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Delhi NCR News: जेएनयू के एसआईएस में देर रात तक हंगामा, आमने-सामने आए छात्र संगठन
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-छात्रा का फोन छीनने और डराने-धमकाने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस) में आयोजित जीबीएम में बृहस्पतिवार देर रात तक जमकर हंगामा हुआ। डीएसएफ ने स्कूल काउंसलर पर एक छात्रा का फोन छीनने और डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए घटना की निंदा की है। साथ ही काउंसलर की जवाबदेही तय करने की मांग की है। डीएसएफ ने बयान जारी कहा कि छात्रा के साथ दुर्व्यवहार और धमकी का व्यवहार किया गया। यह छात्राओं के प्रति पितृसत्तात्मक और स्त्री-विरोधी मानसिकता का उदाहरण है। लोकतांत्रिक छात्र राजनीति में धमकी, डराने-धमकाने और महिलाओं को निशाना बनाने वाली संस्कृति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। किसी निर्वाचित प्रतिनिधि का इस तरह का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है।
इस संबंध में काउंसलर का कहना था कि डीएसएफ का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत है। बिना अनुमति के वीडियो बनाया जा रहा था। जिसको लेकर विरोध दर्ज कराया था। जबकि वह छात्रा एसआईएस की भी नहीं थी। वहीं जेएनयू छात्र संघ के महासचिव सुनील यादव ने एबीवीपी के एक सदस्य पर धमकाने और डराने का भी आरोप लगाया है। एसआईएस में डीएसएफ ने जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के महासचिव सुनील यादव को कथित तौर पर धमकी दिए जाने की भी निंदा की। निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि को धमकी देना केवल व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कृत्य है। इस संबंध में एबीवीपी जेएनयू का कहना था कि यह आरोप पूरी तरह से गलत है। लेफ्ट विचारधारा रखने वालों की यह परंपरा रही है कि पहले भड़काओ और फिर पीड़ित बनकर सहानुभूति लेने में जुट जाते है।
एसआईएस में डीएसएफ ने जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के महासचिव सुनील यादव को कथित तौर पर धमकी दिए जाने की भी निंदा की। निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि को धमकी देना केवल व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कृत्य है। इस संबंध में एबीवीपी जेएनयू का कहना था कि यह आरोप पूरी तरह से गलत है। लेफ्ट विचारधारा रखने वालों की यह परंपरा रही है कि पहले भड़काओ और फिर पीड़ित बनकर सहानुभूति लेने में जुट जाते हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस) में आयोजित जीबीएम में बृहस्पतिवार देर रात तक जमकर हंगामा हुआ। डीएसएफ ने स्कूल काउंसलर पर एक छात्रा का फोन छीनने और डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए घटना की निंदा की है। साथ ही काउंसलर की जवाबदेही तय करने की मांग की है। डीएसएफ ने बयान जारी कहा कि छात्रा के साथ दुर्व्यवहार और धमकी का व्यवहार किया गया। यह छात्राओं के प्रति पितृसत्तात्मक और स्त्री-विरोधी मानसिकता का उदाहरण है। लोकतांत्रिक छात्र राजनीति में धमकी, डराने-धमकाने और महिलाओं को निशाना बनाने वाली संस्कृति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। किसी निर्वाचित प्रतिनिधि का इस तरह का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है।
इस संबंध में काउंसलर का कहना था कि डीएसएफ का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत है। बिना अनुमति के वीडियो बनाया जा रहा था। जिसको लेकर विरोध दर्ज कराया था। जबकि वह छात्रा एसआईएस की भी नहीं थी। वहीं जेएनयू छात्र संघ के महासचिव सुनील यादव ने एबीवीपी के एक सदस्य पर धमकाने और डराने का भी आरोप लगाया है। एसआईएस में डीएसएफ ने जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के महासचिव सुनील यादव को कथित तौर पर धमकी दिए जाने की भी निंदा की। निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि को धमकी देना केवल व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कृत्य है। इस संबंध में एबीवीपी जेएनयू का कहना था कि यह आरोप पूरी तरह से गलत है। लेफ्ट विचारधारा रखने वालों की यह परंपरा रही है कि पहले भड़काओ और फिर पीड़ित बनकर सहानुभूति लेने में जुट जाते है।
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एसआईएस में डीएसएफ ने जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के महासचिव सुनील यादव को कथित तौर पर धमकी दिए जाने की भी निंदा की। निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि को धमकी देना केवल व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला कृत्य है। इस संबंध में एबीवीपी जेएनयू का कहना था कि यह आरोप पूरी तरह से गलत है। लेफ्ट विचारधारा रखने वालों की यह परंपरा रही है कि पहले भड़काओ और फिर पीड़ित बनकर सहानुभूति लेने में जुट जाते हैं।
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