40 साल बाद पत्नी का हत्यारा अरेस्ट: कभी हरियाणा के आश्रम में ली शरण तो कभी पंजाब में चलाया रिक्शा, ऐसे पकड़ाया
आरोपी ने बताया कि वह 40 साल के दौरान बिहार सहित पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में रहा। इस तरह से वह चार दशकों तक कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचता रहा।
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जब वक्त ने हिसाब किया तो इंसाफ ने मरहम लगाया। 40 साल पहले चरित्र पर शक के कारण पत्नी की हत्या का आरोपी आखिरकार गुरुवार को पुलिस की गिरफ्त में आ ही गया। हालांकि उसने पुलिस से बचने की तमाम कोशिश की। कभी हरियाणा के आश्रम में शरण लिया तो कभी पंजाब के पटियाला में रिक्शा चलाया। लेकिन, इस बार दिल्ली पुलिस की सेंट्रल रेंज क्राइम ब्रांच ने उसे नांगली पूना के फैक्टरी के स्टोररूम से गिरफ्तार कर लिया।
1986 का मामला
यह वाकया 19 अक्तूबर 1986 का है। पुलिस निरीक्षक सुनील कुमार कालखंडे ने बताया कि पूर्वी दिल्ली के शकरपुर इलाके में महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि पति चंद्र शेखर प्रसाद को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था। इसी वजह से उसने अपने साथियों के साथ मिलकर ईंटों से सिर कुचलकर पत्नी की हत्या की थी। यही नहीं वारदात के दौरान घर के नौकर को भी बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया गया था। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी भाग गया। 1987 में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया।
चार दशक तक ऐसे बचता रहा आरोपी
चंद्र शेखर प्रसाद 1969 में दिल्ली आया। वह एक समाचार पत्र में कंपोजर के तौर पर काम करता था। उसने 1971 में मृतक से शादी की और अपने परिवार के साथ शकरपुर इलाके में रहने लगा। पुलिस के अनुसार, आरोपी बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में छिपकर रह रहा था। हाल के महीनों में मामले को फिर से खंगालते हुए क्राइम ब्रांच ने विशेष टीम गठित की। इंस्पेक्टर सुनील कुमार कालखंडे के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी और मानवीय इंटेलिजेंस के जरिये आरोपी के परिवार और पुराने ठिकानों की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि आरोपी के बच्चे दिल्ली और बिहार में रह रहे हैं। संदिग्ध मोबाइल नंबरों की निगरानी और बिहार के नालंदा में फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान यह पुष्टि हुई कि आरोपी जिंदा है और कभी-कभी वहां आता-जाता है। तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस को आरोपी की लोकेशन उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में मिली। गुरुवार को पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने हत्या की बात स्वीकार कर ली। उसने बताया कि शक और गुस्से में आकर पत्नी की हत्या की और वारदात के बाद भाग गया।
बिहार सहित कई राज्यों में रहा
आरोपी ने बताया कि वह 40 साल के दौरान बिहार सहित पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में रहा। इस तरह से वह चार दशकों तक कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचता रहा।
डिजिटल रिकॉर्ड के बगैर पुलिस ने खोज निकाला
पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि यह मामला 40 साल से भी ज्यादा समय तक अनसुलझा रहा। आरोपी की पहचान करना चुनौती थी। घटना के समय उसकी उम्र लगभग 40 साल थी और अब वह लगभग 84 साल का हो चुका है। उस जमाने में अदालतों के रिकॉर्ड कागजी होते थे (डिजिटल नहीं) और पहचान के आधुनिक साधनों का पूरी तरह से अभाव था। न कोई आधार कार्ड का रिकॉर्ड था, न कोई मोबाइल डेटा, न ही कोई फोटो वगैरह। बावजूद इसके, लगातार प्रयास और सूझबूझ से पुलिस ने इस मामले में सफलता हासिल की।

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