का आशीर्वाद मिलता है।
इस मंदिर के पुजारी जितेंद्र कौशिक ने बताया कि मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित धार्मिक मान्यता इसे महाभारत काल और पांडवों की दिल्ली यात्रा से भी जोड़ती है। हालांकि पांडवों के इसी स्थान पर पूजा किए जाने के दावे का ठोस पुरातात्विक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था में यह कथा आज भी जीवित है। दिल्ली के प्राचीन मंदिरों को महाभारत काल से जोड़ने की परंपरा भी व्यापक रूप से मिलती है।
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कनॉट प्लेस की आधुनिक और व्यस्त दुनिया के बीच स्थित यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं को शहर के बीच आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। सावन में यहां हर सोमवार शिवभक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिलती है।
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नई दिल्ली। कनॉट प्लेस के शनि मंदिर परिसर में स्थित शिव मंदिर अपनी प्राचीन आस्था और इतिहास के कारण खास महत्व रखता है। राजीव चौक और बाबा खड़क सिंह मार्ग के पास स्थित यह मंदिर परिसर भगवान शिव और शनिदेव की संयुक्त आराधना का प्रमुख केंद्र है। मंदिर-संबंधी विवरणों के अनुसार, शिव-शनि मंदिर की स्थापना 1877 में महाराजा सवाई राम सिंह से जोड़ी जाती है।
मंदिर परिसर में शिवलिंग के साथ गणेश, हनुमान और शनिदेव की भी पूजा होती है। सावन में यहां विशेष रूप से भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि शिव आराधना से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और शनिदेव की उपासना से कर्मों के अनुरूप न्याय का आशीर्वाद मिलता है।
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इस मंदिर के पुजारी जितेंद्र कौशिक ने बताया कि मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित धार्मिक मान्यता इसे महाभारत काल और पांडवों की दिल्ली यात्रा से भी जोड़ती है। हालांकि पांडवों के इसी स्थान पर पूजा किए जाने के दावे का ठोस पुरातात्विक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था में यह कथा आज भी जीवित है। दिल्ली के प्राचीन मंदिरों को महाभारत काल से जोड़ने की परंपरा भी व्यापक रूप से मिलती है।
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कनॉट प्लेस की आधुनिक और व्यस्त दुनिया के बीच स्थित यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं को शहर के बीच आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। सावन में यहां हर सोमवार शिवभक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिलती है।