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Delhi: मासूम बच्ची को बिना कपड़ों के पीटती और देती थी गालियां, मां ही बन गई डर की वजह; पुलिस ने दिया सहारा

Tue, 28 Jul 2026 06:21 AM IST
Digvijay Singh ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 28 Jul 2026 06:21 AM IST
सार

पुलिस अपराधियों को पकड़ती है, लेकिन उस दिन हमें एक मां से उसकी बेटी को बचाना पड़ा..। यकीन मानिए, यह हमारे लिए भी आसान नहीं था। लेकिन क्या करते.. वो मां अपनी छह साल की मासूम बच्ची को बिना कपड़े के बाहर खड़ा कर देती थी। 

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mother used to beat child without clothes police came to her rescue in Delhi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पुलिस अपराधियों को पकड़ती है, लेकिन उस दिन हमें एक मां से उसकी बेटी को बचाना पड़ा..। यकीन मानिए, यह हमारे लिए भी आसान नहीं था। लेकिन क्या करते.. वो मां अपनी छह साल की मासूम बच्ची को बिना कपड़े के बाहर खड़ा कर देती थी। उसे मारा करती थी। हमने जैसे ही वीडियो देखा, हम बच्ची को रेस्क्यू करने पहुंच गए। ये बातें जीटीबी एंक्लेव थाना पुलिस टीम बता रही थी। उनके सामने छह साल की एक सहमी हुई बच्ची थी, जो अपनी मां से प्यार भी करती थी और उसी से डरती भी थी।

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जीटीबी एंक्लेव थाना पुलिस को शुरुआत में पड़ोसियों से शिकायत मिली कि एक महिला देर रात गाली-गलौज कर इलाके का माहौल खराब करती है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत करा दिया लेकिन कुछ दिन बाद फिर शिकायत आई कि महिला अपनी छह वर्षीय बेटी को भी बुरी तरह प्रताड़ित करती है। पड़ोसियों ने बताया कि बच्ची को कई बार पर्याप्त खाना नहीं दिया जाता, सजा के तौर पर बिना कपड़ों के बाहर खड़ा कर दिया जाता है और घर से अक्सर उसके रोने-चीखने की आवाजें आती हैं। एसएचओ बृजेश मिश्रा ने बताया, कि पुलिस दूसरी दफा वहां पहुंची और बच्ची से बातचीत करने की कोशिश की। वह बेहद डरी-सहमी हुई थी। पूछने पर पता चला कि वह स्कूल भी नहीं जाती। पुलिस ने स्कूल में दाखिले की बात की, लेकिन बच्ची मां को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुई। उस समय पुलिस के पास कार्रवाई के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने जांच में पड़ोसियों को भी शामिल किया। वीडियो साक्ष्य जुटाने के लिए कहा गया। कुछ दिनों के बाद ही पड़ोसियों ने एक वीडियो दिया।
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इलाज के बाद सामने आई दर्दभरी कहानी
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, कि इहबास में जब महिला को काउंसिलिंग के लिए लाया गया, वह काफी डरी हुई थी। उसे हम पर विश्वास नहीं था। काफी समझाने पर जब उसने देखा कि यहां काउंसिलिंग के लिए उसके जैसी कई महिलाएं हैं, तो वह शांत हो गई। काउंसिलिंग के बाद महिला जोर-जोर से रोने लगी। इस दौरान महिला ने बताया कि उसका पति उसके साथ नहीं है। मायके और ससुराल, दोनों जगह से कोई सहयोग नहीं मिलता। लंबे समय से अकेलेपन और अवसाद से जूझ रही महिला का गुस्सा उसी की बेटी पर निकल रहा था।
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मां से बच्चे को अलग करना किसी भी पुलिसकर्मी के लिए आसान फैसला नहीं होता। लेकिन जब बच्चे की सुरक्षा खतरे में हो, तब उसकी जान और भविष्य को बचाना हमारी पहली जिम्मेदारी बन जाती है। हमारा उद्देश्य सिर्फ बच्ची को बचाना नहीं, बल्कि मां का इलाज कराकर इस परिवार को फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटाना भी है।  -आरपी मीणा, शाहदरा पुलिस उपायुक्त

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