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एनएसडी की पहल: अब मोबाइल पर 66 साल पुराने नाटकों का मंचन...आकाश एप तैयार; दुनिया भर में सुनने की सुविधा

सीमा शर्मा, नई दिल्ली Published by: राहुल तिवारी Updated Fri, 23 Jan 2026 05:27 PM IST
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सार

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा अपने 66 साल पुराने नाटकों को रेडियो और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी में है। एनएसडी द्वारा तैयार आकाश एप के जरिए हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के नाटक दुनिया में कहीं भी सुने जा सकेंगे।
 

National School of Drama will be able to listen to 66 years old plays on Aakash mobile app
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : AI
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विस्तार
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यदि आप नाटकों के शौकीन हैं और खासकर पुराने नाटक जिन्हें आप देख नहीं सकते हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीनस्थ, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) नाटकों को रेडियो पर सुनाने की तैयारी कर रहा है। दुनिया में किसी भी जगह बैठकर हिंदी और क्षेत्रीय भाषा के दर्शक या श्रोता अपने मोबाइल पर बैठकर एनसीडी के 66 साल के नाटकों को सुन पाएंगे।

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एनएसडी के डायरेक्टर चित्तरंजन त्रिपाठी ने बताया, 66 साल पुराने नाटकों का ऑडियो संकलन का काम जारी है। इसके लिए एनएसडी ने आकाश नाम से एप तैयार किया है। इसके माध्यम से रंगप्रेमी पुराने नाटकों की ध्वनी सुन सकते हैं। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए गूगल स्टोर पर जाकर आकाश एप को डाउनलोड करना पड़ेगा। इसी एप पर सभी नाटकों की ध्वनि को किया जाएगा। इसके बाद, दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति नाटक को सुन सकेगा।

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27 जनवरी से भारत रंग महोत्सव
एनएसडी के डायरेक्टर चित्तरंजन त्रिपाठी ने बताया, भारत रंग महोत्सव के 25वें संस्करण का आयोजन 27 जनवरी से 20 फरवरी तक होगा। दिल्ली के अलावा देश के 40 शहरों में नाटक मंचित होंगे। इसमें हर महाद्वीप से एक देश को शामिल किया गया है। इस बार के भारत रंग महोत्सव में 136 भारतीय और 12 विदेशी नाटक, जिनमें 228 भाषाओं और बोलियों में 277 प्रस्तुतियाँ शामिल हैं। इसमें महिला निर्देशकों द्वारा 33 प्रस्तुतियों के अलावा, 19 विश्वविद्यालय और 14 स्थानीय प्रस्तुतियां भी शामिल हैं।

एनएसडी के उपाध्यक्ष प्रोफेसर भरत गुप्त ने बताया, जम्मू-कश्मीर स्थित लेह-लददाख में माइनस डिग्री में दर्शकों को नाटकों की प्रस्तुति देखने को मिलेगी। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के मंडी, हरियाणा के रोहतक,लेह लद्दाख, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन और दीव, मिजोरम के आइजोल, मेघालय में तुरा, असम के नगांव में नाटक मंचित होंगे। महोत्सव में मैथिली, भोजपुरी, तुलु, उर्दू, संस्कृत, ताई खामती और न्यिशी भाषाओं को शामिल किया गया है। इसमें करीब, सभी प्रमुख भारतीय और कई आदिवासी और लुप्तप्राय भाषाओं को भी शामिल किया है।

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