{"_id":"6a63412794a3b938af0a63c5","slug":"delhi-high-court-dismisses-pil-regarding-jantar-mantar-protest-court-issues-this-order-in-delhi-2026-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिका, कोर्ट ने दिया ये आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिका, कोर्ट ने दिया ये आदेश
Fri, 24 Jul 2026 04:11 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Fri, 24 Jul 2026 04:11 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका वापस लेने के आधार पर खारिज की गई। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की पीठ ने याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका वापस लेने के आधार पर खारिज की गई। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की पीठ ने याचिकाकर्ता को अन्य कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी।
विज्ञापन
याचिका में नीट-यूजी 2026 परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन का जिक्र था। इसमें संसद भवन की ओर मार्च, सड़क जाम और तोड़फोड़ जैसी घटनाओं का उल्लेख था। पुलिसकर्मियों पर हमले और पत्रकारों से दुर्व्यवहार की भी शिकायत की गई थी। याचिका में इन घटनाओं की राष्ट्रीय जांच एजेंसी या किसी विशेष एजेंसी से जांच की मांग थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि जांच एजेंसी का चुनाव संबंधित अधिकारियों का निर्णय है। उन्होंने प्राथमिकियों के मामलों का हवाला देते हुए अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ सुनवाई का सुझाव दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि एनआईए जांच की धारा-6 के तहत स्थिति भिन्न होती है। प्राथमिक एजेंसी की जांच से असंतुष्ट होने पर ही आगे के कदम उठाए जा सकते हैं।
विज्ञापन
घटनाओं की जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई गंभीर घटनाओं की जांच चाही थी। इनमें महिला पत्रकारों सहित अन्य पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार भी शामिल था। छात्रों का यह आंदोलन नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में था। याचिका में इन सभी मामलों की गहन जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
विज्ञापन
अदालत का रुख
याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मौलिक अधिकारों का हवाला दिया। परंतु अदालत ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अंततः याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका वापस लेने पर सहमति जताई। इस सहमति के बाद ही अदालत ने याचिका को खारिज करने का आदेश दिया।