उन्नाव दुष्कर्म मामला: पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के भाई को हाईकोर्ट से झटका, अदालत ने आत्मसमर्पण करने को कहा
दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में जयदीप सेंगर को राहत नहीं दी। अदालत ने उसे जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के भाई जयदीप सेंगर को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने जयदीप सेंगर को जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। पीठ अंतरिम जमानत के विस्तार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने पाया कि जुलाई 2024 में मिली अंतरिम जमानत अप्रैल 2025 में अंतिम बार बढ़ाई गई थी। इसके बाद पांच तारीखों पर भी कोई विस्तार आदेश नहीं आया। जयदीप के वकील ने स्वास्थ्य का हवाला देकर रिहाई बढ़ाने का आग्रह किया। पीठ ने कहा, आप आत्मसमर्पण करें, फिर हम देखेंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका पर विचार से पहले उसे आत्मसमर्पण करना होगा।
इससे पहले 17 फरवरी (मंगलवार) को हुई सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने जयदीप सेंगर की अंतरिम जमानत 20 फरवरी तक बढ़ाने से इन्कार कर दिया था। जयदीप सेंगर को ट्रायल कोर्ट ने मामले में 10 साल की सजा सुनाई थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जयदीप सेंगर की तीन महीने की अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका का कड़ा विरोध किया। सीबीआई के वकील ने आरोप लगाया कि जयदीप द्वारा प्रस्तुत प्रिस्क्रिप्शन और मेडिकल दस्तावेज नकली हैं। जयदीप ने ओरल कैंसर से पीड़ित होने का हवाला देते हुए जमानत विस्तार की मांग की थी। उनकी याचिका में कहा गया कि यह जानलेवा स्थिति है, जिसमें पुनरावृत्ति के क्लिनिकल संकेत दिखाई दे रहे हैं और उन्हें निरंतर विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 3 जुलाई 2024 को दी गई अंतरिम जमानत केवल दो महीने के लिए थी और उसके बाद कोई अनिश्चितकालीन विस्तार का आदेश नहीं है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 20 फरवरी की तारीख तय करते हुए सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह जयदीप की स्वास्थ्य स्थिति पर विस्तृत सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करे।
कुलदीप सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग पर नोटिस जारी
उच्च न्यायालय ने उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य दोषियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उस याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें पीड़िता ने अपने पिता की कस्टोडियल डेथ मामले में दोषियों की सजा बढ़ाने की मांग की है। पीड़िता ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि सेंगर को मिली 10 साल की सजा बढ़ाई जाए और मामले की जल्द सुनवाई की जाए।
इस मामले में सेंगर के अलावा बाकी सभी दोषी फिलहाल जमानत पर हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नवीन चावला न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने की। अदालत ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 2 मार्च तय की है। सीबीआई की तरफ से वकील अनुभा भारद्वाज ने कहा कि पहले यह तय होना चाहिए कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, उसके बाद आगे सुनवाई हो। इससे पहले, जस्टिस प्रतिबा एम सिंह और न्यायमूर्ति मंजू जैन की पीठ ने जल्दी सुनवाई की मांग वाली अर्जी पर विचार करते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के पास भेज दिया था।
गौरतलब है कि सेंगर कस्टोडियल डेथ मामले में 10 साल की सजा काट रहा है। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उसे उम्रकैद की सजा मिली हुई है। दोनों मामलों में उसकी अपील हाई कोर्ट में लंबित है। पिछले साल दिसंबर में हाई कोर्ट ने कस्टोडियल डेथ केस में सेंगर की सजा पर रोक लगाई थी, लेकिन बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी।