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Yasin Malik: सजा सुनते ही चेहरे पर दिखी ताउम्र कैद की मायूसी, फिर पहुंचा जेल नंबर-7, पढ़ें मलिक के खिलाफ क्या था केस?
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 26 May 2022 08:20 AM IST
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सार
टेंरर फंडिग मामले में यासीन मलिक को ताउम्र कैद की सजा सुनाई गई है। सजा सुनने के बाद यासीन मलिक के चेहरे का रंग उड़ गया था, दो मामले में उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के बाद जेल नंबर-7 के हाई सिक्योरिटी सेल की सुरक्षा और बढ़ा दी गई।
यासीन मलिक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
टेंरर फंडिग मामले में यासीन मलिक को ताउम्र कैद की सजा सुनाने के बाद उसे तिहाड़ जेल ले जाया गया। फिर वही जेल(नंबर-7) में उसे रखा गया, लेकिन हाई सिक्योरिटी सेल की सुरक्षा और बढ़ा दी गई। करीब छह घंटे तक यासीन मलिक अदालत परिसर में सुनवाई के दौरान मौजूद रहा।
इस दौरान वकीलों को भी फैसले का इंतजार था। सुबह के वक्त करीब 11.40 बजे यासीन को कोर्ट के अंदर ले जाया गया जबकि शाम साढ़े पांच बजे के बाद कोर्ट रूम से बाहर भारी सुरक्षा इंतजामों के साथ ले जाया गया।
सजा सुनने के बाद यासीन मलिक के चेहरे का रंग उड़ गया था, दो मामले में उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के बाद जेल नंबर-7 के हाई सिक्योरिटी सेल की सुरक्षा और बढ़ा दी गई। जेल प्रशासन के मुताबिक अब तक वह विचाराधीन कैदी के तौर पर रह रहा था, लेकिन सजा बाद नए सिरे से सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जाएगी।
शाम के वक्त जेल पहुंचने पर यासीन के चेहरे पर मायूसी और बेचैनी दिखी। जेल नंबर-7 के हाई सिक्योरिटी सेल में यासीन मलिक के लिए सुरक्षा इंतजामों में बदलाव के लिए सिक्योरिटी ऑडिट की जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया जाएगा कि जेल में उसे क्या काम दिया जा सकता है।
इस दौरान यासीन मलिक के स्वास्थ्य की भी जांच दोबारा की जाएगी ताकि रिपोर्ट के मुताबिक उससे काम लिया जा सके। जेल में पहुंचने के बाद अदालत के आदेश की कॉपी देखने के बाद यासीन मलिक को सजा के दौरान कैसे रखा जाए, इसपर फैसला लिया जाएगा।
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इस दौरान वकीलों को भी फैसले का इंतजार था। सुबह के वक्त करीब 11.40 बजे यासीन को कोर्ट के अंदर ले जाया गया जबकि शाम साढ़े पांच बजे के बाद कोर्ट रूम से बाहर भारी सुरक्षा इंतजामों के साथ ले जाया गया।
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सजा सुनने के बाद यासीन मलिक के चेहरे का रंग उड़ गया था, दो मामले में उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के बाद जेल नंबर-7 के हाई सिक्योरिटी सेल की सुरक्षा और बढ़ा दी गई। जेल प्रशासन के मुताबिक अब तक वह विचाराधीन कैदी के तौर पर रह रहा था, लेकिन सजा बाद नए सिरे से सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जाएगी।
शाम के वक्त जेल पहुंचने पर यासीन के चेहरे पर मायूसी और बेचैनी दिखी। जेल नंबर-7 के हाई सिक्योरिटी सेल में यासीन मलिक के लिए सुरक्षा इंतजामों में बदलाव के लिए सिक्योरिटी ऑडिट की जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया जाएगा कि जेल में उसे क्या काम दिया जा सकता है।
इस दौरान यासीन मलिक के स्वास्थ्य की भी जांच दोबारा की जाएगी ताकि रिपोर्ट के मुताबिक उससे काम लिया जा सके। जेल में पहुंचने के बाद अदालत के आदेश की कॉपी देखने के बाद यासीन मलिक को सजा के दौरान कैसे रखा जाए, इसपर फैसला लिया जाएगा।
टेरर फंडिंग केस: यासीन मलिक के खिलाफ क्या था केस?
यासीन मलिक जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख है। उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मई 2019 में गिरफ्तार किया था। कश्मीरी अलगाववादी की गिरफ्तारी एक व्यापक आतंकी-वित्त पोषण मामले के संबंध में की गई थी। एजेंसी ने 2017 में मामला दर्ज किया था।
एनआईए ने अपनी प्राथमिकी में कहा है कि कश्मीरी अलगाववादियों को पाकिस्तान से धन प्राप्त हो रहा था, जिसमें हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के सैयद सलाहुद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज सईद शामिल है। स्कूलों को जलाने, पथराव, और हड़ताल और विरोध प्रदर्शन के माध्यम से कश्मीर घाटी में परेशानी पैदा करने के लिए धन प्राप्त किया गया था।
टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक के खिलाफ क्या आरोप थे?
एनआईए ने दावा किया है कि एक कश्मीरी व्यवसायी जहूर अहमद शाह वटाली हवाला के मुख्य माध्यमों में से एक था, जिसने विभिन्न शेल कंपनियों के माध्यम से पाकिस्तान, यूएई और आईएसआई से धन प्राप्त किया। जिसे उसने विदेशी प्रेषण को छिपाने के लिए मंगाया था। उन्होंने कश्मीर घाटी में अलगाववादी नेताओं और पथराव करने वालों को धन हस्तांतरित किया।
जांच के दौरान जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए गए। एनआईए द्वारा पेश किए गए सबूतों ने आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, एकत्र करने, स्थानांतरित करने और उपयोग करने के पैटर्न की ओर इशारा किया था।
एनआईए ने अपनी प्राथमिकी में कहा है कि कश्मीरी अलगाववादियों को पाकिस्तान से धन प्राप्त हो रहा था, जिसमें हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के सैयद सलाहुद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज सईद शामिल है। स्कूलों को जलाने, पथराव, और हड़ताल और विरोध प्रदर्शन के माध्यम से कश्मीर घाटी में परेशानी पैदा करने के लिए धन प्राप्त किया गया था।
टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक के खिलाफ क्या आरोप थे?
एनआईए ने दावा किया है कि एक कश्मीरी व्यवसायी जहूर अहमद शाह वटाली हवाला के मुख्य माध्यमों में से एक था, जिसने विभिन्न शेल कंपनियों के माध्यम से पाकिस्तान, यूएई और आईएसआई से धन प्राप्त किया। जिसे उसने विदेशी प्रेषण को छिपाने के लिए मंगाया था। उन्होंने कश्मीर घाटी में अलगाववादी नेताओं और पथराव करने वालों को धन हस्तांतरित किया।
जांच के दौरान जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर छापेमारी की गई और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद किए गए। एनआईए द्वारा पेश किए गए सबूतों ने आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, एकत्र करने, स्थानांतरित करने और उपयोग करने के पैटर्न की ओर इशारा किया था।

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