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एक स्क्रीन पर देखें दिल्ली: ट्रैफिक व बसों पर कंट्रोल सेंटर से रीयल टाइम निगरानी, ICCC बनाने की प्रक्रिया शुरू

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Wed, 22 Apr 2026 07:51 AM IST
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सार

अभी तक दिल्ली में अलग-अलग विभाग अपने-अपने सिस्टम के जरिए काम करते हैं, जिससे समन्वय में समय लगता है। आईसीसीसी के बनने के बाद शहर के अलग-अलग सिस्टम जैसे ट्रैफिक कैमरे, बसों के जीपीएस, प्रदूषण मॉनिटरिंग स्टेशन का डाटा एक जगह उपलब्ध होगा।

Preparations Underway to Consolidate Delhi's Surveillance on a Single Platform via the ICCC
Delhi Traffic - फोटो : PTI
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विस्तार

अब एक स्क्रीन पर पूरी दिल्ली देखने की तैयारी है। इसके लिए शास्त्री पार्क स्थित आईटी पार्क में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस सेंटर के जरिए ट्रैफिक, प्रदूषण, बस संचालन और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रीयल टाइम में एक ही प्लेटफॉर्म पर की जा सकेगी। करीब 2.35 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट को 60 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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अभी तक दिल्ली में अलग-अलग विभाग अपने-अपने सिस्टम के जरिए काम करते हैं, जिससे समन्वय में समय लगता है। आईसीसीसी के बनने के बाद शहर के अलग-अलग सिस्टम जैसे ट्रैफिक कैमरे, बसों के जीपीएस, प्रदूषण मॉनिटरिंग स्टेशन का डाटा एक जगह उपलब्ध होगा। इससे अधिकारी एक जगह से पूरे शहर की स्थिति समझ सकेंगे और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे।
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उदाहरण के तौर पर, अगर किसी क्षेत्र में जाम लगता है तो कंट्रोल सेंटर में बैठे अधिकारी लाइव फुटेज देखकर तुरंत ट्रैफिक पुलिस को अलर्ट भेज सकते हैं। इसी तरह प्रदूषण स्तर बढ़ने पर संबंधित एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए जा सकते हैं। बस संचालन में भी यह सिस्टम अहम भूमिका निभा सकता है। 

सार्वजनिक परिवहन की बसों की लोकेशन और टाइमिंग की निगरानी रीयल टाइम में होने से देरी और अव्यवस्था पर लगाम लगाई जा सकती है। इससे यात्रियों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट दिल्ली सरकार की उस योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें शहर की सेवाओं को डाटा आधारित और तेज बनाने पर जोर दिया जा रहा है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सभी विभाग इस सिस्टम से जुड़ते हैं तो फैसले लेने की प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो सकती है। पहले सीमित क्षेत्रों में इस तरह के मॉडल लागू किए जा चुके हैं, लेकिन पूरे शहर स्तर पर यह पहला बड़ा प्रयास होगा। ऐसे में इसकी सफलता न सिर्फ तकनीक, बल्कि विभागों के बीच तालमेल और जवाबदेही पर भी निर्भर करेगी।

इस तरह काम करेगा कंट्रोल सिस्टम
आईसीसीसी को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि शहर से जुड़ी सभी जानकारियां एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई दें। इसके तहत अलग-अलग विभागों के सिस्टम जैसे ट्रैफिक कैमरे, बसों के जीपीएस डिवाइस, प्रदूषण मापने वाले सेंसर और फील्ड में लगे सीसीटीवी को एक नेटवर्क के जरिए जोड़ा जाएगा।  यह डाटा कंट्रोल सेंटर में बड़े डिजिटल डैशबोर्ड पर रीयल टाइम में अपडेट होता रहेगा। जब किसी इलाके में असामान्य स्थिति बनती है, जैसे अचानक ट्रैफिक जाम, सड़क दुर्घटना या प्रदूषण स्तर में वृद्धि तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जनरेट करेगा। इसके बाद कंट्रोल सेंटर में मौजूद अधिकारी संबंधित विभाग जैसे ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग या प्रदूषण नियंत्रण एजेंसी को तुरंत निर्देश भेज सकेंगे। इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम और तकनीक आधारित निर्णय ज्यादा होंगे।

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