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Online Gaming: असंतुलित डोपामाइन लगाता है गेमिंग की लत, कम हो जाता है आवेग नियंत्रण; बढ़ता है खुदकुशी का खतरा

सिमरन, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 05 Feb 2026 03:56 AM IST
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सार

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑन लाइन गेमिंग की लत गंभीर मानसिक समस्याओं की वजह बन सकती है। इससे दिमाग में डोपामाइन असंतुलित हो जाता है। नतीजा असल जिंदगी से अलगाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। कुछ मामलों में यह युवा आत्महत्या के खतरनाक कदम तक भी ले जाते हैं।

Unbalanced dopamine contributes to gaming addiction and increases the risk of suicide.
ऑनलाइन गेम - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या की घटना झकझोर देने वाली है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑन लाइन गेमिंग की लत गंभीर मानसिक समस्याओं की वजह बन सकती है। इससे दिमाग में डोपामाइन असंतुलित हो जाता है। नतीजा असल जिंदगी से अलगाव, अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। कुछ मामलों में यह युवा आत्महत्या के खतरनाक कदम तक भी ले जाते हैं।

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विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार गेम खेलने से दिमाग के रिवार्ड सिस्टम में बदलाव आता है, जिससे आवेग नियंत्रण कम हो जाता है और युवा ज्यादा जोखिम लेने लगते हैं। मनोवैज्ञानिक डॉक्टरों के अनुसार, जिन युवाओं को गेमिंग की आदत ज्यादा होती है, उनमें आत्महत्या के विचार और व्यवहार 2-3 गुना अधिक होते हैं। उन्हें असल जिंदगी की हार या असफलता सहन करना मुश्किल लगता है, क्योंकि गेम में हमेशा दूसरा मौका मिलता है। उन्होंने बताया कि गेमिंग एडिक्शन से युवा सोशल आइसोलेशन      में चले जाते हैं। वे असल रिश्तों से दूर होकर वर्चुअल दुनिया में ही खुश रहने लगते हैं। 
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हिंसक गेम्स से हिंसा के प्रति संवेदनशीलता कम होती है और पेन टॉलरेंस बढ़ता है, जिससे सुसाइड का जोखिम भी बढ़ जाता है। साइकियाट्रिस्ट डॉ. टिमोथी फॉन्ग के अनुसार, अगर कोई किशोर पहले से डिप्रेशन या एडीएचडी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, तो गेमिंग उसकी समस्या और गंभीर कर सकती है। 

2019 के एक अध्ययन में गेमिंग एडिक्शन को अकेलापन, डिप्रेशन और सामाजिक चिंता से जोड़ा गया।  मनोवैज्ञानिक डॉक्टर के अनुसार, माता-पिता अपने बच्चों का स्क्रीन टाइम मॉनिटर करें, खेल-कूद और अन्य हेल्दी एक्टिविटी बढ़ावा दें और अगर लक्षण दिखें तो पेशेवर मदद लें। विश्व स्वास्थ्य संगठन और एपीए जैसी संस्थाएं गेमिंग डिसऑर्डर को मानसिक स्वास्थ्य समस्या मानती हैं। 

परिवार की दूरी से तीनों ने बनाई अपनी अलग दुनिया 
परिवार से जुड़ाव नहीं होने से गेम को ही तीनों ने अपनी दुनिया बना ली। ऐसे में जब माता-पिता ने उसे गेम खेलने के लिए मना किया या फोन छीन लिया होगा तो उन्हें अपनी दुनिया खत्म लगी होगी। गुस्से में आकर उन्होंने आत्महत्या कर ली होगी। ऐसे में माता-पिता को समझना चाहिए कि जब उन्हें फोन की लत है तो उनके साथ जबरदस्ती न करें। परेशानी ज्यादा होने पर मनोचिकित्सक से मिलें। 
- प्रो. डॉ. लोकेश शेखावत, मनोचिकित्सक, आरएमएल अस्पताल

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