दिल्ली के दरवाजे पर घटेगा जाम: एक्सप्रेस-वे बनेगा राजधानी की नई सांस, अक्षरधाम से दून तक सिग्नल-फ्री यात्रा
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे सिर्फ सफर तेज नहीं करेगा, बल्कि उत्तर भारत के ट्रैफिक नक्शे को नए सिरे से गढ़ेगा। उद्घाटन के साथ यह कॉरिडोर कई मौजूदा हाई-वे पर वर्षों से जाम की समस्या कम करेगा।
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे सिर्फ सफर तेज नहीं करेगा, बल्कि उत्तर भारत के ट्रैफिक नक्शे को नए सिरे से गढ़ेगा। उद्घाटन के साथ यह कॉरिडोर कई मौजूदा हाई-वे पर वर्षों से जाम की समस्या कम करेगा। सबसे बड़ा असर दिल्ली-एनसीआर की उन गाड़ियों पर पड़ेगी, जो अब तक देहरादून, हरिद्वार और उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में जाने के लिए शहर के भीतर से गुजरने को मजबूर थी। इससे राजधानी के बॉर्डर पर तो जाम लगता ही था, साथ में दिल्ली की अंदरूनी सड़कें भी भारी वाहनों और बाहरी ट्रैफिक के बोझ तले कराहतीं थीं। यह कॉरिडोर दिल्ली के लिए एक नई लाइफलाइन बनेगी, जो शहर के भीतर की यातायात व्यवस्था को फिर से सांस लेने का मौका देगी।
इस एक्सप्रेस-वे का डिजाइन सिर्फ तेज यात्रा के लिए नहीं, बल्कि ट्रैफिक के पुनर्वितरण (री-रूटिंग) के लिए किया गया है। दिल्ली में इसकी शुरुआत अक्षरधाम से होती है और यह बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाता है। पूरे कॉरिडोर को इस तरह जोड़ा गया है कि बाहरी राज्यों से आने वाली गाड़ियां शहर में घुसे बिना आगे बढ़ सके।
वर्तमान में दिल्ली से देहरादून जाने के लिए लोग मेरठ, मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और एनएच-58 से सफर करते हैं। सामान्य ट्रैफिक में इस सफर में लगभग छह घंटे लगते हैं। नया एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद देहरादून जाने वाला बड़ा ट्रैफिक डीएमई से शिफ्ट होकर सीधे नए कॉरिडोर पर जाएगा। इससे डीएमई पर पीक आवर्स का जाम कम होगा और दिल्ली-गाजियाबाद सेक्शन में ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा।
दिल्ली के भीतर पास-थ्रू ट्रैफिक होगा कम
इस परियोजना का सबसे बड़ा गेमचेंजर पहलू रीजनल डायवर्जन है। पंजाब और हरियाणा से देहरादून जाने वाले वाहन अब ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे (ईपीई) पर आएंगे और वहां से सीधे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएंगे। अभी बड़ी संख्या में वाहन सिर्फ पास-थ्रू के तौर पर दिल्ली से गुजरते हैं यानी उनका गंतव्य दिल्ली नहीं होता। इस पूरी परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हाई-स्पीड ट्रैफिक रीडिस्ट्रिब्यूशन मॉडल के तौर पर विकसित किया है। डीपीआर के अनुसार, एक्सप्रेस-वे पर शुरुआती दौर में 20–30 हजार पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) आने का अनुमान है।
यह होगा फायदा
बाहरी राज्यों का ट्रैफिक शहर से बाहर ही डायवर्ट हो जाएगा ।
दिल्ली के अंदर लोकल ट्रैफिक पर दबाव कम होगा ।
प्रदूषण और ईंधन खपत में भी गिरावट की संभावना ।
राजधानी के बॉर्डर पर ट्रैफिक दबाव घटेगा, खासकर गाजियाबाद, लोनी और पूर्वी दिल्ली के एंट्री पॉइंट्स पर राहत मिलेगी।
मेरठ, मुजफ्फरनगर और रुड़की के भीतर ट्रैफिक दबाव घटेगा।