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दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में मिलेगी छूट, अब इस आधार पर लगेगा शुल्क; नई दरें लागू

अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 22 May 2026 05:15 PM IST
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सार

दिल्ली सरकार ने पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस को तर्कसंगत बनाते हुए नया नियम लागू किया है। अब शुल्क केवल वास्तविक जल उपयोग और नए निर्माण पर लगेगा। विभिन्न कॉलोनियों, संस्थानों और जेडएलडी सिस्टम वाले भवनों को छूट और राहत का प्रावधान किया गया है।

Delhi government implements new rules rationalizing water and sewer infrastructure charges
सीएम रेखा गुप्ता - फोटो : X/@gupta_rekha
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विस्तार

दिल्ली सरकार ने पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस को तर्कसंगत बनाने का बड़ा फैसला लिया है। अब शुल्क केवल वास्तविक जल आवश्यकता के आधार पर लगाया जाएगा, जबकि पहले पूरे प्रिमाइसेस के हिसाब से चार्ज लिया जाता था। नए नियमों के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस केवल नए या अतिरिक्त निर्माण पर लागू होंगे। पुनर्निर्माण की स्थिति में यदि जल आवश्यकता नहीं बढ़ती, तो दोबारा शुल्क नहीं लिया जाएगा।

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नॉन-एफएआर और खुले क्षेत्र को चार्जेस में शामिल नहीं किया जाएगा। ई और एफ श्रेणी की कॉलोनियों में आईएफसी चार्जेस पर 50 फीसदी और जी व एच श्रेणी की कॉलोनियों में 70 फीसदी छूट दी जाएगी।

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यह शुल्क केवल 200 वर्ग मीटर से अधिक भूखंड क्षेत्र वाली संपत्तियों पर लागू होगा। साथ ही, अनधिकृत कॉलोनियों में पंजीकृत वास्तुकार द्वारा अनुमोदित नक्शों को मान्यता दी जाएगी, ताकि लोगों को सरल और सुविधाजनक प्रक्रिया का लाभ मिल सके।

आयकर अधिनियम की धारा 12AB के तहत पंजीकृत संस्थानों और धार्मिक स्थलों को 50 फीसदी अतिरिक्त छूट दी जाएगी। वहीं, जिन संस्थागत और व्यावसायिक संपत्तियों में जीरो सीवरेज डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम और मानकों के अनुरूप एसटीपी संचालित है, उन्हें भी सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क में 50 फीसदी की छूट मिलेगी। यदि जेडएलडी प्रणाली बंद या निष्क्रिय पाई गई, तो छूट समाप्त कर प्रतिदिन 0.5 फीसदी दंड लगाया जाएगा।

नई नीति के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर चार्जेस में भारी कमी की गई है। उदाहरण के तौर पर, ए और बी श्रेणी में 200 वर्ग मीटर से अधिक भूखंड वाली 300 FAR की चार मंजिला संपत्ति पर पहले ₹13.18 लाख शुल्क लगता था, जो अब घटकर ₹5.4 लाख रह जाएगा। ई और एफ श्रेणी में यही शुल्क लगभग ₹2.7 लाख और जी व एच श्रेणी में ₹1.62 लाख होगा। इसी तरह 1000 वर्ग मीटर की औद्योगिक संपत्ति पर पहले ₹57.67 लाख तक शुल्क लगता था, जो अब घटकर ₹8.91 लाख रह जाएगा। सरकार का कहना है कि यह फैसला लोगों को पारदर्शी, सरल और राहतभरी व्यवस्था देने के उद्देश्य से लिया गया है।

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