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नमभूमि प्राधिकरण की एनजीटी को रिपोर्ट: अतिक्रमण में डूबे तालाब, प्यासी दिल्ली; पेयल संकट गंभीर होने की आशंका

नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 01 Apr 2026 02:16 AM IST
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सार

कभी बारिश का पानी सहेजने, तापमान संतुलित रखने और जैव विविधता को सहारा देने वाले ये जल स्रोत आज या तो सूख चुके हैं या कब्जे की भेंट चढ़ रहे हैं।

Wetlands Authority report to NGT: Encroached ponds, Delhi thirsty
एनजीटी - फोटो : संवाद
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विस्तार

अतिक्रमण की मार झेल रहे दिल्ली के तालाब शहर के लिए बढ़ते जल संकट का संकेत बनते जा रहे हैं। कभी बारिश का पानी सहेजने, तापमान संतुलित रखने और जैव विविधता को सहारा देने वाले ये जल स्रोत आज या तो सूख चुके हैं या कब्जे की भेंट चढ़ रहे हैं। दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण की राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल हालिया स्थिति रिपोर्ट में सामने आया है कि कई तालाबों का सीमांकन अधूरा है और उनके संरक्षण के लिए ठोस योजना का अभाव है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो पेयजल संकट और भी गंभीर हो जाएगा।

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एनजीटी के 15 दिसंबर 2025 के आदेश के बाद रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें सभी सरकारी विभागों को अपने क्षेत्र के तालाबों की स्थिति, सीमांकन, कब्जे और संरक्षण योजना की जानकारी देने के लिए कहा गया था। इसके लिए 9 जनवरी 2026 को एक साझा ऑनलाइन फॉर्म भी भेजा गया, लेकिन कई विभागों ने अब तक पूरी जानकारी नहीं दी।
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रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पास कुल 416 तालाब दर्ज हैं। इनमें से 124 तालाबों का सीमांकन पूरा हुआ है जबकि 292 तालाबों की सीमाएं अब तक तय नहीं की गई हैं। एक तालाब का सीमांकन लंबित है। राजस्व विभाग, नगर निगम और कुछ अन्य एजेंसियों ने आंशिक जानकारी दी है, लेकिन कई बड़े विभाग जैसे केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने पूरी जानकारी साझा नहीं की।
तालाबों पर बन गए स्कूल, पुलिस स्टेशन, पार्किंग और मकान

रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता तालाबों पर हो रहे कब्जे को लेकर जताई गई है। डीडीए ने माना कि कई तालाब पूरी तरह या आंशिक रूप से अतिक्रमण की चपेट में हैं। इन स्थानों पर स्कूल, पुलिस स्टेशन, पार्किंग, मकान और अन्य निर्माण हो चुके हैं। कुछ जगहों पर तो तालाब का निशान तक नहंी बचा है। राजस्व विभाग ने तीन तालाबों पर पूरी तरह कब्जा होने की बात स्वीकार की है जबकि एएसआई के दो तालाब सूख चुके हैं और कब्जे में हैं। पानी की गुणवत्ता को लेकर भी स्थिति चिंताजनक है। अधिकांश तालाबों में पानी की जांच नहीं की गई है।

सफाई के लिए कोई ठोस योजना नहीं
रिपोर्ट के अनसुार, कई तालाब सूख चुके हैं या आसपास के निर्माण के कारण उनमें पानी भरना बंद हो गया है। रिपोर्ट में सामने आया है कि कई विभागों के पास तालाबों को बचाने, अतिक्रमण हटाने और पानी की सफाई के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। नमभूमि प्राधिकरण ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द तालाबों का सीमांकन पूरा करें, कब्जा हटाएं और जलाशयों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाएं। नमभूमि प्राधिकरण के सदस्य सचिव श्याम सुंदर कांडपाल ने रिपोर्ट में कहा है कि कई विभागों को बार-बार निर्देश देने के बावजूद आवश्यक जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तालाबों को बचाना और उन्हें फिर से जीवित करना बेहद जरूरी है।

छह फुटबॉल मैदान के बराबर जल निकाय हो गए लुप्त
दिल्ली के वन एवं वन्यजीव विभाग ने एनजीटी को सूचित किया है कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले 28 जल निकायों में से छह अब अस्तित्व में नहीं हैं। ये छह लुप्त स्थल कभी मिलकर लगभग 40,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले हुए थे, जो लगभग छह फुटबॉल मैदानों के बराबर है। इनमें छोटे-छोटे ग्रामीण तालाबों से लेकर मध्यम आकार के नमभूमि क्षेत्र शामिल थे। मैदान गढ़ी और शाहुरपुर के तालाब 1,500 वर्ग मीटर जबकि असोला में स्थित सबसे बड़ा तालाब लगभग 20,000 वर्ग मीटर में फैला था। वन विभाग ने बताया कि पांच लुप्त स्थल दक्षिणी वन प्रभाग में असोला, मैदान गढ़ी, शाहूरपुर और छतरपुर जैसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जबकि एक स्थल शास्त्री पार्क में केंद्रीय प्रभाग के अंतर्गत आता है।
 

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