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World Homeopathy Day: 230 साल पुरानी चिकित्सा पद्धति पर आज भी भरोसा, विशेषज्ञों ने बताए होम्योपैथी के कई फायदे
सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 10 Apr 2026 02:14 AM IST
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सार
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि एआई केवल प्राथमिक जानकारी तक सीमित है और जटिल या दीर्घकालिक बीमारियों के इलाज के लिए चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर एक बार फिर पारंपरिक चिकित्सा पद्धति होम्योपैथी की उपयोगिता और प्रासंगिकता पर चर्चा तेज हो गई है।
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- फोटो : AI Generated
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विस्तार
करीब 230 साल से अधिक पुरानी होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति आज भी लोगों के बीच भरोसेमंद विकल्प बनी हुई है, भले ही आधुनिक दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा हो। आज की युवा पीढ़ी छोटी-मोटी बीमारियों जैसे जुखाम-खांसी के इलाज के लिए एआई आधारित प्लेटफॉर्म का सहारा ले रही है।
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उनका मानना है कि इससे तुरंत सलाह मिल जाती है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि एआई केवल प्राथमिक जानकारी तक सीमित है और जटिल या दीर्घकालिक बीमारियों के इलाज के लिए चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर एक बार फिर पारंपरिक चिकित्सा पद्धति होम्योपैथी की उपयोगिता और प्रासंगिकता पर चर्चा तेज हो गई है।
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केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के अधीन सफदरजंग अस्पताल के होम्योपैथिक उपचार केंद्र की एचओडी डॉ. चेतना दीप लांबा बताती हैं कि एआई कभी भी डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता। उनके अनुसार, होम्योपैथी बीमारी की जड़ तक पहुंचकर इलाज करती है और मरीज की स्थिति के अनुसार असर दिखाती है। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में रोजाना 80 से 100 मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिनमें त्वचा रोग, स्त्री रोग और उम्र से जुड़ी बीमारियां प्रमुख हैं।
होम्योपैथिक का साइड इफेक्ट न के बराबर
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीएन आचार्य के मुताबिक, होम्योपैथिक दवाएं शरीर को अंदर से मजबूत बनाती हैं और इनके साइड इफेक्ट न के बराबर होते हैं। माइग्रेन, स्किन एलर्जी, सांस संबंधी रोग, तनाव और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में यह पद्धति काफी प्रभावी साबित हो रही है।
डॉ. आकाश का कहना है कि होम्योपैथी केवल लक्षणों को दबाती नहीं, बल्कि बीमारी को जड़ से खत्म करने का प्रयास करती है। इसमें दवाएं प्राकृतिक स्रोतों, पौधों, खनिजों और पशु उत्पादों से बनाई जाती हैं, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती हैं।
बढ़ रही है लोगों की प्राथमिकता
रिपोर्ट्स के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग अब होम्योपैथी को प्राथमिक उपचार के रूप में अपना रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग करने वाले हर पांच में से एक व्यक्ति इस पद्धति को चुनता है। हालांकि, सीमित उपलब्धता, कम प्रचार-प्रसार और रिसर्च के लिए कम फंडिंग इसकी प्रगति में बाधा बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के प्रबंधन में भी होम्योपैथी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, चिकित्सक यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी गंभीर बीमारी में स्वयं उपचार के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक चिकित्सा के बीच संतुलन बनाकर ही बेहतर स्वास्थ्य संभव है।